सागर ।युवावस्था किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी होती है। यही वह आयु है, जब युवाओं के अंदर जोश, ऊर्जा, कल्पनाशक्ति होती है। इसलिए यह कहना उचित होगा कि आज के युवा कल के नेता हैं। यह उद्गार आचार्य बिनोवा भावे वार्ड निर्तला तथा शासकीय.उ.मा. विद्यालय में आयोजित आत्मनिर्भर भारत युवा संगोष्ठी में युवा नेता अविराज सिंह ने व्यक्त किए।

अपने संबोधन में अविराज सिंह ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। इसका कारण है कि भारत के पास विश्व में सबसे अधिक युवा शक्ति है। विश्व में सबसे ज्यादा, प्रतिभाशाली युवा भारत के पास हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि युवा भारत के सपनों के प्रतिनिधि हैं। युवा वह होते हैं, जिनमें कुछ नया सोचने की कला होती है। स्वामी विवेकानंद जी ने संदेश दिया कि केवल 100 युवा देश को आगे बढ़ा सकते हैं।
श्री सिंह ने कहा कि आज पूरा विश्व चाहता है कि भारत के युवा उनके यहां आयें और काम करें। जो बातो के बादशाह नहीं हैं, जो कर के दिखाते हैं, वह युवा हैं। युवा देश का वर्तमान भी हैं और भविष्य भी हैं। इसलिए युवाओं को राष्ट्रवादी सोच को आगे बढ़ाना होगा। शिक्षा केवल स्कूल कॉलेजो तक सीमित नहीं है, हम शिक्षा से बात करना सीखते हैं। माता, पिता, मित्रों से कैसे बात करना हैं, यह सब हम शिक्षा से ही सीखते हैं। इसलिए आप अच्छा ज्ञान प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि युवाओं को राजनीति में भी रुचि लेनी होगी, क्योंकि आज के युवा ही कल के नेता हैं। युवाओं का राजनीति में आना समय की मांग हैं। उन्होंने कहा कि यदि हमें किसी भी फील्ड में आगे बढ़ना हैं तो उसकी पहली सीढ़ी असफलता हैं। असफलता ही सफलता की सीढ़ी है। आज भारत में निर्मित यूपीआई का पूरे विश्व में उपयोग हो रहा है, भारत इतना आगे बढ़ चुका है। श्री सिंह ने कहा कि जीवन में आगे वही बढ़ता है, जो डर को हरा देता है। जो अपने हुनर पर भरोसा, अपनी मिट्टी पर गर्व, और अपनी मेहनत पर विश्वास करता है। तभी आप जीवन में आगे बढ़ेंगे, प्रगति करेंगे। हम जितना परिश्रम करेंगे, उतना आगे बढ़ेंगे। इसलिए परिश्रम कि जरुरत है।
श्री सिंह ने कहा कि अभी दीपावली आ रही है, तो इस बार यह कोशिश करें कि अगर कोई वस्तु खरीदें तो उस पर मेड इन इंडिया लिखा होना चाहिए। क्योंकि भारत से हर साल 20 लाख करोड़ रुपए चायना के सामान पर जा रहा है। इसलिए हमें इस चेन को तोड़ना होगा। हमें स्वदेशी को आगे बढ़ाना होगा, तब स्वदेशी का सपना पूरा होगा, आत्म निर्भर भारत का सपना पूरा होगा। भारत आपको विश्व गुरु के रूप में चमकता हुआ नजर आऐगा। यह स्वदेशी का महत्च है। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही हमारे जीवन का आधार है। उन्होनें कहा कि अगर हमें अनुशासित बनना है तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक से जुड़ना होगा। संघ ऐसे युवाओं का निर्माण कर रहा है, जो भारत को आगे ले जाएं। अगर आपको अनुशासित बनना है तो संघ उसका सबसे अच्छा माध्यम है। उन्होंने कहा कि हमारे खुरई के युवा भी ऐसे ही होना चाहिए।
संगोष्ठी में राजकुमार अहिरवार प्रचार्य, रवीन्द्र सिंह राजपूत खुरई ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष, राहुल चौधरी खुरई नगर मण्डल अध्यक्ष, आर.एस. शर्मा बीईओ, अशोक पाराशर प्रभारी प्रचार्य, राजेन्द सेंगर, जगदीश अहिरवार पार्षद, बालकृष्ण राठौर, रामशास्त्री, अमित पटैल, धर्मेन्द्र पटैल, रनविजय सिंह, इन्द्रराज सिंह, माखन सिंह खुरई ग्रामीण मण्डल महामंत्री, नरेन्द्र पटैल, देवेन्द्र ठाकुर, खुशाल सिंह, हरि अहिरवार, भरतलाल कुर्मी, सोनू कुर्मी, प्रेम सिंह, राजेन्द्र ठाकुर, ओमकार सिंह ठाकुर, सरदार सिंह, परमानन्द यादव, विक्रम सिंह, परमानन्द साहू, मोतीलाल अहिरवार, जवाहर सिंह राजपूत, भूपेन्द्र सिंह बम्होरी, मोनू राजा किशनगढ़, के.के. शर्मा, अंकित ठाकुर आदि उपस्थित थे।

