सागर। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर एवं फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI), सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, तालचिरी में पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं, बच्चों और स्थानीय नागरिकों को संतुलित आहार तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

हर वर्ष 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को सही एवं संतुलित खान-पान के लिए प्रेरित करना है।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि बच्चे के स्वस्थ भविष्य की नींव गर्भावस्था से ही रखी जाती है। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती दो वर्षों तक के लगभग 1000 दिन शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
डॉ साद ने बताया के इस अवधि में मां और बच्चे को पर्याप्त एवं संतुलित पोषण मिलने से बच्चे के शारीरिक विकास, मस्तिष्क के विकास और रोगों से लड़ने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “पोषण का मतलब केवल पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर को सही मात्रा में सभी जरूरी पोषक तत्व देना है।”
FOGSI सागर की अध्यक्ष डॉ. ज्योति चौहान ने कहा कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। इस दौरान पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का सेवन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ चौहान ने महिलाओं से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन एवं कैल्शियम की गोलियां लेने तथा भोजन में विविधता बनाए रखने की अपील की।
कार्यक्रम में फोगसी सचिव डॉ शिविका यादव ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे या विदेशी खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं हैं। हमारे आसपास उपलब्ध स्थानीय, मौसमी और पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी पोषण के अच्छे स्रोत हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध एवं दूध से बने पदार्थ, मौसमी फल, अंकुरित अनाज तथा बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज को दैनिक भोजन में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही अत्यधिक पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, मीठे पेय और जंक फूड के अधिक सेवन से बचने की सलाह भी दी।
डॉ साद ने बताया कि कुपोषण केवल कम वजन या कमजोरी तक सीमित नहीं है। शरीर में आयरन, विटामिन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
आईएमए ने नागरिकों से अपील की कि वे 1 से 7 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह को केवल एक अभियान के रूप में न लें, बल्कि संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी प्रीति प्रजापति , एएनएम द्रोपती प्रजापति और कमलेश रानी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला तथा स्थानीय नागरिकों का उल्लेखनीय सहयोग एवं सहभागिता रही।

हर वर्ष 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को सही एवं संतुलित खान-पान के लिए प्रेरित करना है।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि बच्चे के स्वस्थ भविष्य की नींव गर्भावस्था से ही रखी जाती है। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती दो वर्षों तक के लगभग 1000 दिन शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
डॉ साद ने बताया के इस अवधि में मां और बच्चे को पर्याप्त एवं संतुलित पोषण मिलने से बच्चे के शारीरिक विकास, मस्तिष्क के विकास और रोगों से लड़ने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “पोषण का मतलब केवल पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर को सही मात्रा में सभी जरूरी पोषक तत्व देना है।”
FOGSI सागर की अध्यक्ष डॉ. ज्योति चौहान ने कहा कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। इस दौरान पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का सेवन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ चौहान ने महिलाओं से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन एवं कैल्शियम की गोलियां लेने तथा भोजन में विविधता बनाए रखने की अपील की।
कार्यक्रम में फोगसी सचिव डॉ शिविका यादव ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे या विदेशी खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं हैं। हमारे आसपास उपलब्ध स्थानीय, मौसमी और पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी पोषण के अच्छे स्रोत हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध एवं दूध से बने पदार्थ, मौसमी फल, अंकुरित अनाज तथा बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज को दैनिक भोजन में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही अत्यधिक पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, मीठे पेय और जंक फूड के अधिक सेवन से बचने की सलाह भी दी।
डॉ साद ने बताया कि कुपोषण केवल कम वजन या कमजोरी तक सीमित नहीं है। शरीर में आयरन, विटामिन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
आईएमए ने नागरिकों से अपील की कि वे 1 से 7 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह को केवल एक अभियान के रूप में न लें, बल्कि संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी प्रीति प्रजापति , एएनएम द्रोपती प्रजापति और कमलेश रानी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला तथा स्थानीय नागरिकों का उल्लेखनीय सहयोग एवं सहभागिता रही।
