23 जुलाई प्रातः 10 बजे से सायं 4 बजे तक होने वाले आयोजन को लेकर भंडारा दोपहर 12 बजे से शुरू होगा।

इस महोत्सव का आयोजन अजब श्री सेवा समिति अजब धाम एवं मलूक पीठ परिवार, जिला दमोह एवं सागर द्वारा किया जा रहा है।
आयोजन समिति प्रमुख प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक प्रवचन, गुरु पूजन, भजन-कीर्तन एवं गुरु दीक्षा जैसे विशेष आयोजन भी होंगे। उन्होंने कहा कि संत राजेंद्रदास देवाचार्य ,महंत श्री राम अनुग्रह दास छोटे सरकार सहित अनेक ख्यातिनाम संतों का गुरु परंपरा अनुसार स्वागत होगा। श्रद्धालु विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर संतों की अगवानी करेंगे। भक्तजन आरती उतारकर, जयघोषों के साथ संतों का अभिनंदन करेंगे। पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बनाएगी।
ग्राम सानोंधा से शुरू होगा स्वागत का कारवां
आयोजकों के अनुसार संत श्री के स्वागत की शुरुआत ग्राम सानोंधा से होगी। वहां से श्रद्धालुओं का स्वागत कारवां बहेरिया ,मकरोनिया, सिविल लाइन,तहसीली सहित विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए आयोजन स्थल तिली रोड स्थित होटल रॉयल पैलेस किला कोठी पहुंचेगा।
इस दौरान अनेक स्थानों पर भक्तगण संत श्री की आरती और पूजन करेंगे। स्वागत यात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा और बच्चे शामिल होंगे।
शहर के चारों ओर सजेंगे मंगल द्वार
गुरुपूजन महोत्सव को लेकर शहर के प्रमुख मार्गों और प्रवेश स्थलों पर आकर्षक मंगल द्वार स्थापित किए जाएंगे। स्वागत बैनर, धार्मिक ध्वज, पुष्प सज्जा और आध्यात्मिक संदेशों से पूरा वातावरण धर्ममय और उत्सवमय दिखाई देगा। आयोजन स्थल पर सजावट की जा रही है। जिससे श्रद्धालुओं को दिव्य और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हो सके।
गुरु सेवा के लिए आतुर श्रद्धालु
गुरु सेवा को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि महोत्सव की तैयारियों में शिष्य मंडल जी जान से जुटे हुए हैं। शिष्य मंडल स्वागत की तैयारी में लगा है। कई भक्त भंडारा, जल सेवा और अन्य व्यवस्थाओं में अपना योगदान देने आतुर दिख रहे हैं।
प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि गुरु महाराज की आज्ञा के अनुसार इच्छुक श्रद्धालुओं को गुरु दीक्षा दी जाएगी। सनातन परंपरा में गुरु दीक्षा को आत्मिक जागरण और साधना के मार्ग का प्रथम कदम माना जाता है। दीक्षा के माध्यम से साधक को आध्यात्मिक जीवन की दिशा और गुरु कृपा का संरक्षण प्राप्त होता है।
