सागर । इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की सागर शाखा ने मृतकों के सम्मान और गरिमा की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आईएमए के प्रतिनिधिमंडल ने बण्डा विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार से मुलाकात की, उन्हें आईएमए 2026 कैलेंडर भेंट किया और राजस्थान में लागू राजस्थान मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023 (Rajasthan Honour of Dead Body Act, 2023) की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी इसी तरह का कठोर कानून बनाने की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
राजस्थान का यह प्रगतिशील कानून मृतकों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त प्रावधान करता है,। जिनमें प्रमुख हैं:
•
गैर-परिवारजन द्वारा मृत शरीर का प्रदर्शन या दुरुपयोग करने पर 6 महीने से 5 वर्ष तक की कैद तथा जुर्माना।
• परिवार के सदस्य द्वारा ऐसे प्रदर्शन में सहमति देने या उसमें भाग लेने पर 2 वर्ष तक की कैद तथा जुर्माना।
• परिवार के सदस्य द्वारा शव को अंतिम संस्कार के लिए लेने से इनकार करने पर 1 वर्ष तक की कैद या जुर्माना।
विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया और इस तरह के विधेयक की जरूरत पर सहमति जताई। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मध्य प्रदेश विधानसभा में जल्द से जल्द इस संबंध में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। श्री लंबरदार ने इसे राज्य में बढ़ती “शव राजनीति” और “लाशों के साथ प्रदर्शन” जैसी घटनाओं पर रोक लगाने का अत्यंत आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा कि मृतकों का सम्मान किसी भी सभ्य समाज की पहचान है और ऐसे अमानवीय कृत्यों को रोकना समय की सबसे बड़ी मांग है।
*आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद* ने बताया कि हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों के नाम पर मृत शरीरों के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अनुचित मांगों को मनवाने के लिए शवों को सड़कों पर रखना या उनका प्रदर्शन करना न केवल मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन है, बल्कि चिकित्सा समुदाय के लिए भी अत्यंत दुखदायी है। इस कानून के लागू होने से मृतकों की गरिमा सुरक्षित रहेगी और समाज में संवेदनशीलता व मानवता बनी रहेगी।
ज्ञापन सौंपने वाले आईएमए प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन, डॉ. एम.के. जैन, डॉ. योगेंद्र खटिक, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. प्राची अग्निहोत्री सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक शामिल थे।
आईएमए सागर इस गंभीर सामाजिक मुद्दे पर जागरूकता फैलाने और कानून निर्माण में सक्रिय सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राजस्थान का यह प्रगतिशील कानून मृतकों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त प्रावधान करता है,। जिनमें प्रमुख हैं:
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गैर-परिवारजन द्वारा मृत शरीर का प्रदर्शन या दुरुपयोग करने पर 6 महीने से 5 वर्ष तक की कैद तथा जुर्माना।
• परिवार के सदस्य द्वारा ऐसे प्रदर्शन में सहमति देने या उसमें भाग लेने पर 2 वर्ष तक की कैद तथा जुर्माना।
• परिवार के सदस्य द्वारा शव को अंतिम संस्कार के लिए लेने से इनकार करने पर 1 वर्ष तक की कैद या जुर्माना।
विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया और इस तरह के विधेयक की जरूरत पर सहमति जताई। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मध्य प्रदेश विधानसभा में जल्द से जल्द इस संबंध में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। श्री लंबरदार ने इसे राज्य में बढ़ती “शव राजनीति” और “लाशों के साथ प्रदर्शन” जैसी घटनाओं पर रोक लगाने का अत्यंत आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा कि मृतकों का सम्मान किसी भी सभ्य समाज की पहचान है और ऐसे अमानवीय कृत्यों को रोकना समय की सबसे बड़ी मांग है।
*आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद* ने बताया कि हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों के नाम पर मृत शरीरों के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अनुचित मांगों को मनवाने के लिए शवों को सड़कों पर रखना या उनका प्रदर्शन करना न केवल मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन है, बल्कि चिकित्सा समुदाय के लिए भी अत्यंत दुखदायी है। इस कानून के लागू होने से मृतकों की गरिमा सुरक्षित रहेगी और समाज में संवेदनशीलता व मानवता बनी रहेगी।
ज्ञापन सौंपने वाले आईएमए प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन, डॉ. एम.के. जैन, डॉ. योगेंद्र खटिक, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. प्राची अग्निहोत्री सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक शामिल थे।
आईएमए सागर इस गंभीर सामाजिक मुद्दे पर जागरूकता फैलाने और कानून निर्माण में सक्रिय सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
