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    26 अगस्त की बारिश ने खोला प्रदेश के मानसून का असली चेहरा—कहीं 155 मिमी पानी, कहीं अब भी मौसमी घाटा; निम्न-दाब क्षेत्र सक्रिय, अगले कई दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने के संकेत

    admin By adminAugust 26, 2026No Comments35 Views
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    भोपाल । मध्य प्रदेश में इस मानसून की कहानी अब केवल “कितनी बारिश हुई” से नहीं समझी जा सकती। 26 अगस्त की सुबह तक उपलब्ध IMD के विभिन्न आकलनों, वर्षा मानचित्रों, स्टेशनवार वर्षा आंकड़ों, मौसम अवलोकनों और RSMC New Delhi के Tropical Weather Outlook को एक साथ देखने पर तस्वीर कहीं अधिक दिलचस्प और चिंताजनक है । यह जानकारी देते हुए सेवानिवृत मौसम विज्ञानी डॉ शैलेन्द्र नायक ने बताया कि मानसून सक्रिय है, बादल व्यापक हैं, लेकिन बारिश का वितरण बेहद असमान है।

    प्रदेश के एक हिस्से में 24 घंटे के भीतर 155 मिमी पानी गिर रहा है, जबकि दूसरी ओर कई जिलों में पूरे मानसून की वर्षा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। यही विरोधाभास मध्य प्रदेश के 2026 के मानसून की सबसे बड़ी पहचान बनता जा रहा है।
    ओरछा में 155 मिमी, जीरापुर में 113 मिमी
    26 अगस्त को पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में भारी वर्षा दर्ज हुई। सबसे अधिक ओरछा (निवाड़ी) में 155 मिमी वर्षा हुई। इसके बाद जीरापुर (राजगढ़) 113 मिमी और निवाड़ी 110 मिमी रहे।
    पूर्वी मध्य प्रदेश में लालबर्रा 84.2 मिमी, गौरीहार 69 मिमी, अजयगढ़ 65.6 मिमी, लवकुशनगर 65 मिमी, पलेरा 60 मिमी और तेंदूखेड़ा 58.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई।
    पश्चिमी मध्य प्रदेश भी पीछे नहीं रहा। जावद 95 मिमी, मंदसौर-AWS 90 मिमी, धुंधड़का 77 मिमी, जावरा 76 मिमी, नलखेड़ा 68 मिमी, मल्हारगढ़ 63 मिमी, खाचरौद 58 मिमी, पुनासा डैम 55 मिमी और महू 53 मिमी वर्षा वाले प्रमुख केंद्र रहे।

    इससे स्पष्ट है कि 26 अगस्त की भारी वर्षा किसी एक छोटे क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। *निवाड़ी–छतरपुर–टीकमगढ़–पन्ना से लेकर राजगढ़–मंदसौर–नीमच–रतलाम–आगर-मालवा और उज्जैन तक भारी वर्षा के pockets बने।*

    *व्यापक बारिश, लेकिन जिला-दर-जिला बड़ा अंतर*

    IMD के जिला-वर्षा मानचित्र के अनुसार 26 अगस्त की सुबह तक इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल, सागर, शहडोल और जबलपुर संभागों में व्यापक वर्षा/गरज-चमक दर्ज हुई। रीवा संभाग में भी अधिकांश जिलों में मौसम सक्रिय रहा।
    लेकिन इस व्यापक गतिविधि के बीच rainfall distribution अत्यंत असमान रहा।

    कुछ जिलों में एक दिन की वर्षा सामान्य से कई गुना अधिक रही, जबकि दूसरी ओर नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, रायसेन, पन्ना, बुरहानपुर, उमरिया और सागर जैसे जिलों में मौसमी rainfall deficit बना हुआ है।

    यही वह बिंदु है जो इस मानसून को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
    प्रदेश में बारिश की कमी है, लेकिन पानी की कमी हर जगह नहीं
    1 जून से 26 अगस्त तक मध्य प्रदेश की कुल वर्षा दीर्घावधि औसत से लगभग 10 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी लगभग 6 प्रतिशत, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगभग 13 प्रतिशत बताई गई है।
    *लेकिन 26 अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि cumulative deficit का अर्थ यह नहीं कि पूरे प्रदेश में बारिश कम हुई है।*
    असल समस्या है—बारिश का समय, स्थान और तीव्रता।
    कहीं कम समय में अत्यधिक वर्षा होती है, जिससे पानी खेतों और जलग्रहण क्षेत्रों में तेजी से भरता है; वहीं कुछ जिले लगातार पर्याप्त बारिश की प्रतीक्षा करते रहते हैं।

