सागर।सागर की केंद्रीय जेल की सलाखों के पीछे मंगलवार को रक्षाबंधन का पावन पर्व मानवीय संवेदनाओं, भाई-बहन के पवित्र प्रेम और सामाजिक सुधार की एक अनूठी मिसाल बन गया।
रामसरोज समूह द्वारा “बंधन से बंधन तक” शीर्षक के तहत जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य की उपस्थिति में आयोजित इस मानवीय परंपरा का यह तीसरा वर्ष है। समूह के सदस्यों शैलेश केसरवानी, अखिलेश मोनी केसरवानी एवं डीएसपी के सी पाली, संभागीय मीडिया प्रभारी अंशुल सिंह परिहार एवं अन्य साथियों के साथ जेल परिसर पहुंचकर महिला बंदियों से राखी बंधवाई और उन्हें साड़ियां, मिठाइयां व जरूरी उपहार भेंट किए।

इस अवसर पर समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने इस आयोजन के गहरे अर्थ को समझाते हुए कहा, “पहला बंधन जंजीरों का है, जो मजबूरी का प्रतीक है और दूसरा बंधन राखी का है, जो प्रेम, विश्वास और नई उम्मीद का प्रतीक है। हमारा उद्देश्य जेल को सजा नहीं, सुधार का केंद्र बनाना है।” उन्होंने बताया कि बहनों से यह वचन भी लिया गया कि वे गुनाह की राह छोड़कर सात्विक जीवन अपनाएंगी।
समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा, “त्योहार के दिन परिवार से दूर जेल में बंद बहनें सबसे ज्यादा अकेलापन महसूस करती हैं। राम सरोज समूह की यह पहल उन्हें यह अहसास दिलाती है कि समाज ने उन्हें अपनाया है।” उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि ये सभी बहनें जल्द से जल्द सम्मानजनक तरीके से रिहा होकर अपने परिवार के साथ उज्ज्वल जिंदगी की शुरुआत करें।
जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य ने रामसरोज समूह के इस प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह पहल कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अनूठा कदम है, जिससे महिला बंदियों के चेहरों पर मुस्कान लौटी और समाज को यह मजबूत संदेश मिला कि हर इंसान के भीतर सुधार की गुंजाइश हमेशा जिंदा रहती है।
इस अवसर जेलर मनोज मिश्रा,डिप्टी जेलर गीता राठौर, हरिकिशन अहिरवार, भूपेंद्र अहिरवार,ब्रजेश दुबे,दयाराम चंदानी,दौलत चंदानी,आशीष ठाकुर,एल्डरमैन विवेक सोदिया,अमित केसरवानी,अब्बी साहू,जय दुबे,रुद्रांश केसरी,युवराज केसरी,कुणाल केसरी,अथर्व केसरवानी सहित जेल स्टाफ उपस्थित रहा।
रामसरोज समूह द्वारा “बंधन से बंधन तक” शीर्षक के तहत जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य की उपस्थिति में आयोजित इस मानवीय परंपरा का यह तीसरा वर्ष है। समूह के सदस्यों शैलेश केसरवानी, अखिलेश मोनी केसरवानी एवं डीएसपी के सी पाली, संभागीय मीडिया प्रभारी अंशुल सिंह परिहार एवं अन्य साथियों के साथ जेल परिसर पहुंचकर महिला बंदियों से राखी बंधवाई और उन्हें साड़ियां, मिठाइयां व जरूरी उपहार भेंट किए।

इस अवसर पर समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने इस आयोजन के गहरे अर्थ को समझाते हुए कहा, “पहला बंधन जंजीरों का है, जो मजबूरी का प्रतीक है और दूसरा बंधन राखी का है, जो प्रेम, विश्वास और नई उम्मीद का प्रतीक है। हमारा उद्देश्य जेल को सजा नहीं, सुधार का केंद्र बनाना है।” उन्होंने बताया कि बहनों से यह वचन भी लिया गया कि वे गुनाह की राह छोड़कर सात्विक जीवन अपनाएंगी।
समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा, “त्योहार के दिन परिवार से दूर जेल में बंद बहनें सबसे ज्यादा अकेलापन महसूस करती हैं। राम सरोज समूह की यह पहल उन्हें यह अहसास दिलाती है कि समाज ने उन्हें अपनाया है।” उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि ये सभी बहनें जल्द से जल्द सम्मानजनक तरीके से रिहा होकर अपने परिवार के साथ उज्ज्वल जिंदगी की शुरुआत करें।
जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य ने रामसरोज समूह के इस प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह पहल कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अनूठा कदम है, जिससे महिला बंदियों के चेहरों पर मुस्कान लौटी और समाज को यह मजबूत संदेश मिला कि हर इंसान के भीतर सुधार की गुंजाइश हमेशा जिंदा रहती है।
इस अवसर जेलर मनोज मिश्रा,डिप्टी जेलर गीता राठौर, हरिकिशन अहिरवार, भूपेंद्र अहिरवार,ब्रजेश दुबे,दयाराम चंदानी,दौलत चंदानी,आशीष ठाकुर,एल्डरमैन विवेक सोदिया,अमित केसरवानी,अब्बी साहू,जय दुबे,रुद्रांश केसरी,युवराज केसरी,कुणाल केसरी,अथर्व केसरवानी सहित जेल स्टाफ उपस्थित रहा।
