सागर । गौसेवा को जन-जन के जीवन का संस्कार बनाने के संकल्प के साथ परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज श्री ने शनिवार को सागर की बाहुबली कॉलोनी में ‘एक रोटी गौमाता के लिए’ अभियान के अंतर्गत नंगे पैर घर-घर जाकर गौमाता के लिए रोटी माँगी।
महाराज श्री ने हाथों में झोली लेकर लोगों के द्वार पर पहुँचकर गौसेवा के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया। इस दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय रहवासियों ने श्रद्धा एवं भाव के साथ गौमाता के लिए रोटियाँ अर्पित कीं।

इस अभियान का दृश्य अपने आप में सामाजिक समरसता का संदेश भी दे रहा था। हर द्वार पर महाराज श्री झुकते गए ताकि समाज में कोई बड़ा-छोटा न रहे। जात-पात के भेद मिटें, आपसी प्रेम और समरसता का भाव बढ़े—इसी भावना के साथ वे हर किसी को आत्मीयता से गले लगाते गए।
इस दौरान बाहुबली कॉलोनी की गलियों में कहीं ‘गोविंदा-गोविंदा’ का जयघोष सुनाई दिया, तो कहीं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, संत रविदास जी और गजानन बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। अलग-अलग आस्थाओं और परंपराओं से जुड़े इन जयघोषों के बीच महाराज श्री का संदेश एक ही था—प्रेम, समरसता और सेवा।
इस अवसर पर महाराज श्री ने कहा कि गौसेवा केवल सेवा का कार्य नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न अंग है। घर की पहली रोटी गौमाता के नाम करने की परंपरा को पुनः जन-जन तक पहुँचाना ही इस अभियान का उद्देश्य है।
‘एक रोटी गौमाता के लिए’ अभियान के तहत महाराज श्री ने संकल्प लिया है कि एक वर्ष तक प्रत्येक शनिवार को अलग-अलग क्षेत्रों में नंगे पैर, झोली लेकर घर-घर पहुँचकर गौमाता के लिए रोटी माँगी जाएगी। एकत्रित रोटियाँ गौसेवा के लिए समर्पित की जाएँगी। महाराज श्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने घर की पहली रोटी गौमाता के नाम निकालें और इस अभियान से जुड़कर गौसेवा को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ।
यह अभियान केवल एक रोटी एकत्र करने का प्रयास नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा को जन-जन के जीवन से जोड़ने का संकल्प है।
महाराज श्री ने हाथों में झोली लेकर लोगों के द्वार पर पहुँचकर गौसेवा के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया। इस दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय रहवासियों ने श्रद्धा एवं भाव के साथ गौमाता के लिए रोटियाँ अर्पित कीं।

इस अभियान का दृश्य अपने आप में सामाजिक समरसता का संदेश भी दे रहा था। हर द्वार पर महाराज श्री झुकते गए ताकि समाज में कोई बड़ा-छोटा न रहे। जात-पात के भेद मिटें, आपसी प्रेम और समरसता का भाव बढ़े—इसी भावना के साथ वे हर किसी को आत्मीयता से गले लगाते गए।
इस दौरान बाहुबली कॉलोनी की गलियों में कहीं ‘गोविंदा-गोविंदा’ का जयघोष सुनाई दिया, तो कहीं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, संत रविदास जी और गजानन बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। अलग-अलग आस्थाओं और परंपराओं से जुड़े इन जयघोषों के बीच महाराज श्री का संदेश एक ही था—प्रेम, समरसता और सेवा।
इस अवसर पर महाराज श्री ने कहा कि गौसेवा केवल सेवा का कार्य नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न अंग है। घर की पहली रोटी गौमाता के नाम करने की परंपरा को पुनः जन-जन तक पहुँचाना ही इस अभियान का उद्देश्य है।
‘एक रोटी गौमाता के लिए’ अभियान के तहत महाराज श्री ने संकल्प लिया है कि एक वर्ष तक प्रत्येक शनिवार को अलग-अलग क्षेत्रों में नंगे पैर, झोली लेकर घर-घर पहुँचकर गौमाता के लिए रोटी माँगी जाएगी। एकत्रित रोटियाँ गौसेवा के लिए समर्पित की जाएँगी। महाराज श्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने घर की पहली रोटी गौमाता के नाम निकालें और इस अभियान से जुड़कर गौसेवा को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ।
यह अभियान केवल एक रोटी एकत्र करने का प्रयास नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा को जन-जन के जीवन से जोड़ने का संकल्प है।
