
उल्लेखनीय है कि करीब ढाई माह बाद आज निगम परिषद का साधारण सम्मेलन आयोजित किया गया. जिसमें जल कर और सीवर पर उपभोक्ताओं से राशि लिए जाने के प्रस्ताव को लेकर पहले से ही हंगामें की आशंका थी. इन दोनों विषयों पर चर्चा करते हुए पार्षद देवेंद्र अहिरवार, याकृति जडिय़ा, मनोज चौरसिया, बाबू सिंह यादव, शिवशंकर यादव, शैलेंद्र ठाकुर आदि नेे गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि अब तक टाटा कंपनी द्वारा शहर में कितना कार्य किया गया है पहले यह बताएं. पार्षदों की आपित्त पर एमपीयूडीसी के कर्मी अरुण एवं टाटा के संजय गौतम ने बताया कि अब तक छह से अधिक वार्डों में पुरानी लाइन के साथ ही नई लाइन से भी सप्लाई हो रही है. इस पर पार्षदों ने कहा कि इसके चलते लाखों गेलन पानी व्यर्थ बह रहा है. यही स्थिति रही तो आने वाली गर्मियों में शहर को गंभीर जलसंकट से जूझना पड़ सकता है. अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार ने प्रस्ताव रखा कि जलसंकट को लेकर सभी 48 वार्डों में बोरवेल खनन किए जाए यह प्रस्ताव पारित किया गया. कार्यपालन यंत्री विजय दुबे ने सीवर के संबंध में आए प्रस्ताव पर जानकारी देते हुए बताया कि इसमें करीब 60 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च हो रहा है. इस पर सदस्यों ने जानना चाहा कि जब इन्वेस्टर्स मीट में सीवर के पानी को ट्रीट कर उद्योगों को दिया जाना है तो पैसे उनसे लें उपभोक्ता से नहीं. यह विषय भी अगली परिषद में पूरी जानकारी के साथ लाने का निर्णय हुआ. ऐसे ही मप्र व्यापार अनुज्ञापन नियम 2023 प्रस्तुत किया गया जिसके तहत शहर में दुकानदारों को लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया है. इस विषय को भी अगली परिषद के लिए टाल दिया गया. अन्य विषयों में निगम के 84 संविदा कर्मियों को विनियमित करने का प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय हुआ तो साथ ही निगम द्वारा डीडी कॉम्पलेक्स सहित सीलाँज एवं मेनपानी में बनाई जा रही दुकानों को विक्रय करने का निर्णय लिया गया.
बैठक में एमआईसी सदस्यों द्वारा लगातार प्रस्तावों का विरोध करने पर अध्यक्ष श्री अहिरवार ने निगम अधिकारियों से कहा कि यह नगर के मंत्रीमंडल सदस्य हैं लेकिन इन्हें ही पूरी जानकारी नहीं जाती है. आगामी बैठक के पूर्व एमआईसी सदस्यों को विस्तारित जानकारी दी जाए नहीं तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जायेगी. इस पर एमआईसी सदस्य अनूप उर्मिल का कहना था कि हम एमआईसी सदस्य बाद में है पहले जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए जनहित के मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं. बैठक में निगम कर्मियों की नियुक्ति के संबंध में आए विषय पर सहायक आयुक्त आनंद मंगल गुरु ने बताया कि फिलहाल 2011 की जनसंख्या के आधार पर निगम कर्मी कार्यरत है उनके अनुसार संख्यिकी विभाग द्वारा वर्तमान में नगर की जनसंख्या बढक़र 4 लाख 62 हजार बताई जा चुकी है. इसके तहत कर्मी बढ़ाए जाना हैं.
पार्षदों ने जताया तीखा विरोध
नगम परिषद के साधारण सम्मेलन में आज पक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के पार्षदों ने जनहित में उठाई खबरों का हवाला दिया. नेता प्रतिपक्ष बाबू सिंह यादव ने व्यापार अधिनियम को अनुचित बताते हुए इसे अतिक्रमण करने का एक रास्ता निरुपित किया. तो वहीं पार्षद शिवशंकर यादव ने भी जलकर वृद्धि को लेकर विरोध जताया । वरिष्ठ पार्षद डॉ याकृति जडिय़ा ने शहर में अनियमित जलप्रदाय को लेकर आपत्ति जताई. पार्षदों की आपत्ति पर एमपीयूडीसी के प्रतिनिधि ने बताया कि शहर में 23 किमी लाइन टाटा नहीं बल्कि निगम को डालनी है. इसमें से अभी केवल 9.5 किमी का टेंडर हुआ है बाकी शेष है. अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार ने भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि टाटा के कारण शहरों की सडक़ों की खराब हालत से पूरी परिषद लगातार दुखी है. जलकर वृद्धि पर महापौर श्रीमती संगीता तिवारी ने भी इसे जनता से ज़ुड़ा विषय बताते हुए कहा कि पहले टाटा व्यर्थ बह रहे लाखों गेलन पानी, लीकेज रोकने और प्रतिदिन पानी सप्लाई नहीं कर सकते तो जल कर नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. शहर में आवारा कुत्तों और पशुओं केसंबंध में आयी चर्चा पर जब पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई तो स्वास्थ्य विभाग प्रभारी राजेश सिंह ने जानकारी दी कि कुत्तों के बधियाकरण का टेंडर स्वीकृत हो चुका है, हालांकि अतिक्रमण प्रभारी कृष्ण कुमार चौरसिया ने आवारा पशुओं के संबंध में जब यह कहा कि शहर में कोई साड़ नहीं बचा तो पूरी परिषद खिलखिलाकर हंस पड़ी.
