सागर। कच्छ कडवा पाटीदार समाज द्वारा पटकुई वरारू स्थित कुबेर वाटिका में श्रीमद भागवत कथा के पहले दिन नीलगिरी पीठाधीश्वर आत्मानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मनुष्य आत्मा है, आत्मा का रूप सच्चानंद शरीर है। शरीर एक साधन है जहां आत्मा निवास करती है। जिस दिन आत्मा नहीं रहेंगी उस दिन शरीर को मुर्दा, देह, बॉडी का नाम दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का जन्म चैरासी लाख योनी के बाद इंसान के रूप में हुआ है। इंसान बिना किसी नाम और जाति के साथ इस धरती पर जन्म लेता है। शरीर के साथ नाम और जाति जुड जाती है। आत्मा का श्रृंगार सत्संग है। शरीर में जब तक आत्मा है, तब तक मनुष्य का जीवन है। उन्होंने कहा साधना के द्वारा स्वरूप का बोध होता है। साथ ही सर्वत्र परमात्मा ही आत्मा है। आत्मा और परमात्मा से प्रेम करना सीखें। परम सुख, शास्वत सुख की प्राप्ति है। मनुष्य के कर्मों से आत्मा मानी जाती है। आत्मानंद महाराज ने कहा कि भगवान जब कृपा करते है तब संत सद्गुरु से मिलवा देते है। हर एक मनुष्य के हृदय में भगवान है। इस संसार का कोई अस्तित्व नहीं है, मोह को त्याग देने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। भगवान का नाम और कथाओं का सार श्रीमद्भागवत कथा है। जब व्यक्ति कठिन समय में धर्म, न्याय को नहीं छोडे वहीं सच्चा भक्त होता है। इस कथा का आयोजन मौनी बाबा के संकल्प से हुआ है। कथा श्रवण करने मौनी बाबा, संत शिवदास महाराज गंजबासौदा, कथा के मुख्य यजमान पंडित दिनेश, पुष्पा शुक्ला , आचार्य पंडित रामकुमार खमरिया, मधुभाई, दलसुख भाई, चंद्र भूषण तिवारी सहित बडी संख्या में भक्त मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का जन्म चैरासी लाख योनी के बाद इंसान के रूप में हुआ है। इंसान बिना किसी नाम और जाति के साथ इस धरती पर जन्म लेता है। शरीर के साथ नाम और जाति जुड जाती है। आत्मा का श्रृंगार सत्संग है। शरीर में जब तक आत्मा है, तब तक मनुष्य का जीवन है। उन्होंने कहा साधना के द्वारा स्वरूप का बोध होता है। साथ ही सर्वत्र परमात्मा ही आत्मा है। आत्मा और परमात्मा से प्रेम करना सीखें। परम सुख, शास्वत सुख की प्राप्ति है। मनुष्य के कर्मों से आत्मा मानी जाती है। आत्मानंद महाराज ने कहा कि भगवान जब कृपा करते है तब संत सद्गुरु से मिलवा देते है। हर एक मनुष्य के हृदय में भगवान है। इस संसार का कोई अस्तित्व नहीं है, मोह को त्याग देने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। भगवान का नाम और कथाओं का सार श्रीमद्भागवत कथा है। जब व्यक्ति कठिन समय में धर्म, न्याय को नहीं छोडे वहीं सच्चा भक्त होता है। इस कथा का आयोजन मौनी बाबा के संकल्प से हुआ है। कथा श्रवण करने मौनी बाबा, संत शिवदास महाराज गंजबासौदा, कथा के मुख्य यजमान पंडित दिनेश, पुष्पा शुक्ला , आचार्य पंडित रामकुमार खमरिया, मधुभाई, दलसुख भाई, चंद्र भूषण तिवारी सहित बडी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
