सागर। मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री एवं खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 के ध्वनिमत से पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य की सुरक्षा, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक माफियाओं पर निर्णायक प्रहार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि युवाओं के हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर भी विपक्ष ने सुझाव देने की जगह केवल विरोध की राजनीति की।

श्री सिंह ने कहा कि लोकसभा में इस विधेयक पर लगातार दो दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन विपक्षी दलों के सांसदों के भाषण केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहे। उन्होंने कहा कि जिन विषयों पर देश के युवाओं को ठोस समाधान की अपेक्षा थी, वहां विपक्ष ने केवल राजनीतिक वातावरण बनाने का प्रयास किया। उनके अनुसार चर्चा के दौरान कई वक्तव्यों में छात्रों की भावनाओं को भड़काने और उन्हें आंदोलित करने का प्रयास अधिक दिखाई दिया, जबकि आवश्यकता परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सार्थक सुझाव देने की थी।
उन्होंने कहा कि सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि जिन दलों ने सरकार पर सबसे अधिक आरोप लगाए, उन्होंने यह बताने का प्रयास तक नहीं किया कि भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को कैसे रोका जाए। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए विपक्ष की ओर से एक भी ठोस एवं व्यावहारिक सुझाव सामने नहीं आया। इससे स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ लेना है।
श्री सिंह ने कहा कि देश का प्रत्येक विद्यार्थी चाहता है कि उसकी वर्षों की मेहनत किसी पेपर लीक या संगठित नकल गिरोह की वजह से व्यर्थ न जाए। यह विधेयक ऐसे ही ईमानदार और परिश्रमी युवाओं के हितों की रक्षा करने वाला कानून है। उन्होंने कहा कि संशोधित विधेयक में पेपर लीक एवं परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों पर अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा दोषी संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। इससे पेपर लीक माफियाओं और संगठित परीक्षा गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे परीक्षा माफियाओं, संगठित नकल गिरोहों और भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली करने वाले तत्वों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में सरकार को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार लगातार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिसमें योग्य और मेहनती युवाओं को बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष अवसर मिल सके। ऐसे में अपेक्षा थी कि विपक्ष इस विधेयक को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव देता, किंतु उसने ऐसा करने के बजाय राजनीतिक लाभ-हानि को प्राथमिकता दी।
श्री सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों परिवारों की आशाओं और सपनों से जुड़ी होती हैं। जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है, तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों युवाओं का विश्वास भी टूटता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने वाला प्रत्येक कदम देश के भविष्य को मजबूत करने वाला कदम है।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के युवाओं को यह भरोसा दिलाने का प्रयास है कि उनकी मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी के साथ कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा। केन्द्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि भर्ती परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ संपन्न हों तथा किसी भी प्रकार की धांधली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पूर्व गृह मंत्री श्री सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को राजनीति का माध्यम बनाने के बजाय उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सभी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को नई मजबूती देगा तथा आने वाले समय में ईमानदार विद्यार्थियों के हितों की प्रभावी रक्षा करेगा।

श्री सिंह ने कहा कि लोकसभा में इस विधेयक पर लगातार दो दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन विपक्षी दलों के सांसदों के भाषण केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहे। उन्होंने कहा कि जिन विषयों पर देश के युवाओं को ठोस समाधान की अपेक्षा थी, वहां विपक्ष ने केवल राजनीतिक वातावरण बनाने का प्रयास किया। उनके अनुसार चर्चा के दौरान कई वक्तव्यों में छात्रों की भावनाओं को भड़काने और उन्हें आंदोलित करने का प्रयास अधिक दिखाई दिया, जबकि आवश्यकता परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सार्थक सुझाव देने की थी।
उन्होंने कहा कि सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि जिन दलों ने सरकार पर सबसे अधिक आरोप लगाए, उन्होंने यह बताने का प्रयास तक नहीं किया कि भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को कैसे रोका जाए। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए विपक्ष की ओर से एक भी ठोस एवं व्यावहारिक सुझाव सामने नहीं आया। इससे स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ लेना है।
श्री सिंह ने कहा कि देश का प्रत्येक विद्यार्थी चाहता है कि उसकी वर्षों की मेहनत किसी पेपर लीक या संगठित नकल गिरोह की वजह से व्यर्थ न जाए। यह विधेयक ऐसे ही ईमानदार और परिश्रमी युवाओं के हितों की रक्षा करने वाला कानून है। उन्होंने कहा कि संशोधित विधेयक में पेपर लीक एवं परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों पर अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा दोषी संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। इससे पेपर लीक माफियाओं और संगठित परीक्षा गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे परीक्षा माफियाओं, संगठित नकल गिरोहों और भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली करने वाले तत्वों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में सरकार को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार लगातार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिसमें योग्य और मेहनती युवाओं को बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष अवसर मिल सके। ऐसे में अपेक्षा थी कि विपक्ष इस विधेयक को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव देता, किंतु उसने ऐसा करने के बजाय राजनीतिक लाभ-हानि को प्राथमिकता दी।
श्री सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों परिवारों की आशाओं और सपनों से जुड़ी होती हैं। जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है, तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों युवाओं का विश्वास भी टूटता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने वाला प्रत्येक कदम देश के भविष्य को मजबूत करने वाला कदम है।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के युवाओं को यह भरोसा दिलाने का प्रयास है कि उनकी मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी के साथ कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा। केन्द्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि भर्ती परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ संपन्न हों तथा किसी भी प्रकार की धांधली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पूर्व गृह मंत्री श्री सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को राजनीति का माध्यम बनाने के बजाय उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सभी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को नई मजबूती देगा तथा आने वाले समय में ईमानदार विद्यार्थियों के हितों की प्रभावी रक्षा करेगा।
