सागर । गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राहतगढ़ के सांदीपनि विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गुरुजनों का सम्मान करते हुए सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं नागरिकों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएँ दीं तथा बच्चों पर पुष्पवर्षा करते हुए स्वागत किया।

अपने संबोधन में मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि गुरू पत्थर को भी स्पर्श करके पारस बना देते हैं, माता पिता केवल जन्म देते हैं जीवन को सार्थक गुरू ही बनाते हैं। भारत की संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि माता-पिता जन्म देते हैं, जबकि गुरु ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है, जिन्होंने वेदों का विभाजन कर समाज को ज्ञान का अमूल्य प्रकाश दिया। इसी कारण उन्हें आदि गुरु कहा जाता है।
बाबा तुलसी ने गुरू की महिमा का गान करते हुए रामचरित मानस में कहा कि
गुरू बिन भवनिधि तरई न कोई, जो बिरंच शंकर सम होई।।
महान गुरुओं की परंपरा से प्रेरणा लेने का आह्वान
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि भारत का इतिहास गुरु-शिष्य परंपरा की महान मिसालों से भरा हुआ है। उन्होंने गुरु चाणक्य एवं सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, समर्थ गुरु रामदास एवं छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र, गुरु संदीपनि तथा एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि महान व्यक्तित्वों की सफलता के पीछे उनके गुरु का मार्गदर्शन ही सबसे बड़ी शक्ति रहा है।
विद्यार्थियों से गुरु का सम्मान करने और अनुशासित जीवन अपनाने का आह्वान
मं़त्री श्री राजपूत ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि जीवन में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, सैनिक, शिक्षक या किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले गुरु का सम्मान करना सीखना होगा। जो विद्यार्थी अपने गुरु का आदर करता है, समय का पालन करता है, अनुशासन में रहता है और मेहनत करता है, सफलता निश्चित रूप से उसके कदम चूमती है। हमारी भाजपा सरकार केवल विकास के लिए कार्य नहीं कर रही है, बल्कि बच्चों के संस्कारेां के लिए भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डाॅ.मोहन यादव द्वारा शिक्षा, संस्कार, संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं।
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि आज के समय में माता-पिता हमारे प्रथम गुरु हैं और शिक्षक हमें जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं बड़ों का सदैव सम्मान करें, मन लगाकर अध्ययन करें, अच्छे संस्कार अपनाएँ तथा ईमानदारी और समर्पण के साथ जीवन जीकर परिवार, समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री राजपूत ने सभी गुरुजनों को नमन करते हुए उनके ज्ञान, तपस्या एवं समर्पण को समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष प्रियंकर तिवारी, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र रघुवंषी, विनोद ओसवाल, विनोद कपूर, शैलेंद्र श्रीवास्तव,नपा उपाध्यक्ष जहीर कुरैषी, राहुल तिवारी, प्रवीण गोस्वामी, पूर्व मंडल अमित राय, नईम मंसूरी, संदीप शुक्ला, विशाल खटीक, राहुल जैन, रामकुमार राय, आनंद साहू, रामकुमार सेन, नदीम मंसूरी, धर्मेन्द्र रजक, याकूब मंसूरी, अजीत यादव, संजना जैन (महिला मोर्चा), प्रशांत देवलिया, प्रभुदयाल चैरसिया, हनुमत कुशवाहा सहित स्कूल प्राचार्य सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

अपने संबोधन में मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि गुरू पत्थर को भी स्पर्श करके पारस बना देते हैं, माता पिता केवल जन्म देते हैं जीवन को सार्थक गुरू ही बनाते हैं। भारत की संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि माता-पिता जन्म देते हैं, जबकि गुरु ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है, जिन्होंने वेदों का विभाजन कर समाज को ज्ञान का अमूल्य प्रकाश दिया। इसी कारण उन्हें आदि गुरु कहा जाता है।
बाबा तुलसी ने गुरू की महिमा का गान करते हुए रामचरित मानस में कहा कि
गुरू बिन भवनिधि तरई न कोई, जो बिरंच शंकर सम होई।।
महान गुरुओं की परंपरा से प्रेरणा लेने का आह्वान
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि भारत का इतिहास गुरु-शिष्य परंपरा की महान मिसालों से भरा हुआ है। उन्होंने गुरु चाणक्य एवं सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, समर्थ गुरु रामदास एवं छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र, गुरु संदीपनि तथा एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि महान व्यक्तित्वों की सफलता के पीछे उनके गुरु का मार्गदर्शन ही सबसे बड़ी शक्ति रहा है।
विद्यार्थियों से गुरु का सम्मान करने और अनुशासित जीवन अपनाने का आह्वान
मं़त्री श्री राजपूत ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि जीवन में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, सैनिक, शिक्षक या किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले गुरु का सम्मान करना सीखना होगा। जो विद्यार्थी अपने गुरु का आदर करता है, समय का पालन करता है, अनुशासन में रहता है और मेहनत करता है, सफलता निश्चित रूप से उसके कदम चूमती है। हमारी भाजपा सरकार केवल विकास के लिए कार्य नहीं कर रही है, बल्कि बच्चों के संस्कारेां के लिए भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डाॅ.मोहन यादव द्वारा शिक्षा, संस्कार, संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं।
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि आज के समय में माता-पिता हमारे प्रथम गुरु हैं और शिक्षक हमें जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं बड़ों का सदैव सम्मान करें, मन लगाकर अध्ययन करें, अच्छे संस्कार अपनाएँ तथा ईमानदारी और समर्पण के साथ जीवन जीकर परिवार, समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री राजपूत ने सभी गुरुजनों को नमन करते हुए उनके ज्ञान, तपस्या एवं समर्पण को समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष प्रियंकर तिवारी, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र रघुवंषी, विनोद ओसवाल, विनोद कपूर, शैलेंद्र श्रीवास्तव,नपा उपाध्यक्ष जहीर कुरैषी, राहुल तिवारी, प्रवीण गोस्वामी, पूर्व मंडल अमित राय, नईम मंसूरी, संदीप शुक्ला, विशाल खटीक, राहुल जैन, रामकुमार राय, आनंद साहू, रामकुमार सेन, नदीम मंसूरी, धर्मेन्द्र रजक, याकूब मंसूरी, अजीत यादव, संजना जैन (महिला मोर्चा), प्रशांत देवलिया, प्रभुदयाल चैरसिया, हनुमत कुशवाहा सहित स्कूल प्राचार्य सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
