सागर। आदर्श संगीत महाविद्यालय के 44वें स्थापना दिवस एवं भगवान नटराज की प्रतिमा के अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक शैलेंद्र जैन उपस्थित हुए। उन्होंने भगवान नटराज को नमन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि संगीत योग और ध्यान का प्रभावी माध्यम है, जो मन को शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह सागर के लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश का पहला स्नातकोत्तर संगीत महाविद्यालय यहीं स्थित है। जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने महाविद्यालय के सर्वांगीण विकास हेतु पूर्ण सहयोग का संकल्प दोहराते हुए कहा कि चाहे शिक्षकों की भर्ती, कक्षों का निर्माण अथवा अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार का विषय हो, वे हर स्तर पर सहयोग करेंगे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय समरसता प्रमुख सुनील देव ने महाविद्यालय समिति को मार्गदर्शन देते हुए रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्याम मनोहर सिरोठिया ने कहा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि एक साधना है, जिसे और अधिक व्यापक स्वरूप देने की आवश्यकता है।
डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने भी संक्षिप्त उद्बोधन में संगीत शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्था अध्यक्ष सुभाष कण्डया एवं सचिव सिद्धार्थ शंकरशुक्ला ने महाविद्यालय की उपलब्धियों एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मनोज डेंगरे, राजीव चौरसिया, आकाश मिश्रा, दामोदर अग्निहोत्री, संतोष श्रीवास्तव, राजेंद्र सेन, प्रसूख जैन, विनोद तिवारी, सर्वेश्वर उपाध्याय, कमलेश जैन सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं कला हमारी सांस्कृतिक चेतना की आत्मा है, जिसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि संगीत योग और ध्यान का प्रभावी माध्यम है, जो मन को शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह सागर के लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश का पहला स्नातकोत्तर संगीत महाविद्यालय यहीं स्थित है। जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने महाविद्यालय के सर्वांगीण विकास हेतु पूर्ण सहयोग का संकल्प दोहराते हुए कहा कि चाहे शिक्षकों की भर्ती, कक्षों का निर्माण अथवा अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार का विषय हो, वे हर स्तर पर सहयोग करेंगे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय समरसता प्रमुख सुनील देव ने महाविद्यालय समिति को मार्गदर्शन देते हुए रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्याम मनोहर सिरोठिया ने कहा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि एक साधना है, जिसे और अधिक व्यापक स्वरूप देने की आवश्यकता है।
डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने भी संक्षिप्त उद्बोधन में संगीत शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्था अध्यक्ष सुभाष कण्डया एवं सचिव सिद्धार्थ शंकरशुक्ला ने महाविद्यालय की उपलब्धियों एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मनोज डेंगरे, राजीव चौरसिया, आकाश मिश्रा, दामोदर अग्निहोत्री, संतोष श्रीवास्तव, राजेंद्र सेन, प्रसूख जैन, विनोद तिवारी, सर्वेश्वर उपाध्याय, कमलेश जैन सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं कला हमारी सांस्कृतिक चेतना की आत्मा है, जिसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
