भोपाल । शैलेन्द्र नायक पूर्व मौसम वैज्ञानिक, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), मौसम एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल के अनुसार इस वर्ष मौसम अल नीनो से प्रभावित है । उन्होंने बताया कि विश्व के मौसम वैज्ञानिकों की निगाहें इस समय भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर पर टिकी हैं। अमेरिका के NOAA Climate Prediction Center (CPC) ने जुलाई 2026 की नवीनतम ENSO रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि एल नीनो (El Niño) सक्रिय हो चुका है तथा वर्ष 2026 के अंत तक इसके और अधिक सशक्त होने की संभावना है। CPC के अनुसार 2027 के प्रारम्भ तक एल नीनो बने रहने की संभावना लगभग 97% है।

सामान्य धारणा यह है कि एल नीनो आते ही भारत में सूखा पड़ जाएगा, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है।
एल नीनो वह अवस्था है जब मध्य एवं पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण (Walker Circulation) प्रभावित होता है और विश्व के अनेक क्षेत्रों में वर्षा एवं तापमान के स्वरूप बदल जाते हैं।
NOAA के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार
एल नीनो सक्रिय है।
समुद्र की सतह और उपसतही जल दोनों सामान्य से अधिक गर्म हैं।
वर्ष के अंत तक इसकी तीव्रता और बढ़ सकती है। 2027 के आरम्भ तक इसके बने रहने की संभावना 97% है।
*क्या भारत में सूखा निश्चित है?*
बिल्कुल नहीं।
भारतीय मानसून केवल ENSO से नियंत्रित नहीं होता। इसके साथ-साथ अनेक अन्य कारक भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) बंगाल की खाड़ी के निम्न दाब तंत्र
Madden-Julian Oscillation (MJO)
अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी से नमी की उपलब्धता
हिमालय एवं पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव
यदि ये प्रणालियाँ सक्रिय रहती हैं तो प्रबल एल नीनो के दौरान भी भारत के अनेक भागों में सामान्य अथवा सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।
*मध्य प्रदेश की वर्तमान स्थिति*
IMD के 4 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 1 जून से 4 अगस्त तक राज्य में वर्षा दीर्घावधि औसत से लगभग 18% कम है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगभग 14% कमी दर्ज की गई है। फिर भी पिछले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी से लगातार सक्रिय निम्न दाब प्रणालियों के कारण राज्य के अनेक जिलों में व्यापक वर्षा हुई है।
अनेक स्थानों पर भारी एवं अति भारी वर्षा दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट है कि सक्रिय मानसूनी प्रणालियाँ एल नीनो के प्रभाव को स्थानीय स्तर पर काफी हद तक संतुलित कर सकती हैं।
*आगे क्या संभावना है?*
यदि अगस्त और सितम्बर में बंगाल की खाड़ी में लगातार निम्न दाब क्षेत्र एवं अवदाब बनते रहे, तो मध्य प्रदेश में अच्छी वर्षा जारी रह सकती है और वर्तमान वर्षा कमी काफी हद तक कम हो सकती है।
लेकिन यदि मानसून ट्रफ हिमालय की ओर खिसक जाए, निम्न दाब तंत्रों की संख्या घट जाए,
तथा एल नीनो और अधिक प्रबल हो जाए,
तो अगस्त के उत्तरार्ध और सितम्बर में वर्षा गतिविधियों में कमी भी आ सकती है।
*कृषि पर प्रभाव*
किसानों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
धान, सोयाबीन, मक्का तथा दालों की फसलों की नियमित निगरानी आवश्यक है।
जल संरक्षण एवं सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।
मौसम आधारित कृषि परामर्शों का पालन करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।
एल नीनो को देखकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। आधुनिक मौसम विज्ञान बताता है कि भारतीय मानसून अनेक वैश्विक एवं क्षेत्रीय कारकों की संयुक्त क्रिया का परिणाम है।
वर्तमान परिस्थितियाँ संकेत देती हैं कि वर्ष 2026 का मानसून चुनौतीपूर्ण अवश्य है, परन्तु अभी इसके शेष दो महीनों—अगस्त एवं सितम्बर—में वर्षा की अच्छी संभावनाएँ बनी हुई हैं। यदि बंगाल की खाड़ी से निम्न दाब प्रणालियाँ सक्रिय रहीं, तो मध्य प्रदेश सहित देश के अनेक भागों में वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
इसी कारण मौसम पूर्वानुमानों की नियमित निगरानी, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा समय पर कृषि एवं जल प्रबंधन संबंधी निर्णय ही आने वाले सप्ताहों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होंगे।