    *मानसून कमजोर नहीं—बहुत असमान है*

    इस स्थिति को “मध्य प्रदेश में मानसून कमजोर है” कहना मौसम विज्ञान की दृष्टि से सही तस्वीर नहीं होगी।

    26 अगस्त के IMD बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में अधिकांश स्थानों और पूर्वी मध्य प्रदेश में अनेक स्थानों पर वर्षा हुई।
    IMD के 7-दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए 26 अगस्त को Widespread और 27 अगस्त को Fairly Widespread वर्षा का संकेत है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक Fairly Widespread वर्षा का क्रम बना.

    इसका अर्थ है कि प्रदेश में मानसून की सक्रियता बनी हुई है, लेकिन उसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तीव्रता से दिखाई देगा।

    *मौसम की कमान फिलहाल निम्न-दाब क्षेत्र के हाथ में*

    RSMC New Delhi के 26 अगस्त के Tropical Weather Outlook के अनुसार दक्षिण उत्तर प्रदेश तथा उससे लगे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर *Low Pressure Area* मौजूद है। इससे जुड़ा *cyclonic circulation लगभग 4.5 किमी* की ऊंचाई तक फैला है।

    इसी प्रणाली के प्रभाव क्षेत्र में मध्य प्रदेश के साथ उत्तर छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल तक सक्रिय संवहनीय बादल बने हुए हैं।
    Satellite imagery में -40°C से -70°C तक के cloud-top temperatures वाले सक्रिय convective clouds दिखाई देना इस बात का संकेत है कि बादल केवल सामान्य मानसूनी बादल नहीं, बल्कि तीव्र संवहनीय गतिविधि वाले हैं।
    यही synoptic setup 26 अगस्त को मध्य प्रदेश में भारी वर्षा और गरज-चमक के कई मजबूत pockets को समझाता है।
    *चक्रवात का खतरा नहीं, लेकिन भारी बारिश का खतरा वास्तविक*
    इस समय एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
    बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य से उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उत्तर आंध्र प्रदेश–दक्षिण ओडिशा तट के पास ऊपरी वायुमंडल में एक circulation मौजूद है, लेकिन RSMC के 168 घंटे के outlook में उसके Depression में विकसित होने की संभावना NIL है।
    अरब सागर में भी अगले 168 घंटे में cyclogenesis की संभावना NIL है।
    इसलिए मध्य प्रदेश के लिए तत्काल चिंता किसी नए चक्रवात की नहीं है। चिंता मौजूदा निम्न-दाब क्षेत्र से पैदा हो रही सक्रिय मानसूनी वर्षा, गरज-चमक और स्थानीय अत्यधिक वर्षा की है।
    *बारिश के साथ गरजा भी मध्य प्रदेश*
    26 अगस्त की मौसम तस्वीर में हवा भी महत्वपूर्ण रही।
    Thunderstorm के दौरान अधिकतम हवा की गति:
    उमरिया — 37 किमी/घंटा ,इंदौर — 35 किमी/घंटा ,बड़वानी — 35 किमी/घंटा ,सागर — 35 किमी/घंटा ,जबलपुर — 33 किमी/घंटा ,खंडवा — 31 किमी/घंटा ,पन्ना — 30 किमी/घंटा
    अर्थात 26 अगस्त का मौसम केवल बारिश का नहीं था—*गरज, बिजली और तेज झोंकों के साथ सक्रिय संवहनीय मौसम* भी प्रदेश के अनेक हिस्सों में मौजूद था। IMD ने मध्य प्रदेश में thunderstorm और lightning की गतिविधि 26–30 अगस्त तक बने रहने का संकेत दिया है।
    *ग्वालियर से खंडवा तक वर्षा, तापमान पर भी असर*
