सागर । पितृपक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा) से हो चुकी है और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या) को होगा। अपने अपने पूर्वजों-पितरों की तर्पण के माध्यम से सेवा करने के लिए लाखा बंजारा झील सागर शहर में मुख्य जलस्रोत है। पितृपक्ष पर्व के दौरान यहां की व्यवस्थाओं का निगमायुक्त सह कार्यकारी निदेशक सागर स्मार्ट सिटी राजकुमार खत्री ने जायजा लिया।

उन्होंने झील के चकराघाट पर पहुंचकर सनातन धर्मावलंबीयों द्वारा अपने पितरों को पानी देने की प्रक्रिया देखी। तर्पणक्रिया सम्पन्न होने के पश्चात निगमायुक्त ने तर्पण करा रहे पुरोहितगण और सभी श्रद्धालु तर्पणकर्ताओं से कहा की व्यवस्थित और सुरक्षित रूप से तर्पण कर पुण्यलाभ अर्जित करें। उन्होंने कहा की शासन द्वारा सेवा संकल्प अभियान एवं स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 जैसे महाभियान नागरिकों की जागरूकता और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ ही जन-जन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए चलाएं जा रहे हैं। नागरिकों को जागरूकता के साथ विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने में स्वच्छता आदतों की बड़ी भूमिका है, आप सभी झील और सागर शहर को साफ स्वच्छ बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें। तर्पण के अतिरिक्त पूजन सामग्री आदि को सीधे तालाब में न डालें। झील किनारे विसर्जित पूजन सामग्री डालने के लिए जगह-जगह निर्मल कुंड बनाये गये हैं इनका उपयोग करें और झील के जल को निर्मल, स्वच्छ, साफ बनाये रखने के साथ ही सम्पूर्ण झील प्रांगण को स्वच्छ सुंदर बनाने में सहयोगी बनें।
झील के घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए निगमायुक्त ने कहा की सुगम यातायात और सहज आवाजाही को ध्यान में रखते हुए परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाये रखें सभी श्रद्धालु अपने वाहनों को व्यवस्थित कतार में लगाएं। उन्होंने पितृपक्ष को लेकर लाखा बंजारा झील के आस-पास सहित शहर के बाजारों में तिल, कुशा, मिट्टी के बर्तन, धूप-अगरबत्ती और श्राद्ध सामग्री की दुकानें देखते हुए सभी दुकानदारों से कहा की वे सभी पूजन सामग्री बेचते समय सिंगल यूज़ पॉलीथिन का उपयोग न करें, कागज या पर्यावरण अनुकूल अन्य पैकिंग सामग्री का उपयोग करें। इससे झील तक प्लास्टिक पॉलीथिन नहीं पहुंचेगी और झील सहित इसके सम्पूर्ण प्रांगण को स्वच्छ बनाये रखने में सहयोग मिलेगा।
उल्लेखनीय है की सनातन धर्मावलंबीयों द्वारा अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म का अनुष्ठान पितृपर्व के दौरान किया जाता है। यह आध्यात्मिक कालखंड 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा, जिसमें कुल 16 दिनों तक नगर भर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इधर, पितृपक्ष को लेकर लाखा बंजारा झील के आस-पास सहित शहर के बाजारों में भी तिल, कुशा, मिट्टी के बर्तन, धूप-अगरबत्ती और श्राद्ध सामग्री की दुकानें सज गई हैं। आगामी 16 दिनों तक सागर शहर के श्रद्धालु अपने पितरों के प्रति श्रद्धा, सेवा और धार्मिक अनुष्ठानों के रस में सराबोर रहेंगे।
निगम आयुक्त श्री खत्री के निर्देशानुसार पितृपक्ष के दौरान प्रतिदिन स्थानीय घाटों की विशेष साफ-सफाई की जावेगी। निगम प्रशासन द्वारा झील किनारे सुरक्षा व स्वच्छता के साथ नागरिक सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
शहर के हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष पितृ पक्ष के दौरान सागर की ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के घाटों पर तर्पण आदि के लिए आते हैं।झील के प्रमुख चकराघाट के किनारे सुबह से ही तिल, जौ, कुशा और गंगाजल आदि पूजन सामग्री लेकर तर्पण करने वालों की भीड़ जुटने लगती है। झील के शीतल निर्मल जल में स्नान व तर्पण करने का स्थनीय रहवासियों में गहरा विश्वास है। सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा सुंदर कायाकल्प के पश्चात झील के जल की स्वच्छता में अभूतपूर्व सुधार हुआ और निर्मल जल में तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है।

