सागर । श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय के संयुक्त तत्वाधान में गुरूपूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केशवदास जी गिरी एवं विशिष्ठ अतिथि श्याम मनोहर चतुर्वेदी थे। कार्यक्रम की शुरूआत में मॉ सरस्वती के पूजन एवं वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ पं ज्वाला प्रसाद रिछारिया ने वैदिक मंत्रों से पूजन कराया।

कवि पूरन सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संस्कृत विद्यालय के अध्यक्ष पं के के सिलाकारी ने कार्यक्रम के संदर्भ में अपने विचार रखे, गुरू पूर्णिमा और गुरू की महात्व पर प्रकाश डाला, आज का दिन हमारे जीवन में गुरु के महत्व को स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान दिया गया है। वेद व्यास जी के गं्रथों की चर्चा की। कार्यक्रम के अतिथियों ने गुरू के संदर्भ में अपने विचार रखे गुरू ज्ञान के साथ साथ पथ प्रदर्शक है, गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो हमें सत्य, ज्ञान और जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। माता.पिता हमें जीवन देते हैं, लेकिन गुरु हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। वे हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, हमारी क्षमताओं को पहचानते हैं और हमें सफलता की ओर अग्रसर करते हैं। गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है जिन्हें वेदों के संकलन और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना का श्रेय प्राप्त है। उनके सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है। यह केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और समर्पण का उत्सव है। इस अवसर पर श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय के सचिव पं शुकदेव तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा आज के आधुनिक युग में ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन एक सच्चे गुरु का स्थान कोई तकनीक या पुस्तक नहीं ले सकती। गुरु केवल जानकारी नहीं देते, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमताए नैतिक मूल्य और जीवन का उद्देश्य भी सिखाते हैं।आइए, इस अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करेंगे, उनके बताए मार्ग पर चलेंगे अनुशासन का पालन करेंगे और अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र की प्रगति के लिए करेंगे। कार्यक्रम का संचालन स्वर संगम संस्था के हरिसिंह ठाकुर ने किया इस अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के सचिव घनश्याम दुबे , प्राचार्य उमाकांत गौतम, गजाधर सागर , सुशील भार्गव, श्रीमती संध्या भार्गव डॉ लक्ष्मीपाण्डेय, पूरन सिंह , नारायण प्रसाद कोरी, जीएल छत्रसाल, आर एस बादल, आर एस यादव , आशालता सिलाकारी, संतोष सिलाकारी, परषोत्तम मुन्ना चौबे, निषिकांत सिलाकारी , डी एन चौबे, राजू चौबे, सौरभ वाल्मीकि सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

कवि पूरन सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संस्कृत विद्यालय के अध्यक्ष पं के के सिलाकारी ने कार्यक्रम के संदर्भ में अपने विचार रखे, गुरू पूर्णिमा और गुरू की महात्व पर प्रकाश डाला, आज का दिन हमारे जीवन में गुरु के महत्व को स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान दिया गया है। वेद व्यास जी के गं्रथों की चर्चा की। कार्यक्रम के अतिथियों ने गुरू के संदर्भ में अपने विचार रखे गुरू ज्ञान के साथ साथ पथ प्रदर्शक है, गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो हमें सत्य, ज्ञान और जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। माता.पिता हमें जीवन देते हैं, लेकिन गुरु हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। वे हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, हमारी क्षमताओं को पहचानते हैं और हमें सफलता की ओर अग्रसर करते हैं। गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है जिन्हें वेदों के संकलन और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना का श्रेय प्राप्त है। उनके सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है। यह केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और समर्पण का उत्सव है। इस अवसर पर श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय के सचिव पं शुकदेव तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा आज के आधुनिक युग में ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन एक सच्चे गुरु का स्थान कोई तकनीक या पुस्तक नहीं ले सकती। गुरु केवल जानकारी नहीं देते, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमताए नैतिक मूल्य और जीवन का उद्देश्य भी सिखाते हैं।आइए, इस अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करेंगे, उनके बताए मार्ग पर चलेंगे अनुशासन का पालन करेंगे और अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र की प्रगति के लिए करेंगे। कार्यक्रम का संचालन स्वर संगम संस्था के हरिसिंह ठाकुर ने किया इस अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के सचिव घनश्याम दुबे , प्राचार्य उमाकांत गौतम, गजाधर सागर , सुशील भार्गव, श्रीमती संध्या भार्गव डॉ लक्ष्मीपाण्डेय, पूरन सिंह , नारायण प्रसाद कोरी, जीएल छत्रसाल, आर एस बादल, आर एस यादव , आशालता सिलाकारी, संतोष सिलाकारी, परषोत्तम मुन्ना चौबे, निषिकांत सिलाकारी , डी एन चौबे, राजू चौबे, सौरभ वाल्मीकि सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
