सागर । डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के अभिमंच सभागार में गौर व्याख्यान माला कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ मां सरस्वती एवं विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. सर हरीसिंह गौर के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। व्याख्यान माला कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. डी.पी. सिंह, पूर्व अध्यक्ष यूजीसी, पूर्व कुलपति सागर विश्वविद्यालय, पूर्व कुलपति बनारस हिंदू विश्वविद्यालय थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वाय.एस. ठाकुर ने की. कार्यक्रम के संयोजक प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत एवं विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. सत्यप्रकाश उपाध्याय भी मंचासीन रहे |

कार्यक्रम के आरंभ में संयोजक प्रो. राजपूत ने अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की. ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : क्रियान्वयन के विविध आयाम’- ‘नए भारत हेतु शिक्षा का रूपांतरण’ विषय पर बोलते हुए प्रो. डी. पी. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल आत्मा यह कहती है कि हमें अपने विद्यार्थियों को भारतीय जड़ों से जुड़ते हुए वैश्विक नागरिक के रूप में स्थापित करना है. आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हमें हजारों विद्यार्थियों को आत्मज्ञान और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण नागरिक के रूप में समाज को देना है, तभी नया भारत पूरे विश्व का नेतृत्व कर सकेगा |
उन्होंने अपने जीवन अनुभवों को साझा करते हुए डॉ. हरीसिंह गौर के व्यक्तित्व और उनके सपनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विश्वविद्यालय एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, उसी प्रकार डॉ. हरीसिंह गौर का व्यक्तित्व भी अत्यंत ऊँचा और प्रेरणादायी है । प्रो. सिंह ने विद्यार्थियों को अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि वे पहली बार डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में कुलपति बनकर आए थे । इसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, यूजीसी के अध्यक्ष पद तथा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई तक के अपने सफर को साझा किया ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि अच्छे इंसान का निर्माण करना है। उन्होंने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कृति, परंपरा, आस्था तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पाँच स्तंभों, वैश्विक नागरिक (ग्लोबल सिटीजन) की अवधारणा, कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी नेतृत्व तथा “लाइट बट टाइट” शिक्षा मॉडल की विस्तार से चर्चा की। प्रो. सिंह ने अपने साइकिल अभियान का भी उल्लेख किया । उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में दुर्घटनाओं को कम करने और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने स्वयं परिसर में साइकिल चलाने की पहल की थी । उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत लागू किए गए महत्वपूर्ण नवाचारों जैसे एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, बहुविषयक शिक्षा तथा पाठ्यक्रम आधारित अधिगम की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने विवि में एनईपी-2020 के अंतर्गत चल रहे बहु-विषयक कार्यक्रम एवं अकादमिक बैंक क्रेडिट के क्रियान्वयन पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त स्पोर्ट्स योजनाओं पर अपने विचार रखे. उन्होंने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत किए गए विभिन्न नवाचारों एवं पहलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के वैली कैंपस में छात्राओं के लिए 1000 सीटों तथा छात्रों के लिए 1000 सीटों की क्षमता वाले अत्याधुनिक छात्रावासों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मध्य भारत के किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रावास अवसंरचना के सबसे बड़े विस्तारों में से एक होगा। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, स्टार्टअप और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि रोजगार सृजक और नवाचार आधारित नेतृत्वकर्ता बन सके।
कार्यक्रम के अंत में आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ एवं शिक्षा शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल जैन ने विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न दस आयामों के परिसंवाद कार्यक्रम के बारे में उल्लेख किया जिसकी रिकॉर्डिंग विश्वविद्यालय के ई.एम.एम.आर.सी. के यूट्यूब चैनल पर समस्त विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए उपलब्ध है. प्रो. जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एनईपी के सभी क्षेत्रों पर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कर पुस्तके प्रकाशित की हैं | विश्वविद्यालय ने एनईपी के अंतर्गत अनुसंधान आधारित चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम आरंभ कर दिया है. एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम की योजना भी पूर्ण कर ली है साथ ही सामाजिक सरोकारों से युक्त पाठ्यक्रमों की रचना का कार्य आरंभ कर दिया है. विश्वविद्यालय ने एनईपी-2020 के अधिकांश घटकों को समर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन सुविधा के रूप में उपलब्ध कराना आरंभ कर दिया है |
