बता दें 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या हुई थी, जिसने उस समय प्रदेश की राजनीति में भारी सनसनी मचा दी थी. इस बहुचर्चित मामले में 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था. बाद में जग्गी के बेटे ने इस फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और वहां से सुनवाई के लिए इसे वापस हाईकोर्ट भेज दिया गया.
इससे पहले 2 अप्रैल को जोगी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया था कि उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं मिला था. आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए. मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया. यह अप्रत्याशित है. उन्होंने कहा कि अदालत ने मुझे सरेंडर करने का समय दिया है. मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है.