    26 अगस्त सुबह 08:30 IST के मौसम अवलोकनों में प्रमुख वर्षा केंद्रों में *ग्वालियर 35.3 मिमी, अशोकनगर 34 मिमी, खंडवा 28 मिमी, नौगांव 24.6 मिमी, खरगोन 23.8 मिमी और होशंगाबाद 19.8 मिमी* दर्ज हुए।
    वहीं अधिकतम तापमान अपेक्षाकृत नियंत्रित रहा। खजुराहो में *32.2°C,* उमरिया में *32°C* और ग्वालियर में *32.4°C* दर्ज हुआ।
    उमरिया का न्यूनतम तापमान *24.5°C,* सामान्य से *3.9°C अधिक* रहा। यह बताता है कि व्यापक बादल और नमी ने दिन के तापमान को नियंत्रित किया, लेकिन रात का तापमान कुछ स्थानों पर सामान्य से ऊपर रखा।
    *फ्लैश-फ्लड का खतरा—सबसे संवेदनशील बेल्ट उत्तर-पश्चिम*
    जहां वर्षा कम समय में बहुत अधिक होती है, वहां खतरा केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता।
    IMD के फ्लैश-फ्लड आकलन में *भिंड, दतिया, ग्वालियर, मुरैना और शिवपुरी* के कुछ catchments को अगले 24 घंटों में low-to-moderate flash-flood risk में रखा गया। संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में surface runoff तथा जलभराव की आशंका विशेष चिंता का विषय है।
    इसलिए दतिया– भिंड–ग्वालियर–मुरैना–शिवपुरी बेल्ट में प्रशासन और आम नागरिकों को विशेष सतर्कता की आवश्यकता है।
    *किसानों के लिए भी यह दोहरी चुनौती*
    कृषि की दृष्टि से यह मानसून दो अलग तस्वीरें दिखा रहा है।
    अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव, मिट्टी का कटाव,
    फसल गिरने/lodging,
    निचले खेतों में पानी जमा होने, का खतरा बढ़ता है।
    वहीं rainfall-deficit वाले क्षेत्रों में पर्याप्त soil moisture की उपलब्धता अभी भी चुनौती बनी रह सकती है। इसलिए पूरे प्रदेश के लिए एक जैसी कृषि सलाह देना उचित नहीं होगा। *स्थानीय वर्षा और मिट्टी की स्थिति के आधार पर निर्णय लेना अधिक महत्वपूर्ण है।*
    *मध्य प्रदेश का मानसून: अब असली सवाल “कितनी बारिश?” नहीं, “कहां और कितनी देर में?”*
    26 अगस्त 2026 की तस्वीर हमें एक महत्वपूर्ण मौसमीय सबक देती है।
    *155 मिमी की वर्षा यह बताती है कि मानसून में पानी की ताकत है।*
    *लगभग -10% का seasonal deficit यह बताता है कि यह पानी पूरे प्रदेश में समान रूप से नहीं पहुंचा है।*
    यही कारण है कि मध्य प्रदेश में एक ही समय पर *अत्यधिक वर्षा और वर्षा की कमी* दोनों दिखाई दे रही हैं।
    आने वाले दिनों में भी यह विरोधाभास बना रह सकता है। IMD के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में 26–27 अगस्त को व्यापक वर्षा और पूर्वी मध्य प्रदेश में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक व्यापक/काफी व्यापक वर्षा की संभावना है।
    26 अगस्त ने मध्य प्रदेश के 2026 मानसून का असली चेहरा सामने रख दिया है—मानसून सक्रिय है, लेकिन बेहद असमान है।
    कहीं *ओरछा में 155 मिमी* बारिश है, कहीं *जीरापुर में 113 मिमी;* कहीं गरज-चमक के साथ 37 किमी/घंटा तक हवा चल रही है, तो कहीं cumulative rainfall अभी भी सामान्य से नीचे है।
    इसलिए मध्य प्रदेश के मानसून को आज एक वाक्य में परिभाषित करना हो तो वह होगा—
    बादल प्रदेश भर में सक्रिय हैं, लेकिन पानी बराबर नहीं बरस रहा—यही 2026 के मध्य प्रदेश मानसून की सबसे बड़ी कहानी है।

    *— शैलेन्द्र कुमार नायक*
    *मौसम एवं पर्यावरण विश्लेषक*

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