सागर । आज की तेजी से बदलती जीवनशैली में युवा बालिकाओं के स्वास्थ्य पर कई चुनौतियां मंडरा रही हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर तथा गर्ल्स डिग्री कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान से नई गर्ल्स डिग्री कॉलेज परिसर, पथरिया में युवा बालिकाओं के स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रबंधन संबंधित एक व्यापक कार्यक्रम आयोजन किया गया।

इनमें मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न ड्राई आई (सूखी आंखें), अनिद्रा (नींद की कमी), मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, पोषण की कमी से होने वाला एनीमिया, मासिक धर्म संबंधी विभिन्न विकार जैसे अत्यधिक रक्तस्राव, दर्द और ऐंठन, साथ ही चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के बारे में चर्चा हुई. स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, इन समस्याओं का समय पर प्रबंधन न केवल वर्तमान स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी लाभदायक सिद्ध होता है।आईएमए अध्यक्ष डॉ तल्हा साद ने बताया के युवा बालिकाओं में मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो ड्राई आई सिंड्रोम का प्रमुख कारण बन रही है। लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन आता है। इसके अलावा, रात में मोबाइल का उपयोग अनिद्रा को बढ़ावा देता है, जो थकान, एकाग्रता की कमी और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है।उन्होंने बताया के मोबाइल उपयोग को सीमित रखें – प्रतिदिन 1-2 घंटे से अधिक न हो, 20-20-20 नियम अपनाएं (हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें), और नीली रोशनी फिल्टर का उपयोग करें। साथ ही, नियमित व्यायाम और बाहर खेलकूद से मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाया जा सकता है।
डॉ तल्हा साद ने बताया के पोषण और एनीमिया की समस्या युवा बालिकाओं में सर्वाधिक प्रचलित है। भारत में लगभग 50-60 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से प्रभावित हैं, जो थकान, कमजोरी और पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करती है। इसका प्रमुख कारण आयरन और फोलिक एसिड की कमी है, जो मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से और बढ़ जाती है।एनीमिया के लिए उचित आहार अपनाना आवश्यक है – हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़ (जो प्राकृतिक रूप से आयरन का स्रोत है और भोजन पूरक के रूप में उपयोगी), फल और विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। गुड़ को दैनिक आहार में जोड़ने से आयरन की कमी को प्राकृतिक रूप से दूर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, सरकारी कार्यक्रम जैसे ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के तहत साप्ताहिक आयरन और फोलिक एसिड की गोली (WIFS) को निवारक उपाय के रूप में लिया जाना चाहिए। नियमित जांच और कीड़े की दवा (डीवॉर्मिंग) भी महत्वपूर्ण हैं।
डॉ तल्हा साद ने बताया के मासिक धर्म संबंधी समस्याएं युवा बालिकाओं के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। इनमें अत्यधिक रक्तस्राव (मेनोरेजिया) जो एनीमिया का कारण बनता है, मासिक धर्म के दौरान दर्द और ऐंठन (डिसमेनोरिया), अनियमित चक्र शामिल हैं। ये समस्याएं कॉलेज से अनुपस्थिति, मानसिक तनाव और आत्मविश्वास की कमी को बढ़ाती हैं। मासिक धर्म संबंधित उचित स्वच्छता अपनाएं सेनेटरी पैड को नियमित रूप से (हर 4-6 घंटे में) बदलें, का ध्यान रखें और संक्रमण से बचाव के लिए साबुन से धोएं। मिथकों को दूर करें और परिवार/स्कूल में खुली चर्चा को प्रोत्साहित दें । दर्द के लिए गर्म पानी की थैली, हल्का व्यायाम और डॉक्टर की सलाह पर दवा लें। सरकारी योजनाओं जैसे ‘मासिक धर्म स्वच्छता योजना’ (MHS) के तहत सस्ते पैड उपलब्ध हैं।
डॉ तल्हा साद ने बताया के मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे जैसे चिंता और अवसाद युवा बालिकाओं में बढ़ते जा रहे हैं, जो शैक्षणिक दबाव, शारीरिक परिवर्तन, सामाजिक मीडिया और लिंग आधारित भेदभाव से जुड़े हैं। ये आत्महत्या के जोखिम को भी बढ़ाते हैं। प्रबंधन के लिए जीवन कौशल शिक्षा, परामर्श और सहयोगी वातावरण आवश्यक है। माता-पिता और शिक्षकों को संकेतों (जैसे उदासी, अलगाव) पर ध्यान देना चाहिए और समय पर मदद लेनी चाहिए। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत किशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (AFHC) में गोपनीय सलाह उपलब्ध है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी, एनएसएस कार्यक्रम संयोजक डॉ सरिता जैन,डॉ.आकर्षा तिवारी और डॉ अर्चना मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर तथा गर्ल्स डिग्री कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान से नई गर्ल्स डिग्री कॉलेज परिसर, पथरिया में युवा बालिकाओं के स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रबंधन संबंधित एक व्यापक कार्यक्रम आयोजन किया गया।

