सागर । खुरई नगर में राजीव गांधी चौक से चर्च के पीछे तक लगभग 1 किलोमीटर लंबी सड़क पर सीवरेज कार्य के कारण कई दिनों तक ऐसी स्थिति बनी रही कि आम नागरिक पैदल तक नहीं निकल पा रहे थे। मुख्य सड़क से आने वाले वाहन और बाइक बीच रास्ते में रुक जाते थे और लोगों को लगभग 50 मीटर पहले से वापस लौटकर दूसरा रास्ता ढूंढना पड़ता था।

उन्होंने संबंधित कंपनी के अधिकारी आकाश जी को फोन कर मुख्य मार्ग पर स्टॉपर लगाने का अनुरोध किया था ताकि लोग अनावश्यक परेशानी से बच सकें। उन्होंने 10 मिनट में व्यवस्था करने का आश्वासन दिया, लेकिन दो दिन तक कुछ नहीं किया गया। श्री चौबे ने बताया कि दो दिन बाद फिर उन्हें कॉल किया लेकिन फिर सिर्फ आश्वासन ही मिला । हजारों नागरिक, स्कूली बच्चे, कर्मचारी और स्थानीय निवासी लगातार परेशान होते रहे।
कल से सड़क खोले जाने के बाद भी नालियों और गड्ढों में मिट्टी भरने तथा मार्ग को सुरक्षित बनाने का कार्य अधूरा पड़ा है। बारिश ने वाली है, स्कूल खुल चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी स्थिति सुधारने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस परियोजना की लापरवाही और अव्यवस्था की खबरें कई बार समाचार पत्रों और मीडिया में भी प्रकाशित हो चुकी हैं, फिर भी न तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होती दिख रही है और न ही जनप्रतिनिधियों का प्रभावी हस्तक्षेप नजर आता है।
ऐसा लगता है कि जनता की की लगातार हो रही परेशानियों से ना किसी जनप्रतिनिधि को फर्क पड़ रहा है ना ही सीवरेज कंपनी के किसी भी अधिकारी को नागरिकों का सवाल है कि परियोजना में व्याप्त अव्यवस्था और लापरवाही के लिए आखिर जवाबदेह कौन है। इस मामले में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्य जनता की सुविधा के लिए होते हैं, जनता को परेशान करने के लिए नहीं।

उन्होंने संबंधित कंपनी के अधिकारी आकाश जी को फोन कर मुख्य मार्ग पर स्टॉपर लगाने का अनुरोध किया था ताकि लोग अनावश्यक परेशानी से बच सकें। उन्होंने 10 मिनट में व्यवस्था करने का आश्वासन दिया, लेकिन दो दिन तक कुछ नहीं किया गया। श्री चौबे ने बताया कि दो दिन बाद फिर उन्हें कॉल किया लेकिन फिर सिर्फ आश्वासन ही मिला । हजारों नागरिक, स्कूली बच्चे, कर्मचारी और स्थानीय निवासी लगातार परेशान होते रहे।
कल से सड़क खोले जाने के बाद भी नालियों और गड्ढों में मिट्टी भरने तथा मार्ग को सुरक्षित बनाने का कार्य अधूरा पड़ा है। बारिश ने वाली है, स्कूल खुल चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी स्थिति सुधारने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस परियोजना की लापरवाही और अव्यवस्था की खबरें कई बार समाचार पत्रों और मीडिया में भी प्रकाशित हो चुकी हैं, फिर भी न तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होती दिख रही है और न ही जनप्रतिनिधियों का प्रभावी हस्तक्षेप नजर आता है।
ऐसा लगता है कि जनता की की लगातार हो रही परेशानियों से ना किसी जनप्रतिनिधि को फर्क पड़ रहा है ना ही सीवरेज कंपनी के किसी भी अधिकारी को नागरिकों का सवाल है कि परियोजना में व्याप्त अव्यवस्था और लापरवाही के लिए आखिर जवाबदेह कौन है। इस मामले में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्य जनता की सुविधा के लिए होते हैं, जनता को परेशान करने के लिए नहीं।
