सागर । अल्प प्रवास पर सागर आये फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा,कुलपति वाय एस ठाकुर भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य शैलेश केशरवानी, विवि के पूर्व कुल सांसद अखिलेश मोनी केसरवानी,समाजसेवी सुरेंद्र सुहाने,प्रो.जे के जैन एवं अन्य विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने चल रहे गौर सप्ताह के तहत विश्वविद्यालय में डॉक्टर सर हरि सिंह गौर की समाधि पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं से मुलाकात कर चर्चा की।

फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने कहा कि डॉ.सर हरि सिंह गौर हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनकी विचारधारा समर्पण और त्याग के कारण ही आज विश्वविद्यालय ने अपना नाम विश्व पटल पर स्थापित किया है। मैं भी इसी विश्वविद्यालय से पढ़ा हुआ हूं। और मुझे स्नातक की उपाधि भी यही से मिली है। तब जाकर आगे बढ़ पाया हूं। आज जो भी कुछ हो डॉक्टर हरि सिंह गौर के कारण हूं। डॉ. गौर एक व्यक्ति से व्यक्तित्व बने। जब उन्होंने अपनी पूंजी से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की और आज हम सबके बीच वे एक विचार के रूप में स्थापित है। उन्होंने सागर विश्वविद्यालय को स्थापित कर यहाँ शिक्षा की नींव रखी। कुलपति प्रोफेसर वाय एस ठाकुर ने कहा कि डॉ सर हरी सिंह गौर के प्रति आप सभी समर्पण देखकर मैं अपने आप को भी गौरांवित महसूस करता हूं कि मुझे इस विश्वविद्यालय का कुलपति बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आने वाली 26 नवंबर को डॉक्टर सर हरि सिंह गौर की जयंती पर आप सभी प्रत्येक घरों में दिए जलाए साथ ही अपने-अपने घरों पर लाईट लगाए और दीपावली त्योहार के रूप में डॉक्टर गौर की जयंती को मनाएं ऐसा सभी शहर वासियों से आग्रह है। भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य शैलेश केसरवानी ने कहा कि सच्चे अर्थों में शिक्षित व्यक्ति वही है जो संपूर्ण समाज को शिक्षित करता है। यही कार्य डॉ. गौर ने इस विवि के माध्यम से किया है। अब हम सभी का भी कर्तव्य है कि डॉ गौर के लिए भारत रत्न दिलाने के लिए कार्य करें। पूर्व कुल सांसद अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर का व्यक्तित्व और कृतित्व बेहद विशाल है। अपना सर्वस्व अर्पण कर उन्होंने सागर में तब विवि की स्थापना की थी, जब यहां कॉलेज भी नहीं था। यह उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम था। उस विश्वविद्यालय से लाखों विद्यार्थी डिग्रियां लेकर निकले। और उनमें से एक मैं भी हूं। दान का ऐसा उदाहरण देश ही नहीं दुनिया में दूसरा नहीं दिखता।
सुरेंद्र सुहाने ने कहा कि डॉ गौर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं और यह उन्हें मिलना ही चाहिए। सागर विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले प्रत्येक छात्र और हर बुंदेलखंडवासी की तरह मेरी भी इच्छा है कि डॉ. गौर को भारत रत्न जल्द से जल्द मिले। प्रो.जे के जैन ने कहा कि डॉ सर हरि सिंह गौर की जयंती एक उत्सव की तरह मनाई जाना चाहिए। जिससे नई पीढ़ी को भी उनके त्याग तप और दान की जानकारी मिले और वह उनसे प्रेरणा ले सके।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार सत्य प्रकाश उपाध्याय, डॉ राकेश सोनी कल्चर कमेटी अध्यक्ष,विवेक जायसवाल मीडिया अधिकारी,संतोष साहगोरा,समर्थ दीक्षित, प्रोफेसर अजीत जयसवाल, प्रो राजेंद्र यादव,अब्बी साहू, प्रो चंदा बेन,डॉ आशीष वर्मा, उमेश पाटील,बंटी तिवारी, राजेश पंडित, शशांक शर्मा,सतीश केसरवानी, विवेक तिवारी,सुनील भदौरिया,चंदन सुहाने,बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र गण उपस्थित रहे।

फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने कहा कि डॉ.सर हरि सिंह गौर हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनकी विचारधारा समर्पण और त्याग के कारण ही आज विश्वविद्यालय ने अपना नाम विश्व पटल पर स्थापित किया है। मैं भी इसी विश्वविद्यालय से पढ़ा हुआ हूं। और मुझे स्नातक की उपाधि भी यही से मिली है। तब जाकर आगे बढ़ पाया हूं। आज जो भी कुछ हो डॉक्टर हरि सिंह गौर के कारण हूं। डॉ. गौर एक व्यक्ति से व्यक्तित्व बने। जब उन्होंने अपनी पूंजी से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की और आज हम सबके बीच वे एक विचार के रूप में स्थापित है। उन्होंने सागर विश्वविद्यालय को स्थापित कर यहाँ शिक्षा की नींव रखी। कुलपति प्रोफेसर वाय एस ठाकुर ने कहा कि डॉ सर हरी सिंह गौर के प्रति आप सभी समर्पण देखकर मैं अपने आप को भी गौरांवित महसूस करता हूं कि मुझे इस विश्वविद्यालय का कुलपति बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आने वाली 26 नवंबर को डॉक्टर सर हरि सिंह गौर की जयंती पर आप सभी प्रत्येक घरों में दिए जलाए साथ ही अपने-अपने घरों पर लाईट लगाए और दीपावली त्योहार के रूप में डॉक्टर गौर की जयंती को मनाएं ऐसा सभी शहर वासियों से आग्रह है। भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य शैलेश केसरवानी ने कहा कि सच्चे अर्थों में शिक्षित व्यक्ति वही है जो संपूर्ण समाज को शिक्षित करता है। यही कार्य डॉ. गौर ने इस विवि के माध्यम से किया है। अब हम सभी का भी कर्तव्य है कि डॉ गौर के लिए भारत रत्न दिलाने के लिए कार्य करें। पूर्व कुल सांसद अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर का व्यक्तित्व और कृतित्व बेहद विशाल है। अपना सर्वस्व अर्पण कर उन्होंने सागर में तब विवि की स्थापना की थी, जब यहां कॉलेज भी नहीं था। यह उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम था। उस विश्वविद्यालय से लाखों विद्यार्थी डिग्रियां लेकर निकले। और उनमें से एक मैं भी हूं। दान का ऐसा उदाहरण देश ही नहीं दुनिया में दूसरा नहीं दिखता।
सुरेंद्र सुहाने ने कहा कि डॉ गौर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं और यह उन्हें मिलना ही चाहिए। सागर विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले प्रत्येक छात्र और हर बुंदेलखंडवासी की तरह मेरी भी इच्छा है कि डॉ. गौर को भारत रत्न जल्द से जल्द मिले। प्रो.जे के जैन ने कहा कि डॉ सर हरि सिंह गौर की जयंती एक उत्सव की तरह मनाई जाना चाहिए। जिससे नई पीढ़ी को भी उनके त्याग तप और दान की जानकारी मिले और वह उनसे प्रेरणा ले सके।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार सत्य प्रकाश उपाध्याय, डॉ राकेश सोनी कल्चर कमेटी अध्यक्ष,विवेक जायसवाल मीडिया अधिकारी,संतोष साहगोरा,समर्थ दीक्षित, प्रोफेसर अजीत जयसवाल, प्रो राजेंद्र यादव,अब्बी साहू, प्रो चंदा बेन,डॉ आशीष वर्मा, उमेश पाटील,बंटी तिवारी, राजेश पंडित, शशांक शर्मा,सतीश केसरवानी, विवेक तिवारी,सुनील भदौरिया,चंदन सुहाने,बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र गण उपस्थित रहे।
