सागर। श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय ट्रस्ट सागर द्वारा शहर के विख्यात साहित्यकार, व्यंग्यकार प्रो सुरेश आचार्य के संस्मणात्मक उपान्यास शनीचरी मोहल्ला का विमोचन समारोह आयोजित किया, जिसमें मुख्य अतिथि पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता के के सिलाकारी ने की। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार पलाश सुरजन एवं कहानीकार रेखा कस्तवार रही। कार्यक्रम की शुरूआत में मा सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन हुआ ।

संस्था के सचिव पं शुकदेव प्रसाद तिवारी ने स्वागत भाषण में प्रो सुरेश आचार्य के 80 वें जन्मदिन की बधाई दी, उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि विचारों संस्कारों, संवेदनाओं और जीवन.दर्शन का अमूल्य दस्तावेज होता है। वहीं व्यंग्य समाज का वह सशक्त माध्यम है जो मुस्कुराते हुए समाज की विसंगतियों पर प्रहार करता है और हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय सागर की ओर से प्रो सुरेश आचार्य के लिए अभिनंदन पत्र भेंट किया, अभिनंदन पत्र का वाचन श्रीमती कविता शुक्ला ने किया एवं संस्था के अध्यक्ष के के सिलाकारी, सचिव शुकदेव प्रसाद तिवारी, जीएल छत्रसाल, आर एस यादव, डॉ लक्ष्मी पाण्डेय, जगदीश महेश्वरी ने शाल श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया, इस अवसर पर साहित्य सरस्वती मंच द्वारा भी सम्मान पत्र देकर सम्मान किया गया। शहर की अनेक संस्थाओं एवं साहित्यकारों ने प्रो आचार्य का सम्मान किया ।डॉ आचार्य ने उपन्यास की विषय वस्तु बताई, उन्होंने कहां पुरानी यादों को संस्मरणात्मक उपन्यास के रूप में सहेजा है उन्होंने कहा कि मोहल्ला शनीचरी इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है वह मेरी जन्मस्थली है बल्कि शनिचरी सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. हरीसिंह गौर की जन्मस्थली है इसलिए उसका महत्व ज्यादा है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि लक्ष्मीनारायण यादव ने अपने उद्बोधन में कहां कि डॉ आचार्य ने लेखनी के माध्यम से समाज की वास्तविकताओं, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन चुनौतियों को सरल, प्रभावशाली और सारगर्भित शब्दों में अभिव्यक्त किया है। उनकी रचनाएँ पाठकों को केवल आनंद ही नहीं देतीं, बल्कि समाज के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनने की प्रेरणा भी देती हैं। उन्होंने उनके उपन्यास की लिए बधाई दी, शनीचरी मोहल्ला वास्तव में अद्भुत उपन्यास है और शनीचरी डॉ गौर और उनसे जुड़े तत्वों की जानकारी सराहनीय है। कार्यक्रम के अध्यक्ष पं के के सिलाकारी ने प्रो आचार्य को बधाई दी एवं साहित्य में उनके योगदान की सराहना कार्यक्रम का मंच संचालन आशीष ज्योतिशी ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ लक्ष्मी पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर श्यामलम संस्था के अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा, संतोष रोहित, लक्ष्मीनारायण चौरसिया, जीएल छत्रसाल, आर एस यादव, जगदीश महेश्वरी, पूरन सिंह, डॉ सरोज गुप्ता, श्रीमती निरंजना अनिल जैन, डा पदमा आचार्य,डॉ शैलेश आचार्य, संजय आचार्य, शांतनु आचार्य, गजाधर सागर , ममता भूरिया, हरीसिंह ठाकुर सहित प्रो सुरेश आचार्य के परिजन एवं शहर के गणमान्य नागरिक एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।

संस्था के सचिव पं शुकदेव प्रसाद तिवारी ने स्वागत भाषण में प्रो सुरेश आचार्य के 80 वें जन्मदिन की बधाई दी, उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि विचारों संस्कारों, संवेदनाओं और जीवन.दर्शन का अमूल्य दस्तावेज होता है। वहीं व्यंग्य समाज का वह सशक्त माध्यम है जो मुस्कुराते हुए समाज की विसंगतियों पर प्रहार करता है और हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय सागर की ओर से प्रो सुरेश आचार्य के लिए अभिनंदन पत्र भेंट किया, अभिनंदन पत्र का वाचन श्रीमती कविता शुक्ला ने किया एवं संस्था के अध्यक्ष के के सिलाकारी, सचिव शुकदेव प्रसाद तिवारी, जीएल छत्रसाल, आर एस यादव, डॉ लक्ष्मी पाण्डेय, जगदीश महेश्वरी ने शाल श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया, इस अवसर पर साहित्य सरस्वती मंच द्वारा भी सम्मान पत्र देकर सम्मान किया गया। शहर की अनेक संस्थाओं एवं साहित्यकारों ने प्रो आचार्य का सम्मान किया ।डॉ आचार्य ने उपन्यास की विषय वस्तु बताई, उन्होंने कहां पुरानी यादों को संस्मरणात्मक उपन्यास के रूप में सहेजा है उन्होंने कहा कि मोहल्ला शनीचरी इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है वह मेरी जन्मस्थली है बल्कि शनिचरी सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. हरीसिंह गौर की जन्मस्थली है इसलिए उसका महत्व ज्यादा है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि लक्ष्मीनारायण यादव ने अपने उद्बोधन में कहां कि डॉ आचार्य ने लेखनी के माध्यम से समाज की वास्तविकताओं, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन चुनौतियों को सरल, प्रभावशाली और सारगर्भित शब्दों में अभिव्यक्त किया है। उनकी रचनाएँ पाठकों को केवल आनंद ही नहीं देतीं, बल्कि समाज के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनने की प्रेरणा भी देती हैं। उन्होंने उनके उपन्यास की लिए बधाई दी, शनीचरी मोहल्ला वास्तव में अद्भुत उपन्यास है और शनीचरी डॉ गौर और उनसे जुड़े तत्वों की जानकारी सराहनीय है। कार्यक्रम के अध्यक्ष पं के के सिलाकारी ने प्रो आचार्य को बधाई दी एवं साहित्य में उनके योगदान की सराहना कार्यक्रम का मंच संचालन आशीष ज्योतिशी ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ लक्ष्मी पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर श्यामलम संस्था के अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा, संतोष रोहित, लक्ष्मीनारायण चौरसिया, जीएल छत्रसाल, आर एस यादव, जगदीश महेश्वरी, पूरन सिंह, डॉ सरोज गुप्ता, श्रीमती निरंजना अनिल जैन, डा पदमा आचार्य,डॉ शैलेश आचार्य, संजय आचार्य, शांतनु आचार्य, गजाधर सागर , ममता भूरिया, हरीसिंह ठाकुर सहित प्रो सुरेश आचार्य के परिजन एवं शहर के गणमान्य नागरिक एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।