इनमें मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न ड्राई आई (सूखी आंखें), अनिद्रा (नींद की कमी), मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, पोषण की कमी से होने वाला एनीमिया, मासिक धर्म संबंधी विभिन्न विकार जैसे अत्यधिक रक्तस्राव, दर्द और ऐंठन, साथ ही चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के बारे में चर्चा हुई. स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, इन समस्याओं का समय पर प्रबंधन न केवल वर्तमान स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी लाभदायक सिद्ध होता है।आईएमए अध्यक्ष डॉ तल्हा साद ने बताया के युवा बालिकाओं में मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो ड्राई आई सिंड्रोम का प्रमुख कारण बन रही है। लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन आता है। इसके अलावा, रात में मोबाइल का उपयोग अनिद्रा को बढ़ावा देता है, जो थकान, एकाग्रता की कमी और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है।उन्होंने बताया के मोबाइल उपयोग को सीमित रखें – प्रतिदिन 1-2 घंटे से अधिक न हो, 20-20-20 नियम अपनाएं (हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें), और नीली रोशनी फिल्टर का उपयोग करें। साथ ही, नियमित व्यायाम और बाहर खेलकूद से मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाया जा सकता है।
डॉ तल्हा साद ने बताया के पोषण और एनीमिया की समस्या युवा बालिकाओं में सर्वाधिक प्रचलित है। भारत में लगभग 50-60 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से प्रभावित हैं, जो थकान, कमजोरी और पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करती है। इसका प्रमुख कारण आयरन और फोलिक एसिड की कमी है, जो मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से और बढ़ जाती है।एनीमिया के लिए उचित आहार अपनाना आवश्यक है – हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़ (जो प्राकृतिक रूप से आयरन का स्रोत है और भोजन पूरक के रूप में उपयोगी), फल और विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। गुड़ को दैनिक आहार में जोड़ने से आयरन की कमी को प्राकृतिक रूप से दूर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, सरकारी कार्यक्रम जैसे ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के तहत साप्ताहिक आयरन और फोलिक एसिड की गोली (WIFS) को निवारक उपाय के रूप में लिया जाना चाहिए। नियमित जांच और कीड़े की दवा (डीवॉर्मिंग) भी महत्वपूर्ण हैं।
डॉ तल्हा साद ने बताया के मासिक धर्म संबंधी समस्याएं युवा बालिकाओं के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। इनमें अत्यधिक रक्तस्राव (मेनोरेजिया) जो एनीमिया का कारण बनता है, मासिक धर्म के दौरान दर्द और ऐंठन (डिसमेनोरिया), अनियमित चक्र शामिल हैं। ये समस्याएं कॉलेज से अनुपस्थिति, मानसिक तनाव और आत्मविश्वास की कमी को बढ़ाती हैं। मासिक धर्म संबंधित उचित स्वच्छता अपनाएं सेनेटरी पैड को नियमित रूप से (हर 4-6 घंटे में) बदलें, का ध्यान रखें और संक्रमण से बचाव के लिए साबुन से धोएं। मिथकों को दूर करें और परिवार/स्कूल में खुली चर्चा को प्रोत्साहित दें । दर्द के लिए गर्म पानी की थैली, हल्का व्यायाम और डॉक्टर की सलाह पर दवा लें। सरकारी योजनाओं जैसे ‘मासिक धर्म स्वच्छता योजना’ (MHS) के तहत सस्ते पैड उपलब्ध हैं।
डॉ तल्हा साद ने बताया के मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे जैसे चिंता और अवसाद युवा बालिकाओं में बढ़ते जा रहे हैं, जो शैक्षणिक दबाव, शारीरिक परिवर्तन, सामाजिक मीडिया और लिंग आधारित भेदभाव से जुड़े हैं। ये आत्महत्या के जोखिम को भी बढ़ाते हैं। प्रबंधन के लिए जीवन कौशल शिक्षा, परामर्श और सहयोगी वातावरण आवश्यक है। माता-पिता और शिक्षकों को संकेतों (जैसे उदासी, अलगाव) पर ध्यान देना चाहिए और समय पर मदद लेनी चाहिए। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत किशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (AFHC) में गोपनीय सलाह उपलब्ध है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी, एनएसएस कार्यक्रम संयोजक डॉ सरिता जैन,डॉ.आकर्षा तिवारी और डॉ अर्चना मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई.
