सागर । बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा अनुसंधान एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि अर्जित की है। बीएमसी की रिसर्च वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा तथा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं एमआरयू (MRU) के को-नोडल अधिकारी डॉ. सुमित रावत सहित उनके शोध दल का शोधपत्र विश्व के प्रतिष्ठित जर्नल “World Journal of Gastroenterology”* में प्रकाशित हुआ है। उल्लेखनीय है कि 5.4 इम्पैक्ट फैक्टर वाला यह जर्नल चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है।

*भारत में हेपेटाइटिस-डी की व्यापकता पर देश का पहला विस्तृत अध्ययन*
यह भारत में हेपेटाइटिस-डी वायरस (HDV) की व्यापकता” विषय पर आधारित है। इसके अंतर्गत देश में हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मरीजों में हेपेटाइटिस-डी संक्रमण की वर्तमान स्थिति का गहन व विस्तृत मेटा-एनालिसिस (Meta-Analysis) किया गया है। यह अध्ययन Epidemiology Study Group of Viral Hepatitis (ESGVH) के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ है। शोध के निष्कर्ष भविष्य में हेपेटाइटिस रोग की समय पर रोकथाम, शीघ्र पहचान (Early Detection) तथा राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर उपचार रणनीति विकसित करने में नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
**संस्थान का अनुसंधान- अनुकूल वातावरण उपलब्धि का मुख्य आधार**
इस अकादमिक सफलता पर वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस शोध का श्रेय डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च, बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर, एमआरयू की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता भटनागर तथा डॉ. सुमित रावत के सतत मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग एवं संस्थान में उपलब्ध शोध-अनुकूल वातावरण को दिया है।
इस उपलब्धि पर डीन डॉ पी एस ठाकुर ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। बीएमसी सागर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ उच्चस्तरीय चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research) में भी निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। इस प्रकार के वैज्ञानिक शोध संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने कहा कि
हेपेटाइटिस-बी के साथ हेपेटाइटिस-डी का ‘को-इंफेक्शन’ (Co-infection) मरीजों में लिवर की जटिलताओं को अत्यधिक बढ़ा देता है। बीएमसी की टीम द्वारा प्रस्तुत यह मेटा-एनालिसिस देश में इस मूक बीमारी के वास्तविक आंकड़ों और गंभीरता को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। यह वैज्ञानिक शोध क्लिनिकल प्रैक्टिस और भविष्य में मरीजों के उपचार प्रबंधन (Patient Management) को अधिक सटीक बनाने में बेहद मददगार सिद्ध होगा।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने मध्य प्रदेश के अग्रणी सुपर-स्पेशियलिटी और अनुसंधान केंद्रों में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ किया है।

*भारत में हेपेटाइटिस-डी की व्यापकता पर देश का पहला विस्तृत अध्ययन*
यह भारत में हेपेटाइटिस-डी वायरस (HDV) की व्यापकता” विषय पर आधारित है। इसके अंतर्गत देश में हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मरीजों में हेपेटाइटिस-डी संक्रमण की वर्तमान स्थिति का गहन व विस्तृत मेटा-एनालिसिस (Meta-Analysis) किया गया है। यह अध्ययन Epidemiology Study Group of Viral Hepatitis (ESGVH) के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ है। शोध के निष्कर्ष भविष्य में हेपेटाइटिस रोग की समय पर रोकथाम, शीघ्र पहचान (Early Detection) तथा राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर उपचार रणनीति विकसित करने में नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
**संस्थान का अनुसंधान- अनुकूल वातावरण उपलब्धि का मुख्य आधार**
इस अकादमिक सफलता पर वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस शोध का श्रेय डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च, बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर, एमआरयू की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता भटनागर तथा डॉ. सुमित रावत के सतत मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग एवं संस्थान में उपलब्ध शोध-अनुकूल वातावरण को दिया है।
इस उपलब्धि पर डीन डॉ पी एस ठाकुर ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। बीएमसी सागर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ उच्चस्तरीय चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research) में भी निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। इस प्रकार के वैज्ञानिक शोध संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने कहा कि
हेपेटाइटिस-बी के साथ हेपेटाइटिस-डी का ‘को-इंफेक्शन’ (Co-infection) मरीजों में लिवर की जटिलताओं को अत्यधिक बढ़ा देता है। बीएमसी की टीम द्वारा प्रस्तुत यह मेटा-एनालिसिस देश में इस मूक बीमारी के वास्तविक आंकड़ों और गंभीरता को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। यह वैज्ञानिक शोध क्लिनिकल प्रैक्टिस और भविष्य में मरीजों के उपचार प्रबंधन (Patient Management) को अधिक सटीक बनाने में बेहद मददगार सिद्ध होगा।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने मध्य प्रदेश के अग्रणी सुपर-स्पेशियलिटी और अनुसंधान केंद्रों में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ किया है।
