सागर ।हिन्दी माह कार्तिक की पूर्णिमा तिथि यानि कार्तिक पूर्णिमा के पावन दिन विश्वभर में देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। बनारस शहर में इसे विशेष रूप से दीपोत्सव के रूप में मनाया जाता है इस बार 5 नवंबर बुधवार को पड़ रही कार्तिक पूर्णिमा के पावन दिन सागर शहर भी भव्य दिव्य दीपोत्सव सहित देव दीपावली मनाते हुए ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बनने जा रहा है। तीन मढ़िया पर बने स्वच्छता नायक चौक पर दीपक जलाकर देव दिवाली उत्सव का शुभारंभ होगा।

नगर निगम आयुक्त सह कार्यकारी निदेशक सागर स्मार्ट सिटी राजकुमार खत्री ने झील से नागरिकों के आध्यात्मिक, पारंपरिक व सांस्कृतिक जुड़ाव हेतु नवाचार करते हुए पहली बार शहर में देव दीपावली के आयोजन का निर्णय लिया और निगमकर्मियों को समस्त तैयारियों के निर्देश दिये। निगमायुक्त ने कहा की ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील का आकर्षक सौन्दर्यीकरण से नवस्वरूप और गंगा आरती जैसे विभिन्न आयोजनों के कारण पहले ही झील सांस्कृतिक धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनी हुई है, नागरिकों में झील और शहर की स्वच्छता, सुंदरता व सुरक्षा के प्रति अधिक जागरूकता व नागरिक जुड़ाव हेतु इसके किनारे चकराघाट से लेकर गणेशघाट तक बने लगभग 500 मीटर विशाल घाट पर एक साथ 1 लाख 11 हजार 111 दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धा और आस्था का प्रकाश फैलाया जाएगा। नगर निगम द्वारा दीपक उपलब्ध कराने सहित आयोजन की पूरी व्यवस्था की जा रही है।कार्तिक पूर्णिमा के दिन निगम प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं व नागरिकों की सहभागिता से झील किनारे देव दीपावली का भव्य दिव्य आयोजन सम्पन्न होगा। उन्होंने नागरिकों से भी अपने घरों से दीपक लाने की अपील करते हुए कहा की समस्त शहरवासी भी अपने घरों से मिट्टी या आटे के दीपक लाकर इसमें सहभागी बनें। निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने बताया कि गंगा आरती के साथ देव दीपावली का यह भव्य दिव्य आयोजन सागर शहर की नई सांस्कृतिक पहचान बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों, समाजसेवी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं से इसमें शामिल होने की अपील करते हुए कहा है कि जिस तरह काशी में देव दीपावली का आयोजन विश्वप्रसिद्ध है, उसी तरह सागर के चकराघाट की देव दीपावली आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान बनेगी।
*कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान, दान-पुण्य और आराधना का विशेष महत्व*- हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था, जिससे देवताओं ने प्रसन्न होकर दीप जलाकर उत्सव मनाया। तभी से यह पर्व देव दीपावली के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कहा जाता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर गंगा स्नान करते हैं। इसलिए इस दिन दीपदान, गंगा स्नान आदि का महत्व होता है।
*निगमायुक्त ने कार्यक्रम की तैयारी हेतु चकराघाट का निरीक्षण किया*- वाराणसी की तर्ज पर सागर में देव दीपावली को भव्यता के साथ मनाने की परंपरा को प्रारंभ करते हुए की जा रहीं तैयारियों का निगमायुक्त श्री खत्री नें झील किनारे घाटों पर पहुंचकर जायजा लिया। उन्होंने झील के घाट पर दीपों की श्रंखला तैयारी हेतु कुछ दीपक स्वयं जमाकर विस्तृत चर्चा की और सम्पूर्ण घाटों को दीपक से सजाने के निर्देश दिये। सुंदरता, श्रद्धा, भक्ति के साथ ही इस सांस्कृतिक आयोजन में लाखों दीप जलाकर भगवान को नमन किया जाना है ऐसे में कम समय में तैयारियों को पुख्ता रूप से सुनिश्चित करने हेतु निगमायुक्त द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने सुबह चकराघाट पहुँच कर सफाई व्यवस्था, दीपश्रंखला निर्माण, विद्युत सज्जा, सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी हेतु स्थल निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिये। उन्होंने कहा की ऐतिहासिक झील का यह किनारा वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसके धार्मिक सांस्कृतिक महत्त्व को अब और भी बल मिलेगा, झील का यह किनारा हजारों श्रद्धालुओं की भक्ति और लाखों दीपों के प्रकाश से जगमगाएगा। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही अन्य कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये।
