सागर। रामसरोज समूह के संस्थापक स्व. रामशंकर केसरवानी एवं समूह की मातृशक्ति स्व. श्रीमती सरोजनी देवी केसरवानी की स्मृति में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन भूतेश्वर मंदिर में 29 वर्षों से निरंतर चल रहे अखंड कीर्तन (“जय गौरी शंकर सीता राम जय पार्वती शिव सीताराम”) और अखंड ज्योत के 30वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में किया गया। रामसरोज जी समूह पिछले 17 वर्षों से अखंड संकीर्तन करने वाले सदस्यों और पुजारियों का सम्मान करता आ रहा है इस वर्ष भी कार्यक्रम का आयोजन रामसरोज समूह के संचालक समाजसेवी बबिता-संजीव केसरवानी, समाजसेवी गीता-शैलेश केशरवानी एवं समाजसेवी श्वेता-अखिलेश मोनी केसरवानी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में त्रिदंडी स्वामी पंडित हृषिकेश महाराज राजघाट, महाराज,कथा वाचक पं भागवत कृष्ण शास्त्री महाराज, कथावाचक अतुल प्रेम महाराज,भूतेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी पं मनोज तिवारी,तथा पंडित पुरोहित पुजारी संघ के अध्यक्ष शिव प्रसाद तिवारी,पंडित रामगोविंद शास्त्री एवं भूतेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र पाठक ने बतौर अतिथि शिरकत की सभी अतिथियों, कथावाचकों कर्मकांड ब्राह्मण एवं संकीर्तन करने वाले सदस्यों का रामसरोज समूह के सदस्यों ने पद्प्रक्षलन कर तिलक लगाकर एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

संकीर्तन करने वाले सदस्यों कंबल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा कथा वाचको एवं कर्मकांडी ब्राह्मणों का शॉल श्रीफल रुद्राक्ष की माला एवं लंच बॉक्स भेंट कर सम्मानित किया गया
त्रिदंडी स्वामी हृषिकेश जी महाराज राजघाट ने कहा कि रामसरोज समूह सदैव अपने माता-पिता के आदर्शों पर चलकर तीर्थ दर्शन, स्वास्थ्य एवं मोतियाबिंद ऑपरेशन, और वृक्षारोपण जैसे परोपकारी कार्य करता रहता है। आज यहाँ आकर यह प्रतीत हुआ कि रामसरोज समूह के सदस्य केवल सेवा भाव जानते हैं। भगवान भूतेश्वर की कृपा इस परिवार पर सदैव बनी रहे। इस अवसर पर विद्वत् पंडित पुरोहित पुजारी संघ के अध्यक्ष शिव प्रसाद तिवारी ने कहा कि जैसा कि शास्त्रों में विदित है कि “कलयुग में केवल नाम अधारा सुमर सुमर उतरे पारा” और भूतेश्वर मंदिर में पिछले 29 वर्षों से राम नाम रूपी संचार हो रहा है और ऐसे सदस्यों का रामसरोज समूह सम्मान कर रहा है वह बधाई के पात्र है।
कथावाचक भगवत कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कहा कि मैं कई माध्यमों से रामसरोज समूह की गतिविधियों को देखता रहा हूँ। समूह के सदस्य निरंतर अखंड कीर्तन करने वालों और ब्राह्मणों का सम्मान करते हुए परोपकारी कार्य कर रहे हैं। भगवान भूतेश्वर का आशीर्वाद इस समूह पर हमेशा बना रहे।
इस अवसर पर कथा वाचक पंडित अतुल प्रेम जी महाराज ने कहा कि रामसरोज परिवार जिस तरह समाज सेवा और धार्मिक कार्य कर रहा है वह इस कलयुग में काम देखने को मिलता है मेरी शुभकामनाएं उनके साथ है।
समाजसेवी संजीव केसरवानी ने कहा कि जो व्यक्ति राम नाम की महिमा का गुणगान करता है, वह संसार के सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। आज के इस स्वार्थी दौर में जहाँ लोग केवल पैसे के पीछे भाग रहे हैं, वहीं आप सभी सदस्य भगवान का नाम जप रहे हैं, आप वास्तव में धन्य हैं। समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि कलयुग में जहाँ संकीर्तन होता है, वहाँ हनुमान जी स्वयं विराजमान रहते हैं। इस प्रांगण में लगभग तीन दशकों से भगवान का जप हो रहा है, इसलिए वीर हनुमान यहाँ स्वयं उपस्थित हैं। भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक पुजारियों और संकीर्तन करने वालों को सम्मानित कर रामसरोज समूह गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि पुजारी और पुरोहितों का सम्मान करना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन परंपरा है। ब्राह्मण सनातन धर्म की रीढ़ हैं। यदि भारत में ब्राह्मण अग्रणी न होते, तो हमारा देश भी पाश्चात्य सभ्यता में विलीन हो चुका होता।
