सागर । गरीब और बेरोजगारों के दस्तावेज का उपयोग कर पहले फर्जी फर्म बनाना और उनके नाम बैंकों में म्यूल खाते खोलकर सायबर ठगी,गेमिंग आदि से आए करोड़ों रुपए का लेनदेन करने वाले सायबर गिरोह का सागर पुलिस ने पर्दाफाश किया है । यह जानकारी आज एसपी अनुराग सुजानिया ने पत्रकारों से चर्चा में दी । इस गिरोह द्वारा सागर में खोले गए अब तक ऐसी सोलह फर्जी फर्मों की जानकारी मिली है, जिनके नाम खोले गए बैंक खातों से करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए के लेनदेन का खुलासा हुआ है । मामले में सागर जिले के निवासी दो आरोपी हिरासत में लिए गए हैं जबकि सरगना बताए जा रहे भोपाल के अमित विश्वकर्मा सहित तीन आरोपी फरार हैं । एसपी ने बताया कि इस गिरोह के तार और भी बड़े शहरों से जुड़े हो सकते हैं । उन्होंने बताया कि आगे की जांच के लिए सीएसपी ललित कश्यप, मकरोनिया और बहेरिया थाना प्रभारी के नेतृत्व में टीम गठित की है । उन्होंने बताया मकरोनिया पुलिस ने सायबर अपराध से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह द्वारा बेरोजगार एवं सामान्य व्यक्तियों को कमीशन एवं पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज प्राप्त किए जाते थे तथा उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार कर विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। इन खातों को बाद में गिरोह द्वारा अपने नियंत्रण में लेकर सायबर ठगी एवं अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त राशि के लेन-देन एवं सर्कुलेशन के लिए म्यूल अकाउंट (Mule Account) के रूप में उपयोग किया जा रहा था।
थाना मकरोनिया में फरियादी रोहित पिता रूपराज पटेल द्वारा उपस्थित होकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई तथा उसके आधार पर फेडरल बैंक, शाखा मकरोनिया में करंट अकाउंट खुलवाया गया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए थाना मकरोनिया पुलिस द्वारा संबंधित बैंक खाते का तत्काल परीक्षण एवं विश्लेषण कराया गया। बैंक खाते के प्रारंभिक विश्लेषण में सामने आया कि फरियादी के नाम से “ग्लैमर इंटरप्राइजेस” नामक फर्म तैयार कर उसके नाम से करंट अकाउंट खुलवाया गया तथा फरवरी 2026 से अब तक लगभग 06 माह की अवधि में करीब 90 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर खाते में हुए लेन-देन, संबंधित फर्मों, बैंक खातों एवं तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया गया तथा आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु अलग टीम गठित की गई।
पूछताछ में सामने आया गिरोह का पूरा नेटवर्क- विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा आरोपी धर्मेन्द्र नाहर एवं सोनू दांगी को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों से सूक्ष्मता एवं गहनता से पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी धर्मेन्द्र नाहर द्वारा बताया गया कि उसने यह कार्य अमित विश्वकर्मा निवासी भोपाल से मुंबई में सीखा था। अमित विश्वकर्मा द्वारा उसे बताया गया था कि ऑनलाइन गेमिंग एवं बैटिंग से प्राप्त राशि के सर्कुलेशन के लिए बैंक खातों की आवश्यकता होती है। सके बाद धर्मेन्द्र नाहर ने अपने स्थानीय साथी सोनू दांगी तथा भोपाल निवासी सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी एवं स्वर्णेन्द्र पांडे के साथ मिलकर बेरोजगार व्यक्तियों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से फर्जी फर्में तैयार कर निजी बैंकों में बैंक खाते खुलवाना शुरू किया।
पुलिस द्वारा आरोपियों से प्राप्त जानकारी एवं तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अब तक 16 से अधिक फर्जी फर्मों का पता लगाया गया है। इन फर्मों के नाम से विभिन्न निजी बैंकों में खाते खोले गए तथा इनका उपयोग संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया गया। 16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा जांच में निम्न फर्मों के नाम सामने आए हैं—1. ग्लैमर इंटरप्राइजेस 2. भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस3 . सूर्या इंटरप्राइजेस 4. समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स 5. लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर 6. कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स 7. स्टार इंटरप्राइजेस 8. राजपूत इंटरप्राइजेस 9. अनुभव ट्रेडर्स 10. सागर ट्रेडर्स 11. शर्मा जी इंटरप्राइजेस 12. सौरभ इंटरप्राइजेस 13. माखन इंटरप्राइजेस 14. अंकेश इंटरप्राइजेस 15. तनविक इंटरप्राइजेस 16. यूनिक टूर एंड ट्रेवल्सइन फर्मों से संबंधित बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में करीब 5.50 करोड़ रुपये से अधिक राशि का ट्रांजेक्शन होना पाया गया है।
पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध लेन-देन की राशि एवं नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों के संबंध में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
फर्जी फर्मों के पंजीयन एवं बैंक खातों की प्रक्रिया की भी जांच – पुलिस द्वारा केवल आरोपियों तक सीमित न रहते हुए यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन एवं संबंधित बैंक खातों को खोलने की प्रक्रिया में किन-किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन तथा बैंक खातों के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों/संस्थाओं की भूमिका की जांच कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
*गिरफ्तार आरोपी-* 1. धर्मेन्द्र पिता हरिदास नाहर, उम्र 38 वर्ष, निवासी सिविल लाइन के पीछे, जिला खजुराहो, छतरपुर (म.प्र.), हाल निवासी शिवनगर, थाना बहेरिया, जिला सागर।
2. सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, जिला सागर।
*अन्य आरोपी*
3. अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी भोपाल।
4. विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, निवासी भोपाल
5. स्वर्णेन्द्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, निवासी भोपाल।
उक्त आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सायबर अपराध के विरुद्ध सागर पुलिस की प्रतिबद्धता सागर पुलिस द्वारा सायबर अपराधियों के विरुद्ध तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रांजेक्शन के विश्लेषण एवं डिजिटल इन्वेस्टिगेशन के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी उपलब्ध न कराएं।किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन दूसरे व्यक्ति को देना भी गंभीर कानूनी जोखिम उत्पन्न कर सकता है। ऐसे खातों का उपयोग सायबर ठगी की रकम के लेन-देन में होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।
कार्रवाई में निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी मकरोनिया, उनि. शशिकांत गुर्जर, थाना प्रभारी बहेरिया, उनि. रामअवतार धाकड़, उनि. राकेश राजपूत,, उनि. मनीषा तिवारी,, प्रआर. सौरभ रैकवार; आर. आशीष गौतम, आर. प्रदीप शर्मा, आर. मनीष तिवारी, आर. आशीष यादव, आर0 भानूप्रताप, आर0 सृजन तिवारी, आर0 देवेन्द्र रावत, आर. नरेंद्र रावत, आर. शुभम, आर. अरविंद एवं आर. अजय की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह द्वारा बेरोजगार एवं सामान्य व्यक्तियों को कमीशन एवं पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज प्राप्त किए जाते थे तथा उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार कर विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। इन खातों को बाद में गिरोह द्वारा अपने नियंत्रण में लेकर सायबर ठगी एवं अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त राशि के लेन-देन एवं सर्कुलेशन के लिए म्यूल अकाउंट (Mule Account) के रूप में उपयोग किया जा रहा था।
थाना मकरोनिया में फरियादी रोहित पिता रूपराज पटेल द्वारा उपस्थित होकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई तथा उसके आधार पर फेडरल बैंक, शाखा मकरोनिया में करंट अकाउंट खुलवाया गया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए थाना मकरोनिया पुलिस द्वारा संबंधित बैंक खाते का तत्काल परीक्षण एवं विश्लेषण कराया गया। बैंक खाते के प्रारंभिक विश्लेषण में सामने आया कि फरियादी के नाम से “ग्लैमर इंटरप्राइजेस” नामक फर्म तैयार कर उसके नाम से करंट अकाउंट खुलवाया गया तथा फरवरी 2026 से अब तक लगभग 06 माह की अवधि में करीब 90 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर खाते में हुए लेन-देन, संबंधित फर्मों, बैंक खातों एवं तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया गया तथा आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु अलग टीम गठित की गई।
