सागर । नगर पालिक निगम अंतर्गत डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल हफ़सिली में विगत वर्ष से प्रारम्भ की गई विशाल गोवर्धन पर्वत पूजा इस वर्ष और भी भव्यता के साथ दिनांक 9 नवंबर सोमवार को आयोजित की जावेगी। पशुपालन संघ और नगर पालिक निगम के तत्वावधान में सागर के पशु पालकों को प्रोत्साहित करने और डेयरी विस्थापन परियोजना को फलीभूत करने हेतु निगमायुक्त राजकुमार खत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हफ़सिली स्थित पशु बाजार शेड के पास गोबर से विशाल गोवर्धन पर्वत बनाकर अन्नकूट पूजन प्रारम्भ किया गया। इस वर्ष की पूजन हेतु गोबर मिट्टी से पर्वत बनाने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। इस आयोजन और और भी गरिमामयी बनाने के उद्देश्य से तैयारियां पूजन वाले दिन से लगभग एक सप्ताह पहले से ही प्रारम्भ कर दी गई हैं।

निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने हफ़सिली डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल पर गोवर्धन पूजा की तैयारियों का जायजा लिया और सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण कर उक्त गोवर्धन पूजा को मेले के रूप में अधिक भव्यता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा की सागर में धर्म संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं, मान्यताओं को नागरिक अधिक उत्साह आनंद के साथ निभाते है। ऐसे में इन परम्पराओं का हिस्सा बनकर नागरिकों में शहर के विकास, स्वच्छता और सुंदरता के प्रति जागरूकता लाने और सागर को सांस्कृतिक नगरी के रूप में ख्याति दिलाने के हमारे प्रयास हैं। उन्होंने कहा की हफ़सिली डेयरी परियोजना स्थल पर मेले के रूप में गोवर्धन अन्नकूट पूजन का आयोजन बड़े धूमधाम के साथ किया जायेगा। उन्होंने 101 फीट लंबे और 11 फीट ऊंचे गोवर्धन पर्वत को गोबर मिट्टी से बनाने के लिए उक्त आयोजन स्थल पर माप आदि कराकर चूना डलवाया और पूजन स्थल की समुचित साफ-सफाई के साथ पर्वत निर्माण प्रारम्भ करने के निर्देश दिए। गोवर्धन पर्वत के साथ में भगवान श्री कृष्णा की पर्वत उठाये हुए प्रतिमा और उनकी गौऐं व अन्य जरुरी आकृतियाँ भी यहाँ बनायीं जाएंगी। गोबर से पर्वत व गिरराज बनाकर कलाकारों द्वारा आकर्षक रंगों से श्रृंगार किया जायेगा। सागर में यह पहला स्थान है जहाँ इतने विशाल आकार के बड़े गोवर्धन पर्वत को बनाकर पूजन किया जा रहा है। हमारा प्रयास है की यह प्रदेश के सबसे बड़े गोवर्धन महाराज हों और रहवासियों सहित आस पास के लोगों हेतु आस्था व आकर्षण का केंद्र बनें। जहां पर अन्नकूट पूजन के लिए सागर और आसपास के कई गांव से श्रद्धालु एकत्रित होकर इस मेले को और भव्य बनाएं।
*हफ़सिली गोवर्धन पूजा में श्रद्धाभक्ति के साथ ये होंगे मुख्य आकर्षण*
