सागर । बुंदेली मार्शल आर्ट’: पद्मश्री पुरस्कार 2026 के लिए मध्य प्रदेश के सागर से भगवानदास रायकवार का नाम सूची में शामिल हैं। विलुप्त होती ‘बुंदेली मार्शल आर्ट’ को जीवित रखने वाले रायकवार को भारत सरकार ने ‘अनसंग हीरोज’ श्रेणी में पुरस्कार के लिए चुना है।
इसके पहले चार साल पूर्व लोक कलाओं विशेषकर बेड़नी नृत्य को संरक्षित करने के लिए उन्हें भी सरकार ने पद्मश्री पुरुस्कार से सम्मानित्त किया था ।
बुंदेली मार्शल आर्ट में चार दशकों से युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे और शहर में “दाऊ” के नाम से विख्यात भगवानदास जी अपनी नेकदिली से भी लोगों के बींच ख्याति बनाये हुए हैँ । उन्हें बुंदेलखड के ‘ब्रूस ली के नाम से भी जाना जाता है ।

भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार 2026 के लिए मध्य प्रदेश के सागर जिले के अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार को चुना गया है। एकदम से चर्चाओं में आए रायकवार कौन है? जिन्हें ‘अनसंग हीरोज’ (Unsung Heroes) की श्रेणी में रखकर राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजेंगी…
बुंदेलखंड की पारंपरिक अखाड़ा संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले 83 चर्षीय वरिष्ठ गुरु भगवांदास रायकवार को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान 2026 से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक ‘मार्शल आर्ट’ और ‘अखाड़ा विद्या’ के संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण में योगदान के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने न सिर्फ अखाड़ा कला का संरक्षण किया, बल्कि इसे नई पीढ़ी में भी आगे बढ़ाया है।
अखाड़ा की युद्ध कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाया
भगवानदास रायकवार ‘श्री छत्रसाल बुंदेलखंड अखाड़ा के संचालक’ हैं। वे पिछले कई दशकों से अखाड़ा, लाठी, भाला, तलवार, त्रिशूल, फरसा जैसी प्राचीन युद्ध कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में आयोजित राष्ट्रीय व सांस्कृतिक आयोजनों में भारतीय परंपरा का गौरव बढ़ाया है।
अंतर राष्ट्रीय मंचों पर परंपरा और कला को स्थान दिलाया
अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार महाकुंभ, लोक रंग, सूरजकुंड मेला, राष्ट्रीय नाट्य एवं सांस्कृतिक महोत्सवों में निरंतर सहभागिता करते रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रयागराज महाकुंभ, भोपाल, उज्जैन और अयोध्या में आयोजित प्रमुख आयोजनों में भी उन्होंने अखाड़ा कला का प्रदर्शन किया। उनको पद्मश्री सम्मान की घोषणा से बुंदेलखंड कला, संस्कृति और अखाड़ा जगत से जुड़े लोगों में खुशी की लहर है।
इसके पहले चार साल पूर्व लोक कलाओं विशेषकर बेड़नी नृत्य को संरक्षित करने के लिए उन्हें भी सरकार ने पद्मश्री पुरुस्कार से सम्मानित्त किया था ।
बुंदेली मार्शल आर्ट में चार दशकों से युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे और शहर में “दाऊ” के नाम से विख्यात भगवानदास जी अपनी नेकदिली से भी लोगों के बींच ख्याति बनाये हुए हैँ । उन्हें बुंदेलखड के ‘ब्रूस ली के नाम से भी जाना जाता है ।

भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार 2026 के लिए मध्य प्रदेश के सागर जिले के अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार को चुना गया है। एकदम से चर्चाओं में आए रायकवार कौन है? जिन्हें ‘अनसंग हीरोज’ (Unsung Heroes) की श्रेणी में रखकर राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजेंगी…
बुंदेलखंड की पारंपरिक अखाड़ा संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले 83 चर्षीय वरिष्ठ गुरु भगवांदास रायकवार को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान 2026 से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक ‘मार्शल आर्ट’ और ‘अखाड़ा विद्या’ के संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण में योगदान के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने न सिर्फ अखाड़ा कला का संरक्षण किया, बल्कि इसे नई पीढ़ी में भी आगे बढ़ाया है।
अखाड़ा की युद्ध कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाया
भगवानदास रायकवार ‘श्री छत्रसाल बुंदेलखंड अखाड़ा के संचालक’ हैं। वे पिछले कई दशकों से अखाड़ा, लाठी, भाला, तलवार, त्रिशूल, फरसा जैसी प्राचीन युद्ध कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में आयोजित राष्ट्रीय व सांस्कृतिक आयोजनों में भारतीय परंपरा का गौरव बढ़ाया है।
अंतर राष्ट्रीय मंचों पर परंपरा और कला को स्थान दिलाया
अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार महाकुंभ, लोक रंग, सूरजकुंड मेला, राष्ट्रीय नाट्य एवं सांस्कृतिक महोत्सवों में निरंतर सहभागिता करते रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रयागराज महाकुंभ, भोपाल, उज्जैन और अयोध्या में आयोजित प्रमुख आयोजनों में भी उन्होंने अखाड़ा कला का प्रदर्शन किया। उनको पद्मश्री सम्मान की घोषणा से बुंदेलखंड कला, संस्कृति और अखाड़ा जगत से जुड़े लोगों में खुशी की लहर है।
