


महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविद, चिंतक एवं शोधकर्ता वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में एकात्म मानव दर्शन की भूमिका पर पांच वैचारिक सत्रों में मंथन कर रहे हैं।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि सागर विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन, श्रीराम दरबार मंदिर मकरोनिया के महंत केशव गिरी महाराज, पूर्व क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. राधावल्लभ शर्मा, सागर संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे, ओएसडी डॉ. भावना यादव, मुख्य वक्ता डॉ. विश्वास चौहान तथा सारस्वत वक्ता डॉ. श्रीजी सेठ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। सरस्वती वंदना की मनोहारी प्रस्तुति बलविंदर सिंह संधू एवं अवनी सिंह राजपूत की टीम ने दी।
मुख्य अतिथि विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और अंत्योदय के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन ही विकसित भारत-2047 की मजबूत वैचारिक नींव है। पंडित दीनदयाल का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने जनसंघ के संगठन निर्माण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और संगठन क्षमता के कारण जनसंघ ने अल्प समय में उल्लेखनीय विस्तार प्राप्त किया। विधायक श्री जैन ने विद्यार्थियों की मांग पर कला संकाय भवन परिसर में विधायक निधि से शेड निर्माण कराने की घोषणा भी की।
महंत केशव गिरी महाराज ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन परिवार, समाज और राष्ट्र को जोड़ने वाला जीवन दर्शन है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रवादी चिंतन को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति सबके प्रति समान दृष्टि रखकर राष्ट्र कल्याण का संकल्प लेता है, वही वास्तविक अर्थों में दीनदयाल बनने की दिशा में आगे बढ़ता है।”
विशिष्ट वक्ता डॉ. राधावल्लभ शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद भारतीय दर्शन की उसी परंपरा का विस्तार है, जिसकी मूल प्रेरणा आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन में निहित है। उन्होंने नानाजी देशमुख और पंडित दीनदयाल को राष्ट्र जीवन के आदर्श व्यक्तित्व बताया।
प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन आज वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय और मानवीय मूल्यों पर आधारित विकास ही विकसित भारत-2047 का वास्तविक मार्ग है। उन्होंने युवाओं से इस वैचारिक अमृत को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों ने महाविद्यालय की शोध पत्रिका ‘शोध क्षितिज’ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित विशेषांक का विमोचन किया। संगोष्ठी संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता मुखर्जी ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
पीएम-ऊषा परियोजना की समन्वयक डॉ. इमराना सिद्दीकी ने परियोजना के अंतर्गत महाविद्यालय में किए गए विकास कार्यों एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
प्रथम तकनीकी सत्र में शासकीय राजीव गांधी महाविद्यालय, बंडा के प्राचार्य डॉ. कुलदीप यादव ने एकात्म मानव दर्शन के चार आधार—व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्ठी—पर विस्तार से विचार रखे। अध्यक्षता डॉ. अनुपम शर्मा ने की।
द्वितीय एवं तृतीय तकनीकी सत्रों में आर.के. गोस्वामी ने विकसित भारत-2047 के विज़न डॉक्यूमेंट तथा उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डॉ. भावना यादव ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन जीवन मूल्यों और राष्ट्रीय विकास का समन्वित दर्शन है।
मुख्य वक्ता डॉ. सर्वेश्वर उपाध्याय ने इसे विश्व की सर्वश्रेष्ठ मानवीय आर्थिक व्यवस्था बताया, जबकि डॉ. अमर कुमार जैन ने कहा कि यह दर्शन पूंजीवाद और साम्यवाद की सीमाओं से ऊपर उठकर भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित संतुलित विकास का मार्ग प्रस्तुत करता है। इस दौरान शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
उद्घाटन सत्र का संचालन संगोष्ठी के सहसंयोजक डॉ. संदीप सबलोक ने किया तथा प्रारंभिक सत्र का आभार प्रदर्शन डॉ. प्रतिभा जैन ने किया। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. अभिलाषा जैन एवं आभार अरविंद चतुर्वेदी ने व्यक्त किया। द्वितीय एवं तृतीय तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. राणा कुंजर सिंह तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती रेणु सोलंकी ने किया।के
संगोष्ठी में डॉ. गोपा जैन, डॉ. विनय शर्मा, डॉ. शुचिता अग्रवाल,जी डॉ. शैलेन्द्र राजपूत, डॉ. प्रज्ञा दुबे, डॉ. रेणु सोलंकी, डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. अंकुर गौतम, भानुप्रिया पटेल, वसुंधरा गुप्ता, डॉ. अशोक पन्या सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
