सागर । इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सागर और स्वास्थ विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान से सीएचसी केसली में स्ट्रोक जागरूकता शिविर का कार्यक्रम आयोजित किया गया। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपांशु दुबे ने स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेतों की विस्तार से जानकारी दी, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं ।

चेहरा, बाजू या टांग में अचानक सुन्नता या कमजोरी (खासकर शरीर के एक तरफ), बोलने में अचानक दिक्कत, शब्दों का उच्चारण बिगड़ना या समझने में परेशानी, अचानक दिखाई देना बंद होना या धुंधला दिखना, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना या चलने में कठिनाई ,बिना किसी कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द डॉ. दुबे ने FAST नियम को याद रखने की सलाह दी , चेहरा टेढ़ा हो जाना , बाजू उठाने में एक तरफ कमजोरी , बोलने में दिक्कत , तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल फोन करें, समय बहुत कीमती है ।
उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के इलाज का स्वर्णिम समय (गोल्डन ऑवर) बहुत महत्वपूर्ण है। यदि निर्धारित समय-सीमा (थ्रॉम्बोलिसिस के लिए 4.5 घंटे एवं थ्रॉम्बेक्टॉमी के लिए 6-24 घंटे) के अंदर इलाज शुरू हो जाए तो मस्तिष्क को होने वाली क्षति को बहुत हद तक रोका जा सकता है तथा मरीज पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है। देरी होने पर स्थायी लकवा या मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
आईएमए सागर अध्यक्ष डॉ.तल्हा साद ने स्ट्रोक की रोकथाम पर जोर देते हुए कहा कि उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का सबसे बड़ा नियंत्रणीय कारण है। डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन एवं निष्क्रिय जीवनशैली भी बड़े जोखिम हैं। उन्होंने सलाह दी कि ब्लड प्रेशर, शुगर व कोलेस्ट्रॉल को नियमित जांचें एवं नियंत्रित रखें ,
संतुलित आहार लें, रोज व्यायाम करें, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें, शराब सीमित मात्रा में या बिल्कुल न लें बीपी की दवा कभी न छोड़ें, डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन शुरू न करें
बीएमओ डॉ. मधुर जैन , डॉ श्याम अग्रवाल तथा उपस्थित सभी नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने इस जागरूकता सत्र को और प्रभावशाली बना दिया। आईएमए सागर शाखा ने सभी से अपील की है कि स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही एक मिनट भी व्यर्थ न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि “समय ही मस्तिष्क है”।

चेहरा, बाजू या टांग में अचानक सुन्नता या कमजोरी (खासकर शरीर के एक तरफ), बोलने में अचानक दिक्कत, शब्दों का उच्चारण बिगड़ना या समझने में परेशानी, अचानक दिखाई देना बंद होना या धुंधला दिखना, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना या चलने में कठिनाई ,बिना किसी कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द डॉ. दुबे ने FAST नियम को याद रखने की सलाह दी , चेहरा टेढ़ा हो जाना , बाजू उठाने में एक तरफ कमजोरी , बोलने में दिक्कत , तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल फोन करें, समय बहुत कीमती है ।
उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के इलाज का स्वर्णिम समय (गोल्डन ऑवर) बहुत महत्वपूर्ण है। यदि निर्धारित समय-सीमा (थ्रॉम्बोलिसिस के लिए 4.5 घंटे एवं थ्रॉम्बेक्टॉमी के लिए 6-24 घंटे) के अंदर इलाज शुरू हो जाए तो मस्तिष्क को होने वाली क्षति को बहुत हद तक रोका जा सकता है तथा मरीज पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है। देरी होने पर स्थायी लकवा या मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
आईएमए सागर अध्यक्ष डॉ.तल्हा साद ने स्ट्रोक की रोकथाम पर जोर देते हुए कहा कि उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का सबसे बड़ा नियंत्रणीय कारण है। डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन एवं निष्क्रिय जीवनशैली भी बड़े जोखिम हैं। उन्होंने सलाह दी कि ब्लड प्रेशर, शुगर व कोलेस्ट्रॉल को नियमित जांचें एवं नियंत्रित रखें ,
संतुलित आहार लें, रोज व्यायाम करें, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें, शराब सीमित मात्रा में या बिल्कुल न लें बीपी की दवा कभी न छोड़ें, डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन शुरू न करें
बीएमओ डॉ. मधुर जैन , डॉ श्याम अग्रवाल तथा उपस्थित सभी नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने इस जागरूकता सत्र को और प्रभावशाली बना दिया। आईएमए सागर शाखा ने सभी से अपील की है कि स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही एक मिनट भी व्यर्थ न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि “समय ही मस्तिष्क है”।
