सागर । पितृपक्ष के पावन अवसर पर रामसरोज समूह,सागर द्वारा आयोजित लगातार पांचवें वर्ष की निशुल्क गयाजी तर्पण और पिंडदान यात्रा भेजी गई।
स्व. रामशंकर केशरवानी एवं स्व. सरोजनी देवी केशरवानी की स्मृति में आयोजित इस सेवा-समर्पित पहल के तहत शहर और आसपास के जरूरतमंद परिवारों को प्रयागराज, काशी और गयाजी अपने पितरों के तर्पण हेतु भेजा जा रहा है। जिसके तहत शनिवार को संत परम पूज्य विपिन बिहारी सरकार एवं नर्मदा भक्त केशव गोस्वामी महाराज के सानिध्य एवं शहर की विशिष्ट मातृशक्ति की उपस्थिति में वेदों मंत्र उच्चारण के साथ टिकट एवं सहयोग राशि भेंट कर यात्रियों को रवाना किया गया। इस दौरान रामसरोज समूह के सदस्यों ने संत जनों का शॉल श्रीफल रुद्राक्ष की माला बाबा खाटू श्याम का छायाचित्र एवं गाय की मूर्ति भेंट कर आशीर्वाद लिया।

मुख्य अतिथि पंडित विपिन बिहारी महाराज ने कहा कि “पितरों का तर्पण और स्मरण हमारी सनातन संस्कृति की रीढ़ है। आज की इस भौतिकवादी युग में जहां लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं रामसरोज समूह ने समाज के उन बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों का हाथ पकड़ा है जो आर्थिक तंगी या अन्य अभावों के कारण गयाजी नहीं जा सकते थे। 121 कुलों के तर्पण का यह संकल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रति सच्ची मानवीय सेवा और पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग है। बबीता संजीव केशरवानी, गीता शैलेश केशरवानी, श्वेता अखिलेश मोनी केशरवानी और पूरा समूह बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता की स्मृति को इस प्रकार अमर कर दिया।”
इस अवसर पर केशव गोस्वामी महाराज ने कहा कि रामसरोज समूह के ऊपर उनके पितरों की विशेष कृपा है। आज वह अपने माता-पिता के नाम से जो कार्य कर रहे हैं। और साथ में शहरवासियों के माता-पिता को तारने के लिए कार्य कर रहे है।
रामसरोज समूह के सदस्य श्रीमती बबीता संजीव केशरवानी ने कहा “हमारे माता-पिता का सपना हमेशा से समाज सेवा का रहा था। उनकी प्रेरणा से शुरू हुई यह यात्रा आज पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। जब हम देखते हैं कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है और जो तर्पण कराने में असमर्थ थे, उनके चेहरों पर गयाजी में पिंडदान के बाद जो संतोष और शांति दिखती है, वही हमारी सच्ची पूंजी है।”
श्रीमती गीता शैलेश केशरवानी ने कहा कि “इस यात्रा में जाति, धर्म या उम्र का कोई बंधन नहीं रखा गया। हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि हर उस व्यक्ति के पितरों को मोक्ष मिले जिनके परिवार साधनहीन हैं। जिन परिवारों में आकस्मिक निधन हुए थे और वे विधि-विधान नहीं कर पाए थे, उनके लिए विशेष अनुष्ठान कराना हमारे लिए आत्मिक शांति का विषय है।”
श्रीमती श्वेता अखिलेश मोनी केशरवानी ने कहा कि “प्रयागराज के संगम स्नान से शुरू हुई यह आध्यात्मिक यात्रा काशी विश्वनाथ के दर्शन और अंत में गयाजी में विधि-विधान से तर्पण पर पूरी होती है विद्वान पंडितों के सानिध्य में हुए इन अनुष्ठानों से न केवल पितृ तृप्त होते हैं, बल्कि हमें भी असीम ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति हुई है।
इस अवसर पर उपस्थित मातृशक्ति ब्रह्माकुमारी मोनिका जी,समाजसेवी निवेदिता रत्नाकर,पूनम पटेल,प्रीति सिंह, प्रीतिमा अरजारिया संजीवनी, भारती नवीन केसरवानी, स्नेहलता साहू,रिचा सिंह पार्षद,प्रीति केसरवानी, शालिनी तिवारी सहित अन्य मातृशक्तियों का शाल श्रीफल रुद्राक्ष की माला एवं बाबा खाटू श्याम जी महाराज भेंट कर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर धर्मवीर साहू,मनु महाराज,विक्रम साहू,मूरत पटेल सहित बड़ी संख्या में तीर्थयात्री जन उपस्थित रहे।
