सागर । शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सागर में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई तृतीय द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी की अध्यक्षता में संपन्न इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के सहायक प्राध्यापक तथा क्षय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ जैन का विशेष व्याख्यान रहा।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. सौरभ जैन ने छात्राओं को न केवल यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया, बल्कि एक चिकित्सक के दृष्टिकोण से दुर्घटना के समय अपनाए जाने वाले लाइफ-सेविंग स्टेप्स पर विस्तृत और वैज्ञानिक जानकारी दी।

डॉ. सौरभ जैन ने समझाया कि सड़क हादसे के तुरंत बाद घायल की मदद कैसे की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि घायल व्यक्ति को किस परिस्थिति में पानी देना चाहिए और किन गंभीर स्थितियों में पानी पिलाने से पूरी तरह बचना चाहिए, ताकि उसकी श्वास नली में रुकावट न आए। अचानक दिल की धड़कन रुकने या सांस थमने की आपात स्थिति में सीपीआर की आवश्यकता, इसे देने के सटीक समय और इसकी बुनियादी प्रक्रिया को उन्होंने बहुत ही सरल तरीके से छात्राओं को समझाया।
उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय संयम से काम लें। घायल की स्थिति का आकलन कर प्राथमिक सहायता दें और तुरंत एंबुलेंस व चिकित्सीय मदद की व्यवस्था करें।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर दायित्व है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे स्वयं भी यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें और अपने परिवार व समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें।
कार्यक्रम का संचालन एनएसएस इकाई तृतीय की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आकर्षा तिवारी ने किया, जिन्होंने छात्राओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की शपथ दिलाई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. एम.एम. चौकसे, वाणिज्य विभाग से डॉ. डी.के. गुप्ता, डॉ. आशीष चौरसिया, डॉ. सुप्रिया यादव, डॉ. रोहित सैनी, डॉ. शैलेंद्र तथा डॉ. अंकुर रनोदिया सहित महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. सौरभ जैन ने छात्राओं को न केवल यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया, बल्कि एक चिकित्सक के दृष्टिकोण से दुर्घटना के समय अपनाए जाने वाले लाइफ-सेविंग स्टेप्स पर विस्तृत और वैज्ञानिक जानकारी दी।

डॉ. सौरभ जैन ने समझाया कि सड़क हादसे के तुरंत बाद घायल की मदद कैसे की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि घायल व्यक्ति को किस परिस्थिति में पानी देना चाहिए और किन गंभीर स्थितियों में पानी पिलाने से पूरी तरह बचना चाहिए, ताकि उसकी श्वास नली में रुकावट न आए। अचानक दिल की धड़कन रुकने या सांस थमने की आपात स्थिति में सीपीआर की आवश्यकता, इसे देने के सटीक समय और इसकी बुनियादी प्रक्रिया को उन्होंने बहुत ही सरल तरीके से छात्राओं को समझाया।
उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय संयम से काम लें। घायल की स्थिति का आकलन कर प्राथमिक सहायता दें और तुरंत एंबुलेंस व चिकित्सीय मदद की व्यवस्था करें।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर दायित्व है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे स्वयं भी यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें और अपने परिवार व समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें।
कार्यक्रम का संचालन एनएसएस इकाई तृतीय की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आकर्षा तिवारी ने किया, जिन्होंने छात्राओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की शपथ दिलाई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. एम.एम. चौकसे, वाणिज्य विभाग से डॉ. डी.के. गुप्ता, डॉ. आशीष चौरसिया, डॉ. सुप्रिया यादव, डॉ. रोहित सैनी, डॉ. शैलेंद्र तथा डॉ. अंकुर रनोदिया सहित महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
