सागर । आमाखुर्द प्राथमिक स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से दो मासूम छात्राओं के घायल होने की घटना ने सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष सिंटू कटारे घायल बच्चियों को देखने बीएमसी पहुंचे। उन्होंने उपचाररत छात्राओं और उनके परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली तथा उनके दर्द को साझा किया।

कटारे ने परिजनों से चर्चा के बाद दोपहर में आमाखुर्द पहुंचकर स्कूल परिसर का जायजा लिया। जर्जर भवन की स्थिति देखकर उन्होंने स्कूल परिसर में **‘हकीकत का दिया’ जलाकर सरकार की व्यवस्था के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यह दिया किसी उत्सव का नहीं, बल्कि उस हकीकत को सामने लाने का प्रतीक है, जिसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सिर पर सुरक्षित छत तक उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हीं बच्चों के सिर पर छत का मलबा गिर रहा है। दो बच्चियों के सिर में टांके आना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस लापरवाही की पीड़ा है, जिसे वर्षों से नजरअंदाज किया जाता रहा। यदि भवन वर्ष 2017 से जर्जर था और मरम्मत के लिए लगातार मांग की गई थी, तो जिम्मेदारों ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया।
कटारे ने कहा कि सरकार एक ओर विकास और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जिले के सैकड़ों स्कूल मरम्मत के इंतजार में हैं। आमाखुर्द की घायल बच्चियों के सिर पर लगी चोट सरकारी दावों और जमीन पर मौजूद हकीकत के बीच का अंतर बता रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को एक माह का समय है। यदि एक माह के भीतर आमाखुर्द स्कूल भवन की मरम्मत का काम शुरू कर उसे सुरक्षित नहीं किया गया, तो वे स्वयं अपने स्तर पर स्कूल भवन की मरम्मत का कार्य कराएंगे। कटारे ने कहा कि बच्चों की जिंदगी से जुड़े इस मामले में वे केवल बयान देकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। यदि व्यवस्था बच्चों को सुरक्षित छत उपलब्ध कराने में विफल रहती है तो समाज के सहयोग से इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए वे स्वयं आगे आएंगे।
उन्होंने मांग की कि जिले के सभी जर्जर स्कूल भवनों की तत्काल जांच कराई जाए, असुरक्षित भवनों में पढ़ाई बंद कर बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा आमाखुर्द स्कूल की घटना में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के सिर पर सुरक्षित छत उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, किसी हादसे के बाद जागना नहीं।
शहर सेवादल अध्यक्ष के साथ प्रदेश महासचिव विजय साहू,नितिन पचौरी,परख शुक्ला, पंकज सोनी, प्रवीण यादव,मुकुल अग्निहोत्री, अंकुर यादव,अन्नू घोषी कृष्णा ताम्रकार आदि उपस्थित रहे।

कटारे ने परिजनों से चर्चा के बाद दोपहर में आमाखुर्द पहुंचकर स्कूल परिसर का जायजा लिया। जर्जर भवन की स्थिति देखकर उन्होंने स्कूल परिसर में **‘हकीकत का दिया’ जलाकर सरकार की व्यवस्था के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यह दिया किसी उत्सव का नहीं, बल्कि उस हकीकत को सामने लाने का प्रतीक है, जिसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सिर पर सुरक्षित छत तक उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हीं बच्चों के सिर पर छत का मलबा गिर रहा है। दो बच्चियों के सिर में टांके आना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस लापरवाही की पीड़ा है, जिसे वर्षों से नजरअंदाज किया जाता रहा। यदि भवन वर्ष 2017 से जर्जर था और मरम्मत के लिए लगातार मांग की गई थी, तो जिम्मेदारों ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया।
कटारे ने कहा कि सरकार एक ओर विकास और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जिले के सैकड़ों स्कूल मरम्मत के इंतजार में हैं। आमाखुर्द की घायल बच्चियों के सिर पर लगी चोट सरकारी दावों और जमीन पर मौजूद हकीकत के बीच का अंतर बता रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को एक माह का समय है। यदि एक माह के भीतर आमाखुर्द स्कूल भवन की मरम्मत का काम शुरू कर उसे सुरक्षित नहीं किया गया, तो वे स्वयं अपने स्तर पर स्कूल भवन की मरम्मत का कार्य कराएंगे। कटारे ने कहा कि बच्चों की जिंदगी से जुड़े इस मामले में वे केवल बयान देकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। यदि व्यवस्था बच्चों को सुरक्षित छत उपलब्ध कराने में विफल रहती है तो समाज के सहयोग से इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए वे स्वयं आगे आएंगे।
उन्होंने मांग की कि जिले के सभी जर्जर स्कूल भवनों की तत्काल जांच कराई जाए, असुरक्षित भवनों में पढ़ाई बंद कर बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा आमाखुर्द स्कूल की घटना में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के सिर पर सुरक्षित छत उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, किसी हादसे के बाद जागना नहीं।
शहर सेवादल अध्यक्ष के साथ प्रदेश महासचिव विजय साहू,नितिन पचौरी,परख शुक्ला, पंकज सोनी, प्रवीण यादव,मुकुल अग्निहोत्री, अंकुर यादव,अन्नू घोषी कृष्णा ताम्रकार आदि उपस्थित रहे।
