सागर । र्स्वास्थ्य विभाग एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में राहतगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नेशनल हैंड वाशिंग वीक मनाया। डॉ नीना गिडियन ने बताया कि हाथ धोने की आदत डालना है , क्योंकि हाथों के द्वारा ही संक्रमण हमारे शरीर में जाता है।दस्त और निमोनिया होने का डर रहता है और आज शिशु मृत्यु दर जो कम नहीं हो पा रही है और महिलाओं में एनीमिया तो हर महिला, पुरुष, और बच्चों को ऐसी आदत डालना है कि, खाने के पहिले, शौच के बाद, बाहर से घर आने पर, खांसते और छींकते समय हाथ का प्रयोग न करें। उंगलियां आंख , नाक या मुंह में न डालें।इससे कई बीमारियां जैसे टाइफाइड, वर्म्स डायरिया, निमोनिया होताहै।

अनावश्यक एंटीबायोटिक का प्रयोग शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत कम करता है। इस दौरान चिकित्सकों ने आमजन को साबुन से हाथ धोने की सही तकनीक सिखाई तथा इसके स्वास्थ्य लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. जितेंद्र सराफ ने बताया कि साबुन और पानी से हाथ धोना रोगों से बचाव का सबसे सरल लेकिन सबसे शक्तिशाली उपाय है। वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नियमित हाथ धोने से दस्त, सर्दी-जुकाम, फ्लू तथा अन्य श्वसन संक्रमणों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। यह छूआछूत से फैलने वाले कीटाणुओं की कड़ी को तोड़ देता है और सम्पूर्ण रोग बोझ को कम करता है।
IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तलहा साद ने कहा कि साबुन से हाथ धोने से दस्त के मामलों में 40 प्रतिशत तक और निमोनिया में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आ सकती है। इससे विश्व भर में हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि हाथ धोने की प्रक्रिया कम से कम 20 सेकंड तक चलनी चाहिए। जहां साबुन-पानी उपलब्ध न हो, वहां अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइज़र एक प्रभावी विकल्प है जो अधिकांश कीटाणुओं को खत्म कर देता है। एक सर्वे के अनुसार सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने के बाद केवल 31 प्रतिशत पुरुष और 65 प्रतिशत महिलाएं ही हाथ धोते हैं – यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन , सागर ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इन छोटी-छोटी आदतों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और स्वयं को तथा अपने परिवार को संक्रमणों से सुरक्षित रखें। बी एम ओ डॉ विकेश फुसकेले, ,डॉ रैकवार, डॉ भारद्वाज बड़ी संख्या में मौजूद नर्सिंग स्टाफ , आशा वर्कर्स और आमजन की मौजूदगी ने सेशन को और प्रभावी बनाया।

अनावश्यक एंटीबायोटिक का प्रयोग शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत कम करता है। इस दौरान चिकित्सकों ने आमजन को साबुन से हाथ धोने की सही तकनीक सिखाई तथा इसके स्वास्थ्य लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. जितेंद्र सराफ ने बताया कि साबुन और पानी से हाथ धोना रोगों से बचाव का सबसे सरल लेकिन सबसे शक्तिशाली उपाय है। वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नियमित हाथ धोने से दस्त, सर्दी-जुकाम, फ्लू तथा अन्य श्वसन संक्रमणों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। यह छूआछूत से फैलने वाले कीटाणुओं की कड़ी को तोड़ देता है और सम्पूर्ण रोग बोझ को कम करता है।
IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तलहा साद ने कहा कि साबुन से हाथ धोने से दस्त के मामलों में 40 प्रतिशत तक और निमोनिया में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आ सकती है। इससे विश्व भर में हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि हाथ धोने की प्रक्रिया कम से कम 20 सेकंड तक चलनी चाहिए। जहां साबुन-पानी उपलब्ध न हो, वहां अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइज़र एक प्रभावी विकल्प है जो अधिकांश कीटाणुओं को खत्म कर देता है। एक सर्वे के अनुसार सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने के बाद केवल 31 प्रतिशत पुरुष और 65 प्रतिशत महिलाएं ही हाथ धोते हैं – यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन , सागर ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इन छोटी-छोटी आदतों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और स्वयं को तथा अपने परिवार को संक्रमणों से सुरक्षित रखें। बी एम ओ डॉ विकेश फुसकेले, ,डॉ रैकवार, डॉ भारद्वाज बड़ी संख्या में मौजूद नर्सिंग स्टाफ , आशा वर्कर्स और आमजन की मौजूदगी ने सेशन को और प्रभावी बनाया।
