सागर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्मतीथि के पावन अवसर पर सागर केंद्रीय जेल में मानवता, आत्मचिंतन और सुधार की भावना से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य शासन के निर्देशानुसार एवं जेल विभाग की नई सुधार नीति के तहत इस विशेष अवसर पर केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 5 दंडित बंदियों को विशेष माफी के तहत रिहा किया गया, जिससे उनके जीवन में नई शुरुआत की एक मजबूत राह खुली है। गांधीजी के सत्य,अहिंसा,आत्मसंयम और सद्मार्ग के संदेश रहे, जिसके माध्यम से रिहा होने वाले बंदियों और अन्य साथियों को सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

कारावास की अवधि के दौरान इन बंदियों को समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से टेलरिंग, कारपेंट्री,लोहारी,भवन मिस्त्री और भवन निर्माण जैसे उपयोगी रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए गए थे, ताकि वे जेल से बाहर आकर अपनी आजीविका स्वतंत्र और सम्मानपूर्वक अर्जित कर सकें।
इस अवसर पर इन सभी रिहा होने वाले बंदियों को विदाई स्वरूप में रामसरोज समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी एवं समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी द्वारा जेल अधीक्षक श्री रमेश चंद्र आर्य जी की उपस्थिति में गंगाजल, महाकाल का दुपट्टा एवं पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर उन्हें यह संकल्प दिलाया गया कि वे अपने आगामी जीवन में गीता के दिव्य सार को मन में बसाकर कभी भी अपराध के रास्ते पर कदम नहीं रखेंगे। कैसी भी विकट परिस्थितियां क्यों न हों, वे अपने विवेक, धैर्य और ईश्वर की भक्ति का संबल लेकर अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।
इस अवसर पर केंद्रीय जेल अधीक्षक रमेशचंद्र आर्या ने कहा कि गांधी जयंती केवल राष्ट्रपिता को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके सत्य,अहिंसा और मानवता के विचारों को अपने आचरण में ढालने का अवसर है। इंसान से भूल हो सकती है, लेकिन सुधार और सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प किसी भी व्यक्ति के जीवन की पूरी दिशा बदल सकता है। उन्होंने रिहा होने वाले कैदियों से विशेष आग्रह किया कि वे अपने अतीत की भूलों से सीख लें,पूरी तरह अपराध से तौबा करें और एक आदर्श नागरिक के रूप में जीवन जीकर समाज व परिवार का विश्वास जीतें। उन्होंने रामसरोज समूह का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि रामसरोज समूह के सदस्य जेल कैदियों के सुधार हेतु लगातार कार्य करते रहते हैं।
रामसरोज समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि किसी व्यक्ति की एक गलती उसके पूरे जीवन की पहचान नहीं बन सकती। यदि सही दिशा, संस्कार और समाज का संबल मिले, तो कोई भी व्यक्ति सकारात्मक बदलाव की इबारत लिख सकता है। गांधी जयंती पर बंदियों को सम्मान के साथ विदाई देना और उन्हें नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करना मानवीय संवेदना का अनूठा उदाहरण है।
समाजसेवी अखिलेश मौनी केशरवानी ने कहा कि बंदियों को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट करना केवल एक धार्मिक पुस्तक देना नहीं, बल्कि उन्हें विवेक, धैर्य, आत्मसंयम और सदाचरण की ऊर्जा देना है। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जल्दबाजी या शॉर्टकट अपनाने के बजाय संयम से काम लेना चाहिए। ईश्वर की भक्ति और गीता का ज्ञान ही मनुष्य को सही मार्ग दिखाता है।
इस अवसर पर महिला प्रभारी गीता राठौर,जेलर सौरभ सिंह,हरिकिशन अहिरवार,भूपेंद्र अहिरवार, बृजेश दुबे, रुद्रांश केशरी, युवराज केसरी,कुणाल केशरी, शिवांश सोनी,अनमोल गुप्ता, वृंदावन पाठक, अभिषेक स्थपक,संतोष सेन सहित जेल स्टाफ व अन्य लोग उपस्थित रहे।

कारावास की अवधि के दौरान इन बंदियों को समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से टेलरिंग, कारपेंट्री,लोहारी,भवन मिस्त्री और भवन निर्माण जैसे उपयोगी रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए गए थे, ताकि वे जेल से बाहर आकर अपनी आजीविका स्वतंत्र और सम्मानपूर्वक अर्जित कर सकें।
इस अवसर पर इन सभी रिहा होने वाले बंदियों को विदाई स्वरूप में रामसरोज समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी एवं समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी द्वारा जेल अधीक्षक श्री रमेश चंद्र आर्य जी की उपस्थिति में गंगाजल, महाकाल का दुपट्टा एवं पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर उन्हें यह संकल्प दिलाया गया कि वे अपने आगामी जीवन में गीता के दिव्य सार को मन में बसाकर कभी भी अपराध के रास्ते पर कदम नहीं रखेंगे। कैसी भी विकट परिस्थितियां क्यों न हों, वे अपने विवेक, धैर्य और ईश्वर की भक्ति का संबल लेकर अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।
इस अवसर पर केंद्रीय जेल अधीक्षक रमेशचंद्र आर्या ने कहा कि गांधी जयंती केवल राष्ट्रपिता को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके सत्य,अहिंसा और मानवता के विचारों को अपने आचरण में ढालने का अवसर है। इंसान से भूल हो सकती है, लेकिन सुधार और सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प किसी भी व्यक्ति के जीवन की पूरी दिशा बदल सकता है। उन्होंने रिहा होने वाले कैदियों से विशेष आग्रह किया कि वे अपने अतीत की भूलों से सीख लें,पूरी तरह अपराध से तौबा करें और एक आदर्श नागरिक के रूप में जीवन जीकर समाज व परिवार का विश्वास जीतें। उन्होंने रामसरोज समूह का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि रामसरोज समूह के सदस्य जेल कैदियों के सुधार हेतु लगातार कार्य करते रहते हैं।
रामसरोज समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि किसी व्यक्ति की एक गलती उसके पूरे जीवन की पहचान नहीं बन सकती। यदि सही दिशा, संस्कार और समाज का संबल मिले, तो कोई भी व्यक्ति सकारात्मक बदलाव की इबारत लिख सकता है। गांधी जयंती पर बंदियों को सम्मान के साथ विदाई देना और उन्हें नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करना मानवीय संवेदना का अनूठा उदाहरण है।
समाजसेवी अखिलेश मौनी केशरवानी ने कहा कि बंदियों को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट करना केवल एक धार्मिक पुस्तक देना नहीं, बल्कि उन्हें विवेक, धैर्य, आत्मसंयम और सदाचरण की ऊर्जा देना है। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जल्दबाजी या शॉर्टकट अपनाने के बजाय संयम से काम लेना चाहिए। ईश्वर की भक्ति और गीता का ज्ञान ही मनुष्य को सही मार्ग दिखाता है।
इस अवसर पर महिला प्रभारी गीता राठौर,जेलर सौरभ सिंह,हरिकिशन अहिरवार,भूपेंद्र अहिरवार, बृजेश दुबे, रुद्रांश केशरी, युवराज केसरी,कुणाल केशरी, शिवांश सोनी,अनमोल गुप्ता, वृंदावन पाठक, अभिषेक स्थपक,संतोष सेन सहित जेल स्टाफ व अन्य लोग उपस्थित रहे।
