सागर । शहर के सुभाष नगर निवासी 58 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी वाधवानी के परिजनों ने उनके दुखद निधन के बाद नेत्रदान कर मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। रविवार दोपहर हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से उनका आकस्मिक निधन हो गया था। श्रीमती वाधवानी की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके पुत्र विजय और पुत्री संगीता ने तत्काल बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (BMC) सागर के आई बैंक से संपर्क किया। इस पुनीत कार्य की जानकारी मिलते ही बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने शोक संवेदना व्यक्त की और आई बैंक की टीम को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए।

*चिकित्सा टीम ने घर पहुंचकर सुरक्षित कीं आंखें*
आई बैंक इंचार्ज डॉ. सारिका चौहान के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम तुरंत दिवंगत के निवास पर पहुंची। टीम ने पूरी एहतियात बरतते हुए श्रीमती वाधवानी की कॉर्निया (नेत्र की पुतली) सुरक्षित निकालकर आई बैंक में जमा कराई। डॉ. सारिका ने बताया कि नेत्रदान केवल मरणोपरांत ही संभव है और इसे मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होता है।
बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने परिजनों के इस साहसी निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने कहा कि शोक की इस घड़ी में भी दूसरों की भलाई के बारे में सोचना वास्तव में वंदनीय है। उनके इस दान से दो दृष्टिहीनों के जीवन में नया प्रकाश आएगा।
परिजनों ने बताया कि श्रीमती वाधवानी अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान की इच्छा व्यक्त कर चुकी थीं। बीएमसी प्रबंधन और चिकित्सकों ने विजय, संगीता एवं समस्त वाधवानी परिवार का इस पुण्य कार्य के लिए विशेष आभार व्यक्त किया है।
आई बैंक टीम में डॉ अपूर्वा, डॉ ईशा , डॉ रक्षित, डॉ शिवानी एवं नर्सिंग स्टाफ राम-लखन मौजूद रहे ।

*चिकित्सा टीम ने घर पहुंचकर सुरक्षित कीं आंखें*
आई बैंक इंचार्ज डॉ. सारिका चौहान के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम तुरंत दिवंगत के निवास पर पहुंची। टीम ने पूरी एहतियात बरतते हुए श्रीमती वाधवानी की कॉर्निया (नेत्र की पुतली) सुरक्षित निकालकर आई बैंक में जमा कराई। डॉ. सारिका ने बताया कि नेत्रदान केवल मरणोपरांत ही संभव है और इसे मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होता है।
बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने परिजनों के इस साहसी निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने कहा कि शोक की इस घड़ी में भी दूसरों की भलाई के बारे में सोचना वास्तव में वंदनीय है। उनके इस दान से दो दृष्टिहीनों के जीवन में नया प्रकाश आएगा।
परिजनों ने बताया कि श्रीमती वाधवानी अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान की इच्छा व्यक्त कर चुकी थीं। बीएमसी प्रबंधन और चिकित्सकों ने विजय, संगीता एवं समस्त वाधवानी परिवार का इस पुण्य कार्य के लिए विशेष आभार व्यक्त किया है।
आई बैंक टीम में डॉ अपूर्वा, डॉ ईशा , डॉ रक्षित, डॉ शिवानी एवं नर्सिंग स्टाफ राम-लखन मौजूद रहे ।