उन्होंने झील के चकराघाट पर पहुंचकर सनातन धर्मावलंबीयों द्वारा अपने पितरों को पानी देने की प्रक्रिया देखी। तर्पणक्रिया सम्पन्न होने के पश्चात निगमायुक्त ने तर्पण करा रहे पुरोहितगण और सभी श्रद्धालु तर्पणकर्ताओं से कहा की व्यवस्थित और सुरक्षित रूप से तर्पण कर पुण्यलाभ अर्जित करें। उन्होंने कहा की शासन द्वारा सेवा संकल्प अभियान एवं स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 जैसे महाभियान नागरिकों की जागरूकता और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ ही जन-जन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए चलाएं जा रहे हैं। नागरिकों को जागरूकता के साथ विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने में स्वच्छता आदतों की बड़ी भूमिका है, आप सभी झील और सागर शहर को साफ स्वच्छ बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें। तर्पण के अतिरिक्त पूजन सामग्री आदि को सीधे तालाब में न डालें। झील किनारे विसर्जित पूजन सामग्री डालने के लिए जगह-जगह निर्मल कुंड बनाये गये हैं इनका उपयोग करें और झील के जल को निर्मल, स्वच्छ, साफ बनाये रखने के साथ ही सम्पूर्ण झील प्रांगण को स्वच्छ सुंदर बनाने में सहयोगी बनें।
झील के घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए निगमायुक्त ने कहा की सुगम यातायात और सहज आवाजाही को ध्यान में रखते हुए परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाये रखें सभी श्रद्धालु अपने वाहनों को व्यवस्थित कतार में लगाएं। उन्होंने पितृपक्ष को लेकर लाखा बंजारा झील के आस-पास सहित शहर के बाजारों में तिल, कुशा, मिट्टी के बर्तन, धूप-अगरबत्ती और श्राद्ध सामग्री की दुकानें देखते हुए सभी दुकानदारों से कहा की वे सभी पूजन सामग्री बेचते समय सिंगल यूज़ पॉलीथिन का उपयोग न करें, कागज या पर्यावरण अनुकूल अन्य पैकिंग सामग्री का उपयोग करें। इससे झील तक प्लास्टिक पॉलीथिन नहीं पहुंचेगी और झील सहित इसके सम्पूर्ण प्रांगण को स्वच्छ बनाये रखने में सहयोग मिलेगा।
उल्लेखनीय है की सनातन धर्मावलंबीयों द्वारा अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म का अनुष्ठान पितृपर्व के दौरान किया जाता है। यह आध्यात्मिक कालखंड 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा, जिसमें कुल 16 दिनों तक नगर भर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इधर, पितृपक्ष को लेकर लाखा बंजारा झील के आस-पास सहित शहर के बाजारों में भी तिल, कुशा, मिट्टी के बर्तन, धूप-अगरबत्ती और श्राद्ध सामग्री की दुकानें सज गई हैं। आगामी 16 दिनों तक सागर शहर के श्रद्धालु अपने पितरों के प्रति श्रद्धा, सेवा और धार्मिक अनुष्ठानों के रस में सराबोर रहेंगे।
निगम आयुक्त श्री खत्री के निर्देशानुसार पितृपक्ष के दौरान प्रतिदिन स्थानीय घाटों की विशेष साफ-सफाई की जावेगी। निगम प्रशासन द्वारा झील किनारे सुरक्षा व स्वच्छता के साथ नागरिक सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
शहर के हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष पितृ पक्ष के दौरान सागर की ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के घाटों पर तर्पण आदि के लिए आते हैं।झील के प्रमुख चकराघाट के किनारे सुबह से ही तिल, जौ, कुशा और गंगाजल आदि पूजन सामग्री लेकर तर्पण करने वालों की भीड़ जुटने लगती है। झील के शीतल निर्मल जल में स्नान व तर्पण करने का स्थनीय रहवासियों में गहरा विश्वास है। सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा सुंदर कायाकल्प के पश्चात झील के जल की स्वच्छता में अभूतपूर्व सुधार हुआ और निर्मल जल में तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है।
