
महाराज श्री ने कहा कि पत्रकार जगत मानवता का चौथा स्तंभ है। समाज को सही दिशा देने और सत्य को सामने लाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सागर में डॉ. हरिसिंह गौर के सपनों को साकार करने का कार्य निरंतर आगे बढ़ रहा है और यह शहर शिक्षा, संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड संतों की तपोभूमि है। यहां अनेक संतों, महात्माओं और ऋषियों ने तपस्या कर इस भूमि को पवित्र बनाया है। इसी कारण उन्होंने इस वर्ष सागर में चतुर्मास करने का निर्णय लिया है।
गुरु पूर्णिमा की आराधना से बढ़ती है सुख-समृद्धि
महाराज श्री ने कहा कि पूर्णिमा अत्यंत शक्तिशाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण तिथि होती है। विशेष रूप से गुरु पूर्णिमा पर की गई आराधना, साधना और जप से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर विशेष ग्रह योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे यह तिथि साधना और देवी उपासना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जा रही है।
युवाओं को दिया सफलता का मंत्र
महाराज श्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि “युवा भविष्य के सूरज हैं।” उन्होंने कहा कि जीवन में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। यदि असफलता मिले तो निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र की अपनी मर्यादाएं और सीमाएं होती हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। जीवन में यदि कोई समस्या आती है तो उसका समाधान भी अवश्य होता है। धैर्य, संयम, प्रतीक्षा और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। अच्छी सलाह और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है।
गुरु, संत, वैद्य और मंत्री की सलाह समाज के लिए महत्वपूर्ण
महाराज श्री ने कहा कि गुरु, संत, वैद्य और मंत्री का कर्तव्य है कि वे सदैव समाज को उचित और हितकारी सलाह दें, क्योंकि ये ऐसे व्यक्ति होते हैं जो बड़े समूह का मार्गदर्शन करते हैं। इसलिए उनका संयमित और उत्तरदायित्वपूर्ण होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उनकी दृष्टि में सभी श्रद्धालु समान हैं। कोई छोटा या बड़ा नहीं है। वे सदैव सभी के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। ईश्वर की कृपा उसी पर होती है जिसकी सोच सकारात्मक हो और जो कर्मशील होकर समाज व स्वयं के उत्थान के लिए कार्य करता रहे।
29 जुलाई को होगा 1 करोड़ हरिद्रा-कुमकुम अर्चन
मीडिया को जानकारी देते हुए महाराज श्री ने बताया कि 29 जुलाई को श्री बालाजी मंदिर परिसर में “माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन लक्ष्मी प्राप्ति महाअनुष्ठान” आयोजित किया जाएगा। इस महाअनुष्ठान में माँ राजराजेश्वरी एवं माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी के श्रीचरणों में 1 करोड़ हरिद्रा (हल्दी) एवं कुमकुम अर्चन किया जाएगा। यह आयोजन विश्व शांति, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा सनातन संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से किया जा रहा है।
20 एकड़ में तैयारियां, 1 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना
आयोजन समिति के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 1 लाख श्रद्धालुओं के इस महाअनुष्ठान में शामिल होने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विशाल आयोजन स्थल तैयार किया गया है। पूरे अनुष्ठान के दौरान 1100 विद्वान पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन एवं अर्चन संपन्न कराएंगे।
महाराज श्री ने कहा कि माँ राजराजेश्वरी की इस दिव्य आराधना के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के मन में शांति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
विशाल स्तर पर पूजन सामग्री की व्यवस्था
इस ऐतिहासिक महाअनुष्ठान के लिए बड़े पैमाने पर पूजन सामग्री की व्यवस्था की गई है जिसमें हल्दी – 100 क्विंटल, चांदी के सिक्के 1,100, सोने के सिक्के 1,100, बूंदी के लड्डू – सवा लाख , आम – 11 टन, केले – 11 टन,
चुनरी – 11,000,
नारियल – 15,000,
बताशा – 11 क्विंटल,
बीड़ा पान – 1 लाख,
खुला पान – 1 लाख,
कमल पुष्प – 11,000,
साड़ियां – 11,000, किशमिश – 11 क्विंटल,
पेठा – 5 क्विंटल
धार्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ अनुष्ठान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ राजराजेश्वरी ललिता त्रिपुरसुंदरी का हरिद्रा-कुमकुम अर्चन अत्यंत प्रभावशाली एवं कल्याणकारी महाविद्या साधना मानी जाती है। शास्त्रों में इसका उल्लेख भगवान शिव द्वारा प्रदत्त दिव्य साधना के रूप में मिलता है, जिसे प्राचीन काल से देवी-देवताओं, ऋषियों, सिद्ध योगियों और संत-महात्माओं द्वारा संपन्न किया जाता रहा है
आयोजन समिति के अनुसार इस महाअनुष्ठान में श्रद्धापूर्वक सहभागी बनने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है
धन एवं वैभव की प्राप्ति,
माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा, व्यापार एवं रोजगार में उन्नति ,पारिवारिक सुख-समृद्धि,
आध्यात्मिक उन्नति एवं मानसिक शांति ,नवग्रह एवं कालसर्प दोष की शांति , रोग, दुःख एवं मानसिक कष्टों से राहत, मनोकामनाओं की पूर्ति
सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क रहेगा आयोजन
आयोजन समिति ने बताया कि यह पूरा महाअनुष्ठान पूर्णतः निःशुल्क रहेगा। इसमें महिला, पुरुष, युवा, बच्चे एवं वरिष्ठ नागरिक सहित सभी श्रद्धालु बिना किसी शुल्क के सम्मिलित होकर माँ राजराजेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह विराट धार्मिक आयोजन सागर ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल होने जा रहा है। आयोजन समिति को विश्वास है कि यह महाअनुष्ठान विश्व कल्याण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण का सशक्त संदेश देगा।