जिससे दीप प्रज्ज्वलन के साथ शहरवासियों के लिए इस बार की कार्तिक पूर्णिमा यादगार बने।
*प्रत्येक नागरिक अपने घर से एक दीपक लेकर आए,आयोजन को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं*- निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने कहा हम चाहते हैं कि यह आयोजन जनभागीदारी का उत्सव बने। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक अपने घर से एक दीपक लेकर आए और चकराघाट को प्रकाशमय करे। देव दीपावली के इस प्रथम आयोजन से न केवल सागर की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम मिलेगा, बल्कि यह शहर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर भी विशेष स्थान दिला सकता है। यह आयोजन सागर के लिए उतना ही गौरव का विषय बनेगा, जितना काशी की देव दीपावली वहां की पहचान है।
*स्वच्छ सर्वेक्षण में 10 रैंक प्राप्त होने में ऐतिहासिक झील एवं नगरवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है-निगमायुक्त*
निगमायुक्त ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में इस वर्ष सागर के नागरिकों ने नगर निगम के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया और स्वच्छ सर्वेक्षण में पूरे देश में 10 वीं रैंक प्राप्त कर सागर को देश में नयी पहचान मिली । जिसमें सागर की ऐतिहासिक झील के चकराघाट का सौंदर्यीकरण व स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्यक्रम में शहर की समाजसेवी संस्थाओं, उत्सव समिति, ऑटो यूनियन, विचार संस्था राष्ट्रीय हिंदू परिषद, सर्व ब्राह्मण समाज, महाकाल संगठन सहित विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी होगी।
कार्यक्रम के पश्चात चकराघाट स्थित उक्त आयोजन स्थल की 1 घंटे में सफाई हेतु नगर निगम के कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे सफाई सुनिश्चित करेंगे।

नगर निगम आयुक्त सह कार्यकारी निदेशक सागर स्मार्ट सिटी राजकुमार खत्री ने झील से नागरिकों के आध्यात्मिक, पारंपरिक व सांस्कृतिक जुड़ाव हेतु नवाचार करते हुए पहली बार शहर में देव दीपावली के आयोजन का निर्णय लिया और निगमकर्मियों को समस्त तैयारियों के निर्देश दिये। निगमायुक्त ने कहा की ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील का आकर्षक सौन्दर्यीकरण से नवस्वरूप और गंगा आरती जैसे विभिन्न आयोजनों के कारण पहले ही झील सांस्कृतिक धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनी हुई है, नागरिकों में झील और शहर की स्वच्छता, सुंदरता व सुरक्षा के प्रति अधिक जागरूकता व नागरिक जुड़ाव हेतु इसके किनारे चकराघाट से लेकर गणेशघाट तक बने लगभग 500 मीटर विशाल घाट पर एक साथ 1 लाख 11 हजार 111 दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धा और आस्था का प्रकाश फैलाया जाएगा। नगर निगम द्वारा दीपक उपलब्ध कराने सहित आयोजन की पूरी व्यवस्था की जा रही है।कार्तिक पूर्णिमा के दिन निगम प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं व नागरिकों की सहभागिता से झील किनारे देव दीपावली का भव्य दिव्य आयोजन सम्पन्न होगा। उन्होंने नागरिकों से भी अपने घरों से दीपक लाने की अपील करते हुए कहा की समस्त शहरवासी भी अपने घरों से मिट्टी या आटे के दीपक लाकर इसमें सहभागी बनें। निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने बताया कि गंगा आरती के साथ देव दीपावली का यह भव्य दिव्य आयोजन सागर शहर की नई सांस्कृतिक पहचान बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों, समाजसेवी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं से इसमें शामिल होने की अपील करते हुए कहा है कि जिस तरह काशी में देव दीपावली का आयोजन विश्वप्रसिद्ध है, उसी तरह सागर के चकराघाट की देव दीपावली आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान बनेगी।
*कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान, दान-पुण्य और आराधना का विशेष महत्व*- हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था, जिससे देवताओं ने प्रसन्न होकर दीप जलाकर उत्सव मनाया। तभी से यह पर्व देव दीपावली के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कहा जाता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर गंगा स्नान करते हैं। इसलिए इस दिन दीपदान, गंगा स्नान आदि का महत्व होता है।
*निगमायुक्त ने कार्यक्रम की तैयारी हेतु चकराघाट का निरीक्षण किया*- वाराणसी की तर्ज पर सागर में देव दीपावली को भव्यता के साथ मनाने की परंपरा को प्रारंभ करते हुए की जा रहीं तैयारियों का निगमायुक्त श्री खत्री नें झील किनारे घाटों पर पहुंचकर जायजा लिया। उन्होंने झील के घाट पर दीपों की श्रंखला तैयारी हेतु कुछ दीपक स्वयं जमाकर विस्तृत चर्चा की और सम्पूर्ण घाटों को दीपक से सजाने के निर्देश दिये। सुंदरता, श्रद्धा, भक्ति के साथ ही इस सांस्कृतिक आयोजन में लाखों दीप जलाकर भगवान को नमन किया जाना है ऐसे में कम समय में तैयारियों को पुख्ता रूप से सुनिश्चित करने हेतु निगमायुक्त द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने सुबह चकराघाट पहुँच कर सफाई व्यवस्था, दीपश्रंखला निर्माण, विद्युत सज्जा, सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी हेतु स्थल निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिये। उन्होंने कहा की ऐतिहासिक झील का यह किनारा वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसके धार्मिक सांस्कृतिक महत्त्व को अब और भी बल मिलेगा, झील का यह किनारा हजारों श्रद्धालुओं की भक्ति और लाखों दीपों के प्रकाश से जगमगाएगा। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही अन्य कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये।
जिससे दीप प्रज्ज्वलन के साथ शहरवासियों के लिए इस बार की कार्तिक पूर्णिमा यादगार बने।
*प्रत्येक नागरिक अपने घर से एक दीपक लेकर आए,आयोजन को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं*- निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने कहा हम चाहते हैं कि यह आयोजन जनभागीदारी का उत्सव बने। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक अपने घर से एक दीपक लेकर आए और चकराघाट को प्रकाशमय करे। देव दीपावली के इस प्रथम आयोजन से न केवल सागर की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम मिलेगा, बल्कि यह शहर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर भी विशेष स्थान दिला सकता है। यह आयोजन सागर के लिए उतना ही गौरव का विषय बनेगा, जितना काशी की देव दीपावली वहां की पहचान है।
*स्वच्छ सर्वेक्षण में 10 रैंक प्राप्त होने में ऐतिहासिक झील एवं नगरवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है-निगमायुक्त*
निगमायुक्त ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में इस वर्ष सागर के नागरिकों ने नगर निगम के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया और स्वच्छ सर्वेक्षण में पूरे देश में 10 वीं रैंक प्राप्त कर सागर को देश में नयी पहचान मिली । जिसमें सागर की ऐतिहासिक झील के चकराघाट का सौंदर्यीकरण व स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्यक्रम में शहर की समाजसेवी संस्थाओं, उत्सव समिति, ऑटो यूनियन, विचार संस्था राष्ट्रीय हिंदू परिषद, सर्व ब्राह्मण समाज, महाकाल संगठन सहित विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी होगी।
कार्यक्रम के पश्चात चकराघाट स्थित उक्त आयोजन स्थल की 1 घंटे में सफाई हेतु नगर निगम के कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे सफाई सुनिश्चित करेंगे।
