सागर। मकरोनिया स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम में आईएमए सागर और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त रक्तदान शिविर में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, आश्रम सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर कुल 52 यूनिट रक्तदान किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्लड बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. एम.के. जैन ने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि जीवनदान है। एक यूनिट रक्त को रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स जैसे विभिन्न घटकों में विभाजित कर जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जा सकता है। दुर्घटनाओं, शल्य चिकित्सा, गंभीर रक्ताल्पता और कैंसर जैसी स्थितियों में रक्त की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है और इसे प्रयोगशाला में तैयार नहीं किया जा सकता। इसलिए सुरक्षित और पर्याप्त रक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रक्तदान सुरक्षित, सरल और मानवीय कार्य है। इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए ऐसे शिविरों का नियमित आयोजन आवश्यक है।
डॉ. साद ने कहा कि रक्तदान शिविर आयोजित करने से लोगों में व्याप्त भ्रांतियां दूर करने में मदद मिलती है। इनमें रक्तदान से अत्यधिक कमजोरी आने या स्वास्थ्य खराब होने जैसी धारणाएं शामिल हैं। उन्होंने अधिक से अधिक स्वस्थ और पात्र नागरिकों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने का आह्वान किया।ऐसे शिविर समाज में सहयोग, जागरूकता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करते हैं।
आईएमए सागर ने बताया कि भविष्य में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जा सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्लड बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. एम.के. जैन ने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि जीवनदान है। एक यूनिट रक्त को रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स जैसे विभिन्न घटकों में विभाजित कर जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जा सकता है। दुर्घटनाओं, शल्य चिकित्सा, गंभीर रक्ताल्पता और कैंसर जैसी स्थितियों में रक्त की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है और इसे प्रयोगशाला में तैयार नहीं किया जा सकता। इसलिए सुरक्षित और पर्याप्त रक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रक्तदान सुरक्षित, सरल और मानवीय कार्य है। इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए ऐसे शिविरों का नियमित आयोजन आवश्यक है।
डॉ. साद ने कहा कि रक्तदान शिविर आयोजित करने से लोगों में व्याप्त भ्रांतियां दूर करने में मदद मिलती है। इनमें रक्तदान से अत्यधिक कमजोरी आने या स्वास्थ्य खराब होने जैसी धारणाएं शामिल हैं। उन्होंने अधिक से अधिक स्वस्थ और पात्र नागरिकों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने का आह्वान किया।ऐसे शिविर समाज में सहयोग, जागरूकता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करते हैं।
आईएमए सागर ने बताया कि भविष्य में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जा सके।
