सागर। विधानसभा के मानसून सत्र में सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने कनेरादेव सिंचाई परियोजना के जलाशय में रिसाव की गंभीर समस्या का विषय उठाते हुए शासन से की गई कार्यवाही एवं परियोजना के स्थायी समाधान की जानकारी मांगी। विधायक जैन के प्रश्न के उत्तर में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि जलाशय के रिसाव की भू-तकनीकी जांच के लिए भारत सरकार के भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग से समझौता किया गया है। इसके सुझावों के आधार पर अनुसंधान कार्यों के लिए वर्ष 2023 में 1.95 लाख रुपये तथा वर्ष 2025 में 1.33 लाख रुपये व्यय किए गए हैं।

मंत्री ने बताया कि कनेरादेव जलाशय के रिसाव को रोकने एवं सुधार कार्यों के लिए 12 जून 2026 को 55.81 लाख रुपये की विशेष मरम्मत की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रचलित है। उन्होंने कहा कि रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान मरम्मत कार्य पूर्ण होने के उपरांत ही संभव होगा।
विधायक शैलेंद्र जैन ने इस महत्वपूर्ण विषय को विधानसभा में उठाकर कनेरादेव जलाशय को पूर्णतः उपयोगी बनाने और क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का अपेक्षित लाभ दिलाने की दिशा में शासन का ध्यान आकर्षित किया है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब विशेष मरम्मत कार्य की निविदा प्रक्रिया पूरी होने तथा कार्य प्रारंभ होने की उम्मीद है, जिससे जलाशय के रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान होने और किसानों को सिंचाई सुविधा का बेहतर लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

मंत्री ने बताया कि कनेरादेव जलाशय के रिसाव को रोकने एवं सुधार कार्यों के लिए 12 जून 2026 को 55.81 लाख रुपये की विशेष मरम्मत की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रचलित है। उन्होंने कहा कि रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान मरम्मत कार्य पूर्ण होने के उपरांत ही संभव होगा।
विधायक शैलेंद्र जैन ने इस महत्वपूर्ण विषय को विधानसभा में उठाकर कनेरादेव जलाशय को पूर्णतः उपयोगी बनाने और क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का अपेक्षित लाभ दिलाने की दिशा में शासन का ध्यान आकर्षित किया है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब विशेष मरम्मत कार्य की निविदा प्रक्रिया पूरी होने तथा कार्य प्रारंभ होने की उम्मीद है, जिससे जलाशय के रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान होने और किसानों को सिंचाई सुविधा का बेहतर लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
