सागर । गर्भधारण से लेकर दो वर्ष की आयु तक के प्रथम 1000 दिन बच्चे के संपूर्ण विकास शारीरिक, मानसिक, संज्ञानात्मक एवं प्रतिरक्षा के लिए अत्यंत निर्णायक माने जाते हैं। इस अवधि में दिया गया उचित पोषण आजीवन स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। इसी महत्वपूर्ण उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग, मध्यप्रदेश के अंतर्गत कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, सागर संभाग की अध्यक्षता में IYCF (शिशु एवं बाल आहार प्रबंधन) का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडीयन ने बताया कि कार्यक्रम में सागर संभाग के सभी ज़िलों सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी से आए स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, FOGSI, IAP तथा IMA के सदस्यों ने सहभागिता की एवं RMNCHA कोऑर्डिनेटर एवं एविडेंस एक्शन इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक श्री हुसैन खान भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम के सहायक प्रशिक्षक डॉ. प्रिंस अग्रवाल द्वारा शीघ्र शुरुआत का महत्व । डॉ. बृजेश यादव द्वारा स्तनपान संवर्धन में प्रशासक एवं अस्पताल नेतृत्व की भूमिका आईएमएस अधिनियम का प्रभाव एवं प्रावधान।
एवं डॉ. मधु जैन द्वारा पूरक आहार की गुणवत्ता सुधारने के व्यवहारिक उपाय
आदि सभी विषय, पी पी टी प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विस्तृत रूप से समझाए गए।इस प्रशिक्षण में विशेष रूप से जन्म के समय स्तनपान क्यों जरूरी है इस विषय को भी शामिल किया गया, जिसमें बताया गया कि जन्म के पहले घंटे में दिया गया पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, संक्रमण से बचाने और स्वस्थ विकास की नींव रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राइवेट शिशु रोग विशेषज्ञों को भी निर्देशित किया गया कि वे अपने अस्पतालों में प्रसव के बाद शीघ्र स्तनपान सुनिश्चित कराने, माताओं को सही परामर्श देने और नवजात की प्रारंभिक देखभाल में आईवाईसीएफ प्रोटोकॉल का पालन करने पर विशेष ध्यान दें।प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया ।कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. ममता तिमोरी (CMHO सागर)डॉ. शालिनी हजेला डॉ. जागृति नागर डॉ. ललिता पाटिल डॉ. अमित दुबे डॉ. गायत्री नामदेव डॉ. पी.एस. ठाकुर , डॉ. जयंत (सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय सागर)डॉ. संजोत माहेश्वरी IMA अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद डॉ. अल्का केशरवानी डॉ. मोना केशरवानी एवं क्षेत्रीय संचालक कार्यालय से अध्यक्ष डॉ नीना गिडियन, सीनियर जॉइंट डायरेक्टर डॉ. एस.आर. रोशन, सीनियर जॉइंट डायरेक्टर डॉ. एम.पी. शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुशीला यादव, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सचिन मलैया कार्यकारी अधिकारी के रूप में उपस्थित रहे।समापन पर क्षेत्रीय संचालक ने कहा कि आईवाईसीएफ के सही क्रियान्वयन से मातृ-शिशु स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार संभव है। प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को फील्ड और अस्पताल दोनों स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडीयन ने बताया कि कार्यक्रम में सागर संभाग के सभी ज़िलों सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी से आए स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, FOGSI, IAP तथा IMA के सदस्यों ने सहभागिता की एवं RMNCHA कोऑर्डिनेटर एवं एविडेंस एक्शन इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक श्री हुसैन खान भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम के सहायक प्रशिक्षक डॉ. प्रिंस अग्रवाल द्वारा शीघ्र शुरुआत का महत्व । डॉ. बृजेश यादव द्वारा स्तनपान संवर्धन में प्रशासक एवं अस्पताल नेतृत्व की भूमिका आईएमएस अधिनियम का प्रभाव एवं प्रावधान।
एवं डॉ. मधु जैन द्वारा पूरक आहार की गुणवत्ता सुधारने के व्यवहारिक उपाय
आदि सभी विषय, पी पी टी प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विस्तृत रूप से समझाए गए।इस प्रशिक्षण में विशेष रूप से जन्म के समय स्तनपान क्यों जरूरी है इस विषय को भी शामिल किया गया, जिसमें बताया गया कि जन्म के पहले घंटे में दिया गया पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, संक्रमण से बचाने और स्वस्थ विकास की नींव रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राइवेट शिशु रोग विशेषज्ञों को भी निर्देशित किया गया कि वे अपने अस्पतालों में प्रसव के बाद शीघ्र स्तनपान सुनिश्चित कराने, माताओं को सही परामर्श देने और नवजात की प्रारंभिक देखभाल में आईवाईसीएफ प्रोटोकॉल का पालन करने पर विशेष ध्यान दें।प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया ।कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. ममता तिमोरी (CMHO सागर)डॉ. शालिनी हजेला डॉ. जागृति नागर डॉ. ललिता पाटिल डॉ. अमित दुबे डॉ. गायत्री नामदेव डॉ. पी.एस. ठाकुर , डॉ. जयंत (सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय सागर)डॉ. संजोत माहेश्वरी IMA अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद डॉ. अल्का केशरवानी डॉ. मोना केशरवानी एवं क्षेत्रीय संचालक कार्यालय से अध्यक्ष डॉ नीना गिडियन, सीनियर जॉइंट डायरेक्टर डॉ. एस.आर. रोशन, सीनियर जॉइंट डायरेक्टर डॉ. एम.पी. शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुशीला यादव, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सचिन मलैया कार्यकारी अधिकारी के रूप में उपस्थित रहे।समापन पर क्षेत्रीय संचालक ने कहा कि आईवाईसीएफ के सही क्रियान्वयन से मातृ-शिशु स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार संभव है। प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को फील्ड और अस्पताल दोनों स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
