कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को यह समझाना था कि हृदय गति रुकने की स्थिति में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है और चिकित्सकीय सहायता पहुँचने तक तत्काल CPR किसी व्यक्ति के जीवन की संभावना बढ़ा सकता है।

IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि इस प्रशिक्षण की विशेषता इसकी कविता आधारित एवं सरल प्रशिक्षण पद्धति रही। CPR की आवश्यक और क्रमबद्ध प्रक्रियाओं को आसान तथा लयबद्ध कविता के माध्यम से समझाया गया, ताकि बच्चे और आम नागरिक भी आपात स्थिति में इन्हें आसानी से याद रख सकें और आत्मविश्वास के साथ जीवनरक्षक कदम उठा सकें।
CPR की प्रक्रिया को प्रतिभागियों को इस सरल कविता के माध्यम से समझाया गया
होश नहीं, श्वास नहीं, धड़कन का एहसास नहीं। जोर लगा कर तेज पुकारो, मदद खड़ी हो पास नहीं।तीस दबाव दो, दूना फूंको,जब तक धड़कन श्वास नहीं।
डॉ. तल्हा साद ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि नागरिकों को पहला रिस्पांडर बनने के लिए तैयार करना है। अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में अस्पताल पहुँचने से पहले का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि आसपास मौजूद व्यक्ति तत्काल पहचान कर CPR शुरू कर दे, तो पेशेवर चिकित्सा सहायता मिलने तक जीवनरक्षक सहायता प्रदान की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि CPR की जीवनरक्षक क्षमता स्थापित होने के बावजूद भारत में आम नागरिकों द्वारा CPR किए जाने की दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। IMA सागर का यह अभियान इसी अंतर को कम करने की दिशा में एक प्रयास है, जिसके माध्यम से विभिन्न आयु एवं सामाजिक समूहों में CPR प्रशिक्षण, जागरूकता और व्यावहारिक तत्परता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने CPR की तकनीक को स्वयं पुतले पर करके सीखा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल प्रक्रिया समझाने के बजायदेखो–समझो–
करके सीखो के सिद्धांत पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. तल्हा साद ने कहा कि जन्माष्टमी जैसे आध्यात्मिक एवं सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भक्ति के साथ मानव सेवा और जीवन रक्षा का संदेश भी देता है। IMA का प्रयास है कि CPR का ज्ञान केवल अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक परिवार और समुदाय तक पहुँचे।
किसी की जिंदगी बचाने के लिए हमेशा डॉक्टर होना जरूरी नहीं कभी-कभी सही समय पर सही कदम उठाने वाला एक जागरूक नागरिक ही जीवनदाता बन जाता है।