स्व. रामशंकर केशरवानी एवं स्व. सरोजनी देवी केशरवानी की स्मृति में आयोजित इस सेवा-समर्पित पहल के तहत शहर और आसपास के जरूरतमंद परिवारों को प्रयागराज, काशी और गयाजी अपने पितरों के तर्पण हेतु भेजा जा रहा है। जिसके तहत शनिवार को संत परम पूज्य विपिन बिहारी सरकार एवं नर्मदा भक्त केशव गोस्वामी महाराज के सानिध्य एवं शहर की विशिष्ट मातृशक्ति की उपस्थिति में वेदों मंत्र उच्चारण के साथ टिकट एवं सहयोग राशि भेंट कर यात्रियों को रवाना किया गया। इस दौरान रामसरोज समूह के सदस्यों ने संत जनों का शॉल श्रीफल रुद्राक्ष की माला बाबा खाटू श्याम का छायाचित्र एवं गाय की मूर्ति भेंट कर आशीर्वाद लिया।

मुख्य अतिथि पंडित विपिन बिहारी महाराज ने कहा कि “पितरों का तर्पण और स्मरण हमारी सनातन संस्कृति की रीढ़ है। आज की इस भौतिकवादी युग में जहां लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं रामसरोज समूह ने समाज के उन बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों का हाथ पकड़ा है जो आर्थिक तंगी या अन्य अभावों के कारण गयाजी नहीं जा सकते थे। 121 कुलों के तर्पण का यह संकल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रति सच्ची मानवीय सेवा और पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग है। बबीता संजीव केशरवानी, गीता शैलेश केशरवानी, श्वेता अखिलेश मोनी केशरवानी और पूरा समूह बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता की स्मृति को इस प्रकार अमर कर दिया।”
इस अवसर पर केशव गोस्वामी महाराज ने कहा कि रामसरोज समूह के ऊपर उनके पितरों की विशेष कृपा है। आज वह अपने माता-पिता के नाम से जो कार्य कर रहे हैं। और साथ में शहरवासियों के माता-पिता को तारने के लिए कार्य कर रहे है।
रामसरोज समूह के सदस्य श्रीमती बबीता संजीव केशरवानी ने कहा “हमारे माता-पिता का सपना हमेशा से समाज सेवा का रहा था। उनकी प्रेरणा से शुरू हुई यह यात्रा आज पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। जब हम देखते हैं कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है और जो तर्पण कराने में असमर्थ थे, उनके चेहरों पर गयाजी में पिंडदान के बाद जो संतोष और शांति दिखती है, वही हमारी सच्ची पूंजी है।”
श्रीमती गीता शैलेश केशरवानी ने कहा कि “इस यात्रा में जाति, धर्म या उम्र का कोई बंधन नहीं रखा गया। हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि हर उस व्यक्ति के पितरों को मोक्ष मिले जिनके परिवार साधनहीन हैं। जिन परिवारों में आकस्मिक निधन हुए थे और वे विधि-विधान नहीं कर पाए थे, उनके लिए विशेष अनुष्ठान कराना हमारे लिए आत्मिक शांति का विषय है।”
श्रीमती श्वेता अखिलेश मोनी केशरवानी ने कहा कि “प्रयागराज के संगम स्नान से शुरू हुई यह आध्यात्मिक यात्रा काशी विश्वनाथ के दर्शन और अंत में गयाजी में विधि-विधान से तर्पण पर पूरी होती है विद्वान पंडितों के सानिध्य में हुए इन अनुष्ठानों से न केवल पितृ तृप्त होते हैं, बल्कि हमें भी असीम ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति हुई है।
इस अवसर पर उपस्थित मातृशक्ति ब्रह्माकुमारी मोनिका जी,समाजसेवी निवेदिता रत्नाकर,पूनम पटेल,प्रीति सिंह, प्रीतिमा अरजारिया संजीवनी, भारती नवीन केसरवानी, स्नेहलता साहू,रिचा सिंह पार्षद,प्रीति केसरवानी, शालिनी तिवारी सहित अन्य मातृशक्तियों का शाल श्रीफल रुद्राक्ष की माला एवं बाबा खाटू श्याम जी महाराज भेंट कर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर धर्मवीर साहू,मनु महाराज,विक्रम साहू,मूरत पटेल सहित बड़ी संख्या में तीर्थयात्री जन उपस्थित रहे।