गोबर मिट्टी से बने 101 फ़ीट लम्बे और 11 फ़ीट ऊँचे विशाल गोवर्धन गिरराज के दर्शन व पूजन, भगवान श्रीकृष्ण और उनकी गौओं की गोबर से बनी आकर्षक प्रतिमा झांकी, रंगोली व अन्य साज सज्जा। लोककला को प्रदर्शित करते पारंपरिक नृत्य मोनिया नृत्य, दिवाली नृत्य, ग्वाल नृत्य सहित ढोल तांसे नगड़िया की लोककलाकारों द्वारा प्रस्तुति। अन्नकूट पूजन में 56 भोग की प्रसादी में पशुपालक और स्थानीय लोग विभिन्न पकवान अपने-अपने घरों व अन्य जगह से लाकर भोग लगवाएंगे। गौ पूजन का भी बड़ा महत्व है इस दौरान पशुपालक अपनी गायों के पूरे शरीर को रंग-बिरंगे रंग से रंगकर आभूषण आदि पहनाकर विशेष रूप से सजाकर मेले में लाएंगे और गोवर्धन पूजा के साथ इनका पूजन करेंगे।

निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने हफ़सिली डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल पर गोवर्धन पूजा की तैयारियों का जायजा लिया और सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण कर उक्त गोवर्धन पूजा को मेले के रूप में अधिक भव्यता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा की सागर में धर्म संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं, मान्यताओं को नागरिक अधिक उत्साह आनंद के साथ निभाते है। ऐसे में इन परम्पराओं का हिस्सा बनकर नागरिकों में शहर के विकास, स्वच्छता और सुंदरता के प्रति जागरूकता लाने और सागर को सांस्कृतिक नगरी के रूप में ख्याति दिलाने के हमारे प्रयास हैं। उन्होंने कहा की हफ़सिली डेयरी परियोजना स्थल पर मेले के रूप में गोवर्धन अन्नकूट पूजन का आयोजन बड़े धूमधाम के साथ किया जायेगा। उन्होंने 101 फीट लंबे और 11 फीट ऊंचे गोवर्धन पर्वत को गोबर मिट्टी से बनाने के लिए उक्त आयोजन स्थल पर माप आदि कराकर चूना डलवाया और पूजन स्थल की समुचित साफ-सफाई के साथ पर्वत निर्माण प्रारम्भ करने के निर्देश दिए। गोवर्धन पर्वत के साथ में भगवान श्री कृष्णा की पर्वत उठाये हुए प्रतिमा और उनकी गौऐं व अन्य जरुरी आकृतियाँ भी यहाँ बनायीं जाएंगी। गोबर से पर्वत व गिरराज बनाकर कलाकारों द्वारा आकर्षक रंगों से श्रृंगार किया जायेगा। सागर में यह पहला स्थान है जहाँ इतने विशाल आकार के बड़े गोवर्धन पर्वत को बनाकर पूजन किया जा रहा है। हमारा प्रयास है की यह प्रदेश के सबसे बड़े गोवर्धन महाराज हों और रहवासियों सहित आस पास के लोगों हेतु आस्था व आकर्षण का केंद्र बनें। जहां पर अन्नकूट पूजन के लिए सागर और आसपास के कई गांव से श्रद्धालु एकत्रित होकर इस मेले को और भव्य बनाएं।
*हफ़सिली गोवर्धन पूजा में श्रद्धाभक्ति के साथ ये होंगे मुख्य आकर्षण*
गोबर मिट्टी से बने 101 फ़ीट लम्बे और 11 फ़ीट ऊँचे विशाल गोवर्धन गिरराज के दर्शन व पूजन, भगवान श्रीकृष्ण और उनकी गौओं की गोबर से बनी आकर्षक प्रतिमा झांकी, रंगोली व अन्य साज सज्जा। लोककला को प्रदर्शित करते पारंपरिक नृत्य मोनिया नृत्य, दिवाली नृत्य, ग्वाल नृत्य सहित ढोल तांसे नगड़िया की लोककलाकारों द्वारा प्रस्तुति। अन्नकूट पूजन में 56 भोग की प्रसादी में पशुपालक और स्थानीय लोग विभिन्न पकवान अपने-अपने घरों व अन्य जगह से लाकर भोग लगवाएंगे। गौ पूजन का भी बड़ा महत्व है इस दौरान पशुपालक अपनी गायों के पूरे शरीर को रंग-बिरंगे रंग से रंगकर आभूषण आदि पहनाकर विशेष रूप से सजाकर मेले में लाएंगे और गोवर्धन पूजा के साथ इनका पूजन करेंगे।