कार्यक्रम समापन पर प्रो जैन ने आभार प्रकट करते हुए मुख्य अतिथि को यह आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय उनके द्वारा बताए गए नए पंचशील सिद्धांतों की ओर अग्रसर होकर कार्य आरंभ करेगा. कार्यक्रम का संचालन डॉ. किरण आर्या ने किया. संगीत विभाग के छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी गई. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ ।

कार्यक्रम के आरंभ में संयोजक प्रो. राजपूत ने अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की. ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : क्रियान्वयन के विविध आयाम’- ‘नए भारत हेतु शिक्षा का रूपांतरण’ विषय पर बोलते हुए प्रो. डी. पी. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल आत्मा यह कहती है कि हमें अपने विद्यार्थियों को भारतीय जड़ों से जुड़ते हुए वैश्विक नागरिक के रूप में स्थापित करना है. आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हमें हजारों विद्यार्थियों को आत्मज्ञान और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण नागरिक के रूप में समाज को देना है, तभी नया भारत पूरे विश्व का नेतृत्व कर सकेगा |
उन्होंने अपने जीवन अनुभवों को साझा करते हुए डॉ. हरीसिंह गौर के व्यक्तित्व और उनके सपनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विश्वविद्यालय एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, उसी प्रकार डॉ. हरीसिंह गौर का व्यक्तित्व भी अत्यंत ऊँचा और प्रेरणादायी है । प्रो. सिंह ने विद्यार्थियों को अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि वे पहली बार डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में कुलपति बनकर आए थे । इसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, यूजीसी के अध्यक्ष पद तथा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई तक के अपने सफर को साझा किया ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि अच्छे इंसान का निर्माण करना है। उन्होंने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कृति, परंपरा, आस्था तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पाँच स्तंभों, वैश्विक नागरिक (ग्लोबल सिटीजन) की अवधारणा, कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी नेतृत्व तथा “लाइट बट टाइट” शिक्षा मॉडल की विस्तार से चर्चा की। प्रो. सिंह ने अपने साइकिल अभियान का भी उल्लेख किया । उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में दुर्घटनाओं को कम करने और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने स्वयं परिसर में साइकिल चलाने की पहल की थी । उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत लागू किए गए महत्वपूर्ण नवाचारों जैसे एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, बहुविषयक शिक्षा तथा पाठ्यक्रम आधारित अधिगम की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने विवि में एनईपी-2020 के अंतर्गत चल रहे बहु-विषयक कार्यक्रम एवं अकादमिक बैंक क्रेडिट के क्रियान्वयन पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त स्पोर्ट्स योजनाओं पर अपने विचार रखे. उन्होंने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत किए गए विभिन्न नवाचारों एवं पहलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के वैली कैंपस में छात्राओं के लिए 1000 सीटों तथा छात्रों के लिए 1000 सीटों की क्षमता वाले अत्याधुनिक छात्रावासों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मध्य भारत के किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रावास अवसंरचना के सबसे बड़े विस्तारों में से एक होगा। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, स्टार्टअप और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि रोजगार सृजक और नवाचार आधारित नेतृत्वकर्ता बन सके।
कार्यक्रम के अंत में आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ एवं शिक्षा शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल जैन ने विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न दस आयामों के परिसंवाद कार्यक्रम के बारे में उल्लेख किया जिसकी रिकॉर्डिंग विश्वविद्यालय के ई.एम.एम.आर.सी. के यूट्यूब चैनल पर समस्त विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए उपलब्ध है. प्रो. जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एनईपी के सभी क्षेत्रों पर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कर पुस्तके प्रकाशित की हैं | विश्वविद्यालय ने एनईपी के अंतर्गत अनुसंधान आधारित चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम आरंभ कर दिया है. एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम की योजना भी पूर्ण कर ली है साथ ही सामाजिक सरोकारों से युक्त पाठ्यक्रमों की रचना का कार्य आरंभ कर दिया है. विश्वविद्यालय ने एनईपी-2020 के अधिकांश घटकों को समर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन सुविधा के रूप में उपलब्ध कराना आरंभ कर दिया है |
कार्यक्रम समापन पर प्रो जैन ने आभार प्रकट करते हुए मुख्य अतिथि को यह आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय उनके द्वारा बताए गए नए पंचशील सिद्धांतों की ओर अग्रसर होकर कार्य आरंभ करेगा. कार्यक्रम का संचालन डॉ. किरण आर्या ने किया. संगीत विभाग के छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी गई. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ ।