इस अवसर पर मंहत श्री रामदास जी महाराज राजघाट,कृष्ण दास जी महाराज,पंडित मनोज तिवारी,पंडित पुरुषोत्तम गौतम,,चंद्रकांत त्रिपाठी,वेद प्रकाश चतुर्वेदी,राधिका प्रसाद भार्गव,शेखर तिवारी,संदीप पाठक,दीपक शास्त्री,कृष्णा अमृत दास जी राजघाट,पंडित पवन चौबे,डॉ अजय दुबे राजघाट श्यामसुंदर महाराज,पंडित जगदीश प्रसाद तिवारी,हरिशंकर सोनी, विष्णु साहू,अब्बी साहू,अनिल केसरवानी,आशीष ठाकुर,पवन ठाकुर,हिमांशु कटारे,राजीव जैन,आकाश पंडित,सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मणजन एवं अखंड संकीर्तन करने वाले सदस्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में त्रिदंडी स्वामी पंडित हृषिकेश महाराज राजघाट, महाराज,कथा वाचक पं भागवत कृष्ण शास्त्री महाराज, कथावाचक अतुल प्रेम महाराज,भूतेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी पं मनोज तिवारी,तथा पंडित पुरोहित पुजारी संघ के अध्यक्ष शिव प्रसाद तिवारी,पंडित रामगोविंद शास्त्री एवं भूतेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र पाठक ने बतौर अतिथि शिरकत की सभी अतिथियों, कथावाचकों कर्मकांड ब्राह्मण एवं संकीर्तन करने वाले सदस्यों का रामसरोज समूह के सदस्यों ने पद्प्रक्षलन कर तिलक लगाकर एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

संकीर्तन करने वाले सदस्यों कंबल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा कथा वाचको एवं कर्मकांडी ब्राह्मणों का शॉल श्रीफल रुद्राक्ष की माला एवं लंच बॉक्स भेंट कर सम्मानित किया गया
त्रिदंडी स्वामी हृषिकेश जी महाराज राजघाट ने कहा कि रामसरोज समूह सदैव अपने माता-पिता के आदर्शों पर चलकर तीर्थ दर्शन, स्वास्थ्य एवं मोतियाबिंद ऑपरेशन, और वृक्षारोपण जैसे परोपकारी कार्य करता रहता है। आज यहाँ आकर यह प्रतीत हुआ कि रामसरोज समूह के सदस्य केवल सेवा भाव जानते हैं। भगवान भूतेश्वर की कृपा इस परिवार पर सदैव बनी रहे। इस अवसर पर विद्वत् पंडित पुरोहित पुजारी संघ के अध्यक्ष शिव प्रसाद तिवारी ने कहा कि जैसा कि शास्त्रों में विदित है कि “कलयुग में केवल नाम अधारा सुमर सुमर उतरे पारा” और भूतेश्वर मंदिर में पिछले 29 वर्षों से राम नाम रूपी संचार हो रहा है और ऐसे सदस्यों का रामसरोज समूह सम्मान कर रहा है वह बधाई के पात्र है।
कथावाचक भगवत कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कहा कि मैं कई माध्यमों से रामसरोज समूह की गतिविधियों को देखता रहा हूँ। समूह के सदस्य निरंतर अखंड कीर्तन करने वालों और ब्राह्मणों का सम्मान करते हुए परोपकारी कार्य कर रहे हैं। भगवान भूतेश्वर का आशीर्वाद इस समूह पर हमेशा बना रहे।
इस अवसर पर कथा वाचक पंडित अतुल प्रेम जी महाराज ने कहा कि रामसरोज परिवार जिस तरह समाज सेवा और धार्मिक कार्य कर रहा है वह इस कलयुग में काम देखने को मिलता है मेरी शुभकामनाएं उनके साथ है।
समाजसेवी संजीव केसरवानी ने कहा कि जो व्यक्ति राम नाम की महिमा का गुणगान करता है, वह संसार के सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। आज के इस स्वार्थी दौर में जहाँ लोग केवल पैसे के पीछे भाग रहे हैं, वहीं आप सभी सदस्य भगवान का नाम जप रहे हैं, आप वास्तव में धन्य हैं। समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि कलयुग में जहाँ संकीर्तन होता है, वहाँ हनुमान जी स्वयं विराजमान रहते हैं। इस प्रांगण में लगभग तीन दशकों से भगवान का जप हो रहा है, इसलिए वीर हनुमान यहाँ स्वयं उपस्थित हैं। भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक पुजारियों और संकीर्तन करने वालों को सम्मानित कर रामसरोज समूह गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि पुजारी और पुरोहितों का सम्मान करना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन परंपरा है। ब्राह्मण सनातन धर्म की रीढ़ हैं। यदि भारत में ब्राह्मण अग्रणी न होते, तो हमारा देश भी पाश्चात्य सभ्यता में विलीन हो चुका होता।
इस अवसर पर मंहत श्री रामदास जी महाराज राजघाट,कृष्ण दास जी महाराज,पंडित मनोज तिवारी,पंडित पुरुषोत्तम गौतम,,चंद्रकांत त्रिपाठी,वेद प्रकाश चतुर्वेदी,राधिका प्रसाद भार्गव,शेखर तिवारी,संदीप पाठक,दीपक शास्त्री,कृष्णा अमृत दास जी राजघाट,पंडित पवन चौबे,डॉ अजय दुबे राजघाट श्यामसुंदर महाराज,पंडित जगदीश प्रसाद तिवारी,हरिशंकर सोनी, विष्णु साहू,अब्बी साहू,अनिल केसरवानी,आशीष ठाकुर,पवन ठाकुर,हिमांशु कटारे,राजीव जैन,आकाश पंडित,सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मणजन एवं अखंड संकीर्तन करने वाले सदस्यजन उपस्थित रहे।
