जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ, जबलपुर ने सागर जिले में पदस्थ वरिष्ठ जिला पंजीयक एवं कलेक्टर स्टाम्प निधि जैन से जुड़े मामले में अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं किए जाने पर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन के प्रमुख सचिव (वित्त विभाग) को नोटिस जारी किया है।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता मयंक प्रजापति ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि इससे पूर्व हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया था कि निधि जैन के विरुद्ध प्रस्तुत शिकायत एवं उपलब्ध जांच प्रतिवेदन पर विधि अनुसार विचार करते हुए छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को उससे अवगत कराया जाए। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद न तो कोई निर्णय लिया गया और न ही न्यायालय के आदेश का पालन किया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उन्हें हाईकोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव, वित्त विभाग को नोटिस जारी किया है तथा पूर्व आदेश के अनुपालन के संबंध में उचित कार्रवाई कर जवाब/अनुपालन प्रतिवेदन (Compliance Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि मूल याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन जिला पंजीयक, जबलपुर एवं वर्तमान वरिष्ठ जिला पंजीयक, सागर निधि जैन द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी माता के नाम क्रय की गई संपत्ति के पंजीयन में अनियमितता की गई थी। इस संबंध में पूर्व में उच्चस्तरीय जांच भी कराई गई थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की मांग करते हुए प्रमुख सचिव को शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत पर कार्रवाई न होने के कारण हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें न्यायालय ने छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश पारित किया था।
अब न्यायालय के आदेश का निर्धारित अवधि में पालन नहीं होने पर दायर अवमानना याचिका में हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद इस मामले में विभागीय कार्रवाई और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले अनुपालन प्रतिवेदन पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता मयंक प्रजापति ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि इससे पूर्व हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया था कि निधि जैन के विरुद्ध प्रस्तुत शिकायत एवं उपलब्ध जांच प्रतिवेदन पर विधि अनुसार विचार करते हुए छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को उससे अवगत कराया जाए। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद न तो कोई निर्णय लिया गया और न ही न्यायालय के आदेश का पालन किया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उन्हें हाईकोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव, वित्त विभाग को नोटिस जारी किया है तथा पूर्व आदेश के अनुपालन के संबंध में उचित कार्रवाई कर जवाब/अनुपालन प्रतिवेदन (Compliance Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि मूल याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन जिला पंजीयक, जबलपुर एवं वर्तमान वरिष्ठ जिला पंजीयक, सागर निधि जैन द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी माता के नाम क्रय की गई संपत्ति के पंजीयन में अनियमितता की गई थी। इस संबंध में पूर्व में उच्चस्तरीय जांच भी कराई गई थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की मांग करते हुए प्रमुख सचिव को शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत पर कार्रवाई न होने के कारण हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें न्यायालय ने छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश पारित किया था।
अब न्यायालय के आदेश का निर्धारित अवधि में पालन नहीं होने पर दायर अवमानना याचिका में हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद इस मामले में विभागीय कार्रवाई और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले अनुपालन प्रतिवेदन पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
