सागर। इस बार शनि जयंती 16 मई दिन शनिवार को पड़ रही है। शनि जयंती के दिन शनिवार का दिन अपने आप में एक संयोग है और इस संयोग में पूजा-भक्ति करने से साधक को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है।

रामसरोज समूह के सदस्यों समाजसेवी बबीता संजीव केसरवानी समाजसेवी गीता शैलेश केसरवानी एवं समाजसेवी श्वेता अखिलेश मोनी केसरवानी ने बताया कि 16 मई को अमावस्या के दिन प्रत्येक वर्ष की तरह इस बर्ष भी कबूला पुल स्थित श्री शनि देव मंदिर को फूलों और गुब्बारे से सजाया जावेगा भव्य और दिव्य फूल बंगला बनाया जावेगा। शनिदेव भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। शनि जयंती के दिन शनि मंदिरों में जाकर उनका दर्शन करना अति शुभ होता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल, नीले रंग के पुष्प, काली उड़द, तिल और काले वस्त्र जैसी वस्तुएं का भोग लगाया जाता है।
समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने बताया कि यह शुभ योग 37 सालों बाद पढ़ रहा है जब शनि अमावस्या शनिवार के दिन है। हिंदू धर्म में शनि देव की पूजा बहुत शुभ मानी जाती है।शनि जयंती के दिन भगवान शनि की पूजा का विशेष महत्व है। विशेष रूप से जो अढैया साडेसाती से ग्रसित है शनि जयंती पर भगवान शनि देव की पूजन से उन्हें विशेष लाभ होता है। वे कर्मों के आधार पर सभी के साथ न्याय करते हैं, इसलिए उन्हें कर्मफल दाता भी कहा जाता है। उन्होंने नगर के सभी बंधुओ से शनि देव महाराज के दर्शन पूजन कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया।
इस अवसर पर शनि मंदिर के पुजारी सुनील शर्मा एवं पंडित शुभम तिवारी ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शनि जयंती कबूला पुल स्थित शनि मंदिर में धूमधाम से मनाई जावेगी। इस अवसर पर भगवान शनि देव का सुबह 7 बजे से अभिषेक एवं श्रृंगार किया जावेगा। इसके पश्चात सुबह 8 बजे खीर पूड़ी का वितरण होगा सुबह 11 बजे हवन संपन्न होगा सायं के समय 8 बजे भगवान शनि देव की महा आरती की जावेगी। एवं उनके प्रिय पकवानों का भोग भगवान शनि देव को लगाया जाएगा।

रामसरोज समूह के सदस्यों समाजसेवी बबीता संजीव केसरवानी समाजसेवी गीता शैलेश केसरवानी एवं समाजसेवी श्वेता अखिलेश मोनी केसरवानी ने बताया कि 16 मई को अमावस्या के दिन प्रत्येक वर्ष की तरह इस बर्ष भी कबूला पुल स्थित श्री शनि देव मंदिर को फूलों और गुब्बारे से सजाया जावेगा भव्य और दिव्य फूल बंगला बनाया जावेगा। शनिदेव भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। शनि जयंती के दिन शनि मंदिरों में जाकर उनका दर्शन करना अति शुभ होता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल, नीले रंग के पुष्प, काली उड़द, तिल और काले वस्त्र जैसी वस्तुएं का भोग लगाया जाता है।
समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने बताया कि यह शुभ योग 37 सालों बाद पढ़ रहा है जब शनि अमावस्या शनिवार के दिन है। हिंदू धर्म में शनि देव की पूजा बहुत शुभ मानी जाती है।शनि जयंती के दिन भगवान शनि की पूजा का विशेष महत्व है। विशेष रूप से जो अढैया साडेसाती से ग्रसित है शनि जयंती पर भगवान शनि देव की पूजन से उन्हें विशेष लाभ होता है। वे कर्मों के आधार पर सभी के साथ न्याय करते हैं, इसलिए उन्हें कर्मफल दाता भी कहा जाता है। उन्होंने नगर के सभी बंधुओ से शनि देव महाराज के दर्शन पूजन कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया।
इस अवसर पर शनि मंदिर के पुजारी सुनील शर्मा एवं पंडित शुभम तिवारी ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शनि जयंती कबूला पुल स्थित शनि मंदिर में धूमधाम से मनाई जावेगी। इस अवसर पर भगवान शनि देव का सुबह 7 बजे से अभिषेक एवं श्रृंगार किया जावेगा। इसके पश्चात सुबह 8 बजे खीर पूड़ी का वितरण होगा सुबह 11 बजे हवन संपन्न होगा सायं के समय 8 बजे भगवान शनि देव की महा आरती की जावेगी। एवं उनके प्रिय पकवानों का भोग भगवान शनि देव को लगाया जाएगा।
