सागर । वेदांती परिसर में आज प्रातः रावतपुरा सरकार के चातुर्मास समापन अनुष्ठान का भव्य आयोजन हुआ। ब्रह्म मुहूर्त की पावन बेला में प्रातः 3:30 बजे सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक प्रारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, शिव आराधना और श्रद्धालुओं के भक्तिभाव से पूरा वेदांती परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न हुए इस महाभिषेक के दौरान भगवान शिव की विधिवत आराधना की गई। सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के माध्यम से की गई सामूहिक शिव उपासना में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और समर्पण के साथ सहभागिता की। महाभिषेक का भाव केवल व्यक्तिगत आराधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समस्त विश्व के कल्याण, शांति, सद्भाव और मंगल की सामूहिक कामना से जुड़ा रहा।
महाभिषेक के पश्चात प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इसमें सभी ने एक स्वर में समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। व्यक्तिगत मनोकामनाओं से ऊपर उठकर सामूहिक मंगल की भावना इस प्रार्थना सभा का प्रमुख भाव रही।
इसके पश्चात श्री हनुमत लक्ष्यार्चना का आयोजन हुआ। भगवान श्री हनुमान की आराधना और लक्ष्यार्चना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अपनी श्रद्धा अर्पित की। हनुमत आराधना के साथ भक्ति, सेवा, समर्पण और शक्ति के भाव को स्मरण किया गया। शिव आराधना से प्रारंभ होकर सामूहिक प्रार्थना और श्री हनुमत लक्ष्यार्चना तक चला यह धार्मिक क्रम रावतपुरा सरकार के चातुर्मास समापन अनुष्ठान का प्रमुख केंद्र रहा।
आज का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम का समापन नहीं था, बल्कि 29 जुलाई को देवशयनी एकादशी से प्रारंभ हुई चातुर्मास की साधना यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आया।
सनातन परंपरा में चातुर्मास साधना, संयम, स्वाध्याय, भक्ति और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है। इसी भावना के साथ रावतपुरा सरकार के चातुर्मास के दौरान सागर में अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
इन महीनों में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सेवा और सामाजिक संवेदना से जुड़े प्रयास भी निरंतर चलते रहे। चातुर्मास की इस यात्रा में भक्ति को सेवा से जोड़ने का विशेष भाव दिखाई दिया।
चातुर्मास के दौरान ‘एक रोटी गौ माता के लिए’ अभियान ने सेवा और संवेदना को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया।
हर शनिवार रावतपुरा सरकार लोगों के बीच पहुंचे और घर-घर जाकर गौ माता के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया।

ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न हुए इस महाभिषेक के दौरान भगवान शिव की विधिवत आराधना की गई। सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के माध्यम से की गई सामूहिक शिव उपासना में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और समर्पण के साथ सहभागिता की। महाभिषेक का भाव केवल व्यक्तिगत आराधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समस्त विश्व के कल्याण, शांति, सद्भाव और मंगल की सामूहिक कामना से जुड़ा रहा।
महाभिषेक के पश्चात प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इसमें सभी ने एक स्वर में समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। व्यक्तिगत मनोकामनाओं से ऊपर उठकर सामूहिक मंगल की भावना इस प्रार्थना सभा का प्रमुख भाव रही।
इसके पश्चात श्री हनुमत लक्ष्यार्चना का आयोजन हुआ। भगवान श्री हनुमान की आराधना और लक्ष्यार्चना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अपनी श्रद्धा अर्पित की। हनुमत आराधना के साथ भक्ति, सेवा, समर्पण और शक्ति के भाव को स्मरण किया गया। शिव आराधना से प्रारंभ होकर सामूहिक प्रार्थना और श्री हनुमत लक्ष्यार्चना तक चला यह धार्मिक क्रम रावतपुरा सरकार के चातुर्मास समापन अनुष्ठान का प्रमुख केंद्र रहा।
आज का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम का समापन नहीं था, बल्कि 29 जुलाई को देवशयनी एकादशी से प्रारंभ हुई चातुर्मास की साधना यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आया।
सनातन परंपरा में चातुर्मास साधना, संयम, स्वाध्याय, भक्ति और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है। इसी भावना के साथ रावतपुरा सरकार के चातुर्मास के दौरान सागर में अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
इन महीनों में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सेवा और सामाजिक संवेदना से जुड़े प्रयास भी निरंतर चलते रहे। चातुर्मास की इस यात्रा में भक्ति को सेवा से जोड़ने का विशेष भाव दिखाई दिया।
चातुर्मास के दौरान ‘एक रोटी गौ माता के लिए’ अभियान ने सेवा और संवेदना को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया।
हर शनिवार रावतपुरा सरकार लोगों के बीच पहुंचे और घर-घर जाकर गौ माता के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया।
यह अभियान केवल गौ सेवा का संदेश देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को यह सरल भाव समझाने का माध्यम बना कि सेवा के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। अपने घर की रसोई से निकली एक रोटी भी गौ सेवा का माध्यम बन सकती है।
महाराज श्री के इस आह्वान के साथ सागर के अनेक परिवार इस अभियान से जुड़े और अपने घर से गौ माता के लिए रोटी निकालने का संकल्प लिया।