अपने संबोधन में अविराज सिंह ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। इसका कारण है कि भारत के पास विश्व में सबसे अधिक युवा शक्ति है। विश्व में सबसे ज्यादा, प्रतिभाशाली युवा भारत के पास हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि युवा भारत के सपनों के प्रतिनिधि हैं। युवा वह होते हैं, जिनमें कुछ नया सोचने की कला होती है। स्वामी विवेकानंद जी ने संदेश दिया कि केवल 100 युवा देश को आगे बढ़ा सकते हैं।
श्री सिंह ने कहा कि आज पूरा विश्व चाहता है कि भारत के युवा उनके यहां आयें और काम करें। जो बातो के बादशाह नहीं हैं, जो कर के दिखाते हैं, वह युवा हैं। युवा देश का वर्तमान भी हैं और भविष्य भी हैं। इसलिए युवाओं को राष्ट्रवादी सोच को आगे बढ़ाना होगा। शिक्षा केवल स्कूल कॉलेजो तक सीमित नहीं है, हम शिक्षा से बात करना सीखते हैं। माता, पिता, मित्रों से कैसे बात करना हैं, यह सब हम शिक्षा से ही सीखते हैं। इसलिए आप अच्छा ज्ञान प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि युवाओं को राजनीति में भी रुचि लेनी होगी, क्योंकि आज के युवा ही कल के नेता हैं। युवाओं का राजनीति में आना समय की मांग हैं। उन्होंने कहा कि यदि हमें किसी भी फील्ड में आगे बढ़ना हैं तो उसकी पहली सीढ़ी असफलता हैं। असफलता ही सफलता की सीढ़ी है। आज भारत में निर्मित यूपीआई का पूरे विश्व में उपयोग हो रहा है, भारत इतना आगे बढ़ चुका है। श्री सिंह ने कहा कि जीवन में आगे वही बढ़ता है, जो डर को हरा देता है। जो अपने हुनर पर भरोसा, अपनी मिट्टी पर गर्व, और अपनी मेहनत पर विश्वास करता है। तभी आप जीवन में आगे बढ़ेंगे, प्रगति करेंगे। हम जितना परिश्रम करेंगे, उतना आगे बढ़ेंगे। इसलिए परिश्रम कि जरुरत है।
श्री सिंह ने कहा कि अभी दीपावली आ रही है, तो इस बार यह कोशिश करें कि अगर कोई वस्तु खरीदें तो उस पर मेड इन इंडिया लिखा होना चाहिए। क्योंकि भारत से हर साल 20 लाख करोड़ रुपए चायना के सामान पर जा रहा है। इसलिए हमें इस चेन को तोड़ना होगा। हमें स्वदेशी को आगे बढ़ाना होगा, तब स्वदेशी का सपना पूरा होगा, आत्म निर्भर भारत का सपना पूरा होगा। भारत आपको विश्व गुरु के रूप में चमकता हुआ नजर आऐगा। यह स्वदेशी का महत्च है। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही हमारे जीवन का आधार है। उन्होनें कहा कि अगर हमें अनुशासित बनना है तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक से जुड़ना होगा। संघ ऐसे युवाओं का निर्माण कर रहा है, जो भारत को आगे ले जाएं। अगर आपको अनुशासित बनना है तो संघ उसका सबसे अच्छा माध्यम है। उन्होंने कहा कि हमारे खुरई के युवा भी ऐसे ही होना चाहिए।
संगोष्ठी में राजकुमार अहिरवार प्रचार्य, रवीन्द्र सिंह राजपूत खुरई ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष, राहुल चौधरी खुरई नगर मण्डल अध्यक्ष, आर.एस. शर्मा बीईओ, अशोक पाराशर प्रभारी प्रचार्य, राजेन्द सेंगर, जगदीश अहिरवार पार्षद, बालकृष्ण राठौर, रामशास्त्री, अमित पटैल, धर्मेन्द्र पटैल, रनविजय सिंह, इन्द्रराज सिंह, माखन सिंह खुरई ग्रामीण मण्डल महामंत्री, नरेन्द्र पटैल, देवेन्द्र ठाकुर, खुशाल सिंह, हरि अहिरवार, भरतलाल कुर्मी, सोनू कुर्मी, प्रेम सिंह, राजेन्द्र ठाकुर, ओमकार सिंह ठाकुर, सरदार सिंह, परमानन्द यादव, विक्रम सिंह, परमानन्द साहू, मोतीलाल अहिरवार, जवाहर सिंह राजपूत, भूपेन्द्र सिंह बम्होरी, मोनू राजा किशनगढ़, के.के. शर्मा, अंकित ठाकुर आदि उपस्थित थे।
