
उल्लेखनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व डॉ बघेल को नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा सागर नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर उपायुक्त बनाया गया था. इसके पूर्व वह सेडमेप के कर्मचारी थे. मप्र निगम कर्मचारी संघ की जिला अध्यक्ष श्रीमती वर्षा समद द्वारा डॉ बघेल की इस प्रतिनियुक्ति को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायिर की थी. याचिकाकर्ता के वकील उत्तम महेश्वरी एवं अनूप नायर ने बताया कि विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए आज मामले में नगरीय प्रशासन आयुक्त, चेयरमेन सेडमेप और निगम आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए शीघ्र ही इस पर अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दिए हैं. उल्लेखनीय है कि डॉ बघेल की उपायुक्त पद पर हुई यह प्रतिनियुक्ति महज दो वर्ष के लिए ही थी. बताया जाता है कि इस माह के अंत में उनके दो वर्ष पूरे होने वाले हैं. कोर्ट में याचिका दायर करने के पूर्व कर्मचारी संघ अध्यक्ष श्रीमती समद द्वारा मामले में पहले डॉ बघेल को ही पत्र जारी किया गया था लेकिन उन्होने जब कोई जवाब नहीं दिया तो संघ की ओर से हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी.
शासकीय कर्मी ही भेजे जा सकते हैं प्रतिनियुक्ति पर
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा डॉ बघेल को सागर निगम में उपायुक्त पद पर प्रतिनियुक्ति दे दी गई लेकिन यह नियम विरुद्ध बताई जा रही है. इसी को बेस बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी. बताया जाता है कि मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 58 (3) में स्पष्ठ उल्लेख है कि कोई शासकीय कर्मचारी ही निगम में प्रतिनियुक्ति पर रखा जा सकता है. जबकि डॉ बघेल मूलत: सेडमेप के कर्मचारी थे जो कि शासकीय संस्था नहीं बल्कि एक ऑटोनोमस वॉडी के रुप में कार्य करती है. वहीं बताया जाता है कि नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा सागर निगम में उपायुक्त की प्रतिनियुक्ति के संबंध में कोई विज्ञापन भी जारी नहीं किया था. यहां बता दें कि निगम में कुछ ऐसे कर्मचारी भी हैं जो तय समय से अधिक से प्रतिनियुक्ति पर महत्वपूर्ण पदों पर जमे हुए हैं.
