सागर । ईरान युद्ध और अचानक आ रहे नए नए फैसले अपीलों के चलते लोग सोशल मीडिया की अफवाहों को सच मान लेते है और वेवजह परेशान होने लगते है ऐसे ही कुछ अपुष्ट खबरों की वजह से बैंकों के बंद होने की अफवाह ने जोर पकड़ लिया है जिससे जनता में भ्रम की स्थिति बनी हुई है ।

कोई भी बैंक नहीं हो रहा है बंद
देशभर में बैंकों के “बंद” होने की खबरों को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि वास्तविकता यह है कि फिलहाल किसी बड़े बैंक को बंद करने या उसका लाइसेंस रद्द करने की तैयारी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भ्रम मुख्य रूप से सरकारी बैंकों के मर्जर, शाखाओं के विलय और निष्क्रिय खातों पर नए नियमों के कारण फैल रहा है।
31 मार्च 2020 के बाद हुए बड़े बैंक मर्जर के चलते देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह गई है। इनमें SBI, PNB, Bank of Baroda, Canara Bank और Union Bank जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं। वहीं देश में करीब 21 से 22 निजी बैंक, 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और बड़ी संख्या में कोऑपरेटिव बैंक कार्यरत हैं। RBI के अनुसार देश में कुल 150 से अधिक अधिकृत बैंक मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार FY 2026-27 तक सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 4 बड़े मेगा बैंक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत कुछ छोटे सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों में विलय किया जा सकता है। हालांकि इसका अर्थ बैंक बंद होना नहीं है। ग्राहकों के खाते, जमा राशि और बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं और नए बैंक ढांचे में ट्रांसफर कर दी जाती हैं।
अकाउंट को लेकर यह है नया नियम
इधर RBI ने 1 जनवरी 2025 से निष्क्रिय, लंबे समय से बिना ट्रांजेक्शन वाले और जीरो बैलेंस खातों को लेकर सख्ती बढ़ाई है। इसका उद्देश्य साइबर फ्रॉड और फर्जी खातों पर रोक लगाना बताया गया है। इसी कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर “अकाउंट बंद” और “बैंक बंद” जैसी भ्रामक खबरें वायरल हो रही हैं।

कोई भी बैंक नहीं हो रहा है बंद
देशभर में बैंकों के “बंद” होने की खबरों को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि वास्तविकता यह है कि फिलहाल किसी बड़े बैंक को बंद करने या उसका लाइसेंस रद्द करने की तैयारी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भ्रम मुख्य रूप से सरकारी बैंकों के मर्जर, शाखाओं के विलय और निष्क्रिय खातों पर नए नियमों के कारण फैल रहा है।
31 मार्च 2020 के बाद हुए बड़े बैंक मर्जर के चलते देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह गई है। इनमें SBI, PNB, Bank of Baroda, Canara Bank और Union Bank जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं। वहीं देश में करीब 21 से 22 निजी बैंक, 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और बड़ी संख्या में कोऑपरेटिव बैंक कार्यरत हैं। RBI के अनुसार देश में कुल 150 से अधिक अधिकृत बैंक मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार FY 2026-27 तक सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 4 बड़े मेगा बैंक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत कुछ छोटे सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों में विलय किया जा सकता है। हालांकि इसका अर्थ बैंक बंद होना नहीं है। ग्राहकों के खाते, जमा राशि और बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं और नए बैंक ढांचे में ट्रांसफर कर दी जाती हैं।
अकाउंट को लेकर यह है नया नियम
इधर RBI ने 1 जनवरी 2025 से निष्क्रिय, लंबे समय से बिना ट्रांजेक्शन वाले और जीरो बैलेंस खातों को लेकर सख्ती बढ़ाई है। इसका उद्देश्य साइबर फ्रॉड और फर्जी खातों पर रोक लगाना बताया गया है। इसी कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर “अकाउंट बंद” और “बैंक बंद” जैसी भ्रामक खबरें वायरल हो रही हैं।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हजारों शाखाओं के मर्जर और बंद होने से भी लोगों में भ्रम पैदा हुआ है। लेकिन यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन है, न कि बैंकिंग व्यवस्था बंद होने की प्रक्रिया।
कुल मिलाकर, देश में बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं और ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
