सागर । पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय सागर में अतिरिक्त संचालक कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सम्भागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि शिक्षकों की समाज में भूमिका वर्तमान समय में महत्वपूर्ण विषय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में आधुनिक ज्ञान के विस्तार को भारतीय दृष्टिकोण से परिभाषित करने का कार्य किया जा रहा है।

शिक्षक कभी न तो रिटायर होते न हो टायर्ड होते हैं। वह समाज को मार्गदर्शन देने का काम जीवन पर्यन्त करते है। महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति पंजीयन के अनुपात में हो यह सुनिश्चित करने का कार्य भी शिक्षिकों का है। शिक्षकों की भूमिका समाज के लिये समसे महत्वपूर्ण है क्यों कि एक इंजीनियर अपने जीवन में एक पुल या कुछ विल्डिंगोें को खराब करेगे लेकिन यदि शिक्षक सही नहीं हुआ तो वह एक पीढ़ी को खराब करने का काम करेगा। कार्यक्रम आयोजक अतिरिक्त संचालक, डॉ. नीरज दुबे ने स्वागत उद्बोधन दिया । विशिष्ट अतिथि डॉ. शक्ति जैन, कुल सचिव, रानी अवन्ती बाई लोधी वि.वि. ने कहा कि पहले पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा । प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने इस कार्यशाला में संभाग के प्राचार्यों को संबोधित करते हुये कहा कि हम सभी आज यह प्रशिक्षण प्राप्त कर सत्य और ज्ञान का प्रकाश प्रकीर्ण करें । उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. अंजना चतुर्वेदी, तथा आभार डॉ. रश्मि दुबे ने माना। प्रथम सत्र की मुख्य वक्त डॉ. इमराना सिद्दीकी ने सत्र की औपचारिक शुरूवात की । राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अध्यादेश 14 (1) के विषय में पीपीटी के माध्यम से विस्तार से चर्चा की। आर.के. गोस्वामी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी ने धारा 14 2 के विषय में बताया कि स्नातकोत्तर कार्यक्रम में एक वर्षीय एवं दो वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित है। पाठ्यक्रम की संरचना मूल्य-संवर्धित एवं कौशल आधारित है।
संभागीय कार्यशाला के द्वितीय सत्र में डॉ. प्रशांत सोनी ने बताया कि डिजी लॉकर में हम अपने जीवन वर्यन्त के समस्त प्रमाण पत्र एवं वसीयत रख सकते हैं । डॉ. स्वेता ओझा ने डिजी लॉकर के पंजीयन करने की प्रक्रिया बताई । डॉ. संतोष चढ़ार ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा माध्यम एक बड़े विकल्प के रूप में कोरोना काल में प्राप्त हुआ है। डॉ. अजय सिंह ठाकुर ने बताया कि विद्यार्थियों की गुणवत्ता में शैक्षणिक गुणवत्ता में आवश्यक भूमिका निभा रहा है। सत्रों का संचालन आर.के. गोस्वामी तथा आभार डॉ. ए.सी. जैन प्राचार्य ने माना।
कार्यक्रम में पूर्व अतिरिक्त संचालक डॉ सुनील श्रीवास्तवए पूर्व प्राचार्यगण डॉ संजीव दुबे डॉ एस एम पचौरी डॉ पवन शर्मा संभाग के अग्रणी महाविद्यालयों के प्राचार्य डॉ मधु स्थापक, डॉ रंजना मिश्रा, डॉ गोपा जैन डॉ इमराना सिद्दीकीए डॉ प्रतिभा जैन, डॉ जयकुमार सोनी,डॉ अमर कुमार जैन, डॉ राणा कुंजर सिंह, डॉ रेणु सोलंकी, राजीव आदि मौजूद रहे ।

शिक्षक कभी न तो रिटायर होते न हो टायर्ड होते हैं। वह समाज को मार्गदर्शन देने का काम जीवन पर्यन्त करते है। महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति पंजीयन के अनुपात में हो यह सुनिश्चित करने का कार्य भी शिक्षिकों का है। शिक्षकों की भूमिका समाज के लिये समसे महत्वपूर्ण है क्यों कि एक इंजीनियर अपने जीवन में एक पुल या कुछ विल्डिंगोें को खराब करेगे लेकिन यदि शिक्षक सही नहीं हुआ तो वह एक पीढ़ी को खराब करने का काम करेगा। कार्यक्रम आयोजक अतिरिक्त संचालक, डॉ. नीरज दुबे ने स्वागत उद्बोधन दिया । विशिष्ट अतिथि डॉ. शक्ति जैन, कुल सचिव, रानी अवन्ती बाई लोधी वि.वि. ने कहा कि पहले पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा । प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने इस कार्यशाला में संभाग के प्राचार्यों को संबोधित करते हुये कहा कि हम सभी आज यह प्रशिक्षण प्राप्त कर सत्य और ज्ञान का प्रकाश प्रकीर्ण करें । उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. अंजना चतुर्वेदी, तथा आभार डॉ. रश्मि दुबे ने माना। प्रथम सत्र की मुख्य वक्त डॉ. इमराना सिद्दीकी ने सत्र की औपचारिक शुरूवात की । राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अध्यादेश 14 (1) के विषय में पीपीटी के माध्यम से विस्तार से चर्चा की। आर.के. गोस्वामी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी ने धारा 14 2 के विषय में बताया कि स्नातकोत्तर कार्यक्रम में एक वर्षीय एवं दो वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित है। पाठ्यक्रम की संरचना मूल्य-संवर्धित एवं कौशल आधारित है।
संभागीय कार्यशाला के द्वितीय सत्र में डॉ. प्रशांत सोनी ने बताया कि डिजी लॉकर में हम अपने जीवन वर्यन्त के समस्त प्रमाण पत्र एवं वसीयत रख सकते हैं । डॉ. स्वेता ओझा ने डिजी लॉकर के पंजीयन करने की प्रक्रिया बताई । डॉ. संतोष चढ़ार ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा माध्यम एक बड़े विकल्प के रूप में कोरोना काल में प्राप्त हुआ है। डॉ. अजय सिंह ठाकुर ने बताया कि विद्यार्थियों की गुणवत्ता में शैक्षणिक गुणवत्ता में आवश्यक भूमिका निभा रहा है। सत्रों का संचालन आर.के. गोस्वामी तथा आभार डॉ. ए.सी. जैन प्राचार्य ने माना।
कार्यक्रम में पूर्व अतिरिक्त संचालक डॉ सुनील श्रीवास्तवए पूर्व प्राचार्यगण डॉ संजीव दुबे डॉ एस एम पचौरी डॉ पवन शर्मा संभाग के अग्रणी महाविद्यालयों के प्राचार्य डॉ मधु स्थापक, डॉ रंजना मिश्रा, डॉ गोपा जैन डॉ इमराना सिद्दीकीए डॉ प्रतिभा जैन, डॉ जयकुमार सोनी,डॉ अमर कुमार जैन, डॉ राणा कुंजर सिंह, डॉ रेणु सोलंकी, राजीव आदि मौजूद रहे ।