पूछताछ में सामने आया गिरोह का पूरा नेटवर्क- विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा आरोपी धर्मेन्द्र नाहर एवं सोनू दांगी को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों से सूक्ष्मता एवं गहनता से पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी धर्मेन्द्र नाहर द्वारा बताया गया कि उसने यह कार्य अमित विश्वकर्मा निवासी भोपाल से मुंबई में सीखा था। अमित विश्वकर्मा द्वारा उसे बताया गया था कि ऑनलाइन गेमिंग एवं बैटिंग से प्राप्त राशि के सर्कुलेशन के लिए बैंक खातों की आवश्यकता होती है। सके बाद धर्मेन्द्र नाहर ने अपने स्थानीय साथी सोनू दांगी तथा भोपाल निवासी सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी एवं स्वर्णेन्द्र पांडे के साथ मिलकर बेरोजगार व्यक्तियों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से फर्जी फर्में तैयार कर निजी बैंकों में बैंक खाते खुलवाना शुरू किया।
पुलिस द्वारा आरोपियों से प्राप्त जानकारी एवं तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अब तक 16 से अधिक फर्जी फर्मों का पता लगाया गया है। इन फर्मों के नाम से विभिन्न निजी बैंकों में खाते खोले गए तथा इनका उपयोग संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया गया। 16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा जांच में निम्न फर्मों के नाम सामने आए हैं—1. ग्लैमर इंटरप्राइजेस 2. भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस3 . सूर्या इंटरप्राइजेस 4. समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स 5. लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर 6. कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स 7. स्टार इंटरप्राइजेस 8. राजपूत इंटरप्राइजेस 9. अनुभव ट्रेडर्स 10. सागर ट्रेडर्स 11. शर्मा जी इंटरप्राइजेस 12. सौरभ इंटरप्राइजेस 13. माखन इंटरप्राइजेस 14. अंकेश इंटरप्राइजेस 15. तनविक इंटरप्राइजेस 16. यूनिक टूर एंड ट्रेवल्सइन फर्मों से संबंधित बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में करीब 5.50 करोड़ रुपये से अधिक राशि का ट्रांजेक्शन होना पाया गया है।
पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध लेन-देन की राशि एवं नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों के संबंध में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
फर्जी फर्मों के पंजीयन एवं बैंक खातों की प्रक्रिया की भी जांच – पुलिस द्वारा केवल आरोपियों तक सीमित न रहते हुए यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन एवं संबंधित बैंक खातों को खोलने की प्रक्रिया में किन-किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन तथा बैंक खातों के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों/संस्थाओं की भूमिका की जांच कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
*गिरफ्तार आरोपी-* 1. धर्मेन्द्र पिता हरिदास नाहर, उम्र 38 वर्ष, निवासी सिविल लाइन के पीछे, जिला खजुराहो, छतरपुर (म.प्र.), हाल निवासी शिवनगर, थाना बहेरिया, जिला सागर।
2. सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, जिला सागर।
*अन्य आरोपी*
3. अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी भोपाल।
4. विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, निवासी भोपाल
5. स्वर्णेन्द्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, निवासी भोपाल।
उक्त आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सायबर अपराध के विरुद्ध सागर पुलिस की प्रतिबद्धता सागर पुलिस द्वारा सायबर अपराधियों के विरुद्ध तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रांजेक्शन के विश्लेषण एवं डिजिटल इन्वेस्टिगेशन के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी उपलब्ध न कराएं।किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन दूसरे व्यक्ति को देना भी गंभीर कानूनी जोखिम उत्पन्न कर सकता है। ऐसे खातों का उपयोग सायबर ठगी की रकम के लेन-देन में होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।
कार्रवाई में निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी मकरोनिया, उनि. शशिकांत गुर्जर, थाना प्रभारी बहेरिया, उनि. रामअवतार धाकड़, उनि. राकेश राजपूत,, उनि. मनीषा तिवारी,, प्रआर. सौरभ रैकवार; आर. आशीष गौतम, आर. प्रदीप शर्मा, आर. मनीष तिवारी, आर. आशीष यादव, आर0 भानूप्रताप, आर0 सृजन तिवारी, आर0 देवेन्द्र रावत, आर. नरेंद्र रावत, आर. शुभम, आर. अरविंद एवं आर. अजय की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
