सागर । पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय सागर एवं रानी अवंती बाई वि.वि. सागर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित बुन्देलखण्ड के लोकहृदय में श्रीराम विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. यशवंत ठाकुर कुलगुरू डॉ. हरीसिंह गौर वि.वि,, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, रामायण केन्द्र, डॉ. कुमकुम गुप्ता, गोकुल सोनी, डॉ. शरद सिंह, डॉ. अनुभूति शर्मा ने गहन विचार विमर्स कर अपने उद्बोधन दिये। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा बुन्देलखण्ड के ऐरिहासिक पटल और सांस्कृतिक परंपराओं में श्रीराम की उपस्थिति गौरांवित करती है।

डॉ. अनुभूति शर्मा रामायण केंद्र भोपाल ने कहा कि राष्ट्र का मंगल करने वाला व्यक्तिव श्रीराम है। जेन-जी के हृदय में श्रीराम के चरित्र को उतारना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। राम समरसता के प्रतीक है। मैथलीशरण गुप्त के परिवार से पधारी डॉ. कुमकुम गुप्ता ने कहा कि बाचिक परम्परा से साहित्यिक परम्परा तक निरंतर राम विद्यमान है। सर्वप्रथम रामायण कथा को लिखने का काम विष्णुधरदास ने किया। तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को जन जन तक पहुंचाने का परम कार्य किया। बुन्देलखण्ड राम काव्य की गंगोत्री है। गोकुल सोनी वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल ने कहा कि राम भक्ति अकेले राम की सम्भव नहीं हैं सीता के साथ ही उनका स्मरण करे। युवा विश्व के किसी कौने मेें रहें वह राम को अपने हृदय में स्थान दे। बुन्देलखण्ड श्रीराम भगवन की कर्म भूमि है। साहित्यकार शरद सिंह ने पद्माकर के काव्य में श्रीराम की उपस्थिति पर चर्चा की। श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास में बुन्देलखण्ड में श्रीराम लगभग साड़े ग्यारह वर्ष रहें। राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि रामायण केन्द्र विश्व में श्रीराम के विचार भावनाओं के प्रचार प्रसार में संलग्न संस्कृति है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. यशवंत सिंह ठाकुर कुलगुरू डॉ. हरीसिंह गौर वि.वि. ने बुन्देली लोगो ने श्रीराम की सरलता, नेतृत्व क्षमता को उनके समरसता के सिद्धातों के साथ अपनाया। संचालन डॉ. रविन्द्र सिंह ठाकुर ने किया।
सत्र के समापन पर डॉ. संदीप सबलोक ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय करते हुए रामायण की पावन चौपाई के साथ आभार व्यक्त किया ।
डॉ. सबलोक ने इस वंदना के माध्यम से कुलगुरू डॉ. यशवन्त ठाकुर, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, डॉ. कुमकुम गुप्ता, गोकुल सोनी, डॉ. शरद सिंह, डॉ. अनुभूति शर्मा और उपस्थित समस्त विद्वतजन एवं शोधार्थियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। समापन सत्र के मुख्य अतिथि अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे ने कहा कि श्रीराम की मर्यादा व वचनबद्धता एवं भातृप्रेम ने श्रीराम को व्यवहारिक लोक में नर से नारायण बनने का मार्ग दिखाया। सुखदेव वाजपेयी विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग स्वामी विवेकानंद वि.वि. ने कहा कि वाल्मीकी आश्रम एवं मेघदूत में श्रीराम केे चरित्र की विस्तृत व्याख्या की। डॉ. राम कुमार तिवारी ने नवधा भक्ति में श्रीराम की उपस्थिति को बताया। कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा कि श्रीराम साम्यवाद के पहले उदाहरण हैं जब उन्होंने श्रीलंका में विभीषण तथा किष्किन्धा में सुघ्रीव को राजा बनाने के बाद अपना किसी प्रकार का भी अधिकारी नहीं रखा। श्रीराम बुन्देलखण्ड के जड़ एवं चेतना दोनों में समाहित है। डॉ. रामकुमार गोस्वामी ओएसडी ने कहा कि रघुनाथ न तो परीक्षा के विषय है और न परीक्षण, के वह तो केवल आस्था व श्रृद्धा के विषय है। आस्था के साथ श्रीराम को आप जपेगे तो वह आपकेे हृदय में रहेंगे। डॉ. रंजना मिश्रा ने श्रीराम के चरित्र को विश्व में सर्वश्रेष्ठ माना। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने किया तथा आभार डॉ. सरोज गुप्ता प्राचार्य ने माना। कार्यक्रम में डॉ. गोपा जैन, डॉ. विनय शर्मा, डॉ. इमराना सिद्दीकी, डॉ. संगीता मुखर्जी, डॉ. जयकुमार सोनी, डॉ. अमर कुमार जैन, डॉ. राना कंुजर सिंह , श्री सुरेन्द्र यादव डॉ. अभिलाषा जैन डॉ. शुचिता अग्रवाल, श्रीमती रेनू सोेलंकी, डॉ. प्रतिभा जैन, डॉ. संगीता कुॅभारे, डॉ. अनुरोध चड़ार, डॉ. देवेन्द्र सिंह ठाकुर, डॉ. प्रकाश कुशवाहा, डॉ. शैलेन्द्र सिंह राजपूत रहे।

डॉ. अनुभूति शर्मा रामायण केंद्र भोपाल ने कहा कि राष्ट्र का मंगल करने वाला व्यक्तिव श्रीराम है। जेन-जी के हृदय में श्रीराम के चरित्र को उतारना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। राम समरसता के प्रतीक है। मैथलीशरण गुप्त के परिवार से पधारी डॉ. कुमकुम गुप्ता ने कहा कि बाचिक परम्परा से साहित्यिक परम्परा तक निरंतर राम विद्यमान है। सर्वप्रथम रामायण कथा को लिखने का काम विष्णुधरदास ने किया। तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को जन जन तक पहुंचाने का परम कार्य किया। बुन्देलखण्ड राम काव्य की गंगोत्री है। गोकुल सोनी वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल ने कहा कि राम भक्ति अकेले राम की सम्भव नहीं हैं सीता के साथ ही उनका स्मरण करे। युवा विश्व के किसी कौने मेें रहें वह राम को अपने हृदय में स्थान दे। बुन्देलखण्ड श्रीराम भगवन की कर्म भूमि है। साहित्यकार शरद सिंह ने पद्माकर के काव्य में श्रीराम की उपस्थिति पर चर्चा की। श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास में बुन्देलखण्ड में श्रीराम लगभग साड़े ग्यारह वर्ष रहें। राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि रामायण केन्द्र विश्व में श्रीराम के विचार भावनाओं के प्रचार प्रसार में संलग्न संस्कृति है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. यशवंत सिंह ठाकुर कुलगुरू डॉ. हरीसिंह गौर वि.वि. ने बुन्देली लोगो ने श्रीराम की सरलता, नेतृत्व क्षमता को उनके समरसता के सिद्धातों के साथ अपनाया। संचालन डॉ. रविन्द्र सिंह ठाकुर ने किया।
सत्र के समापन पर डॉ. संदीप सबलोक ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय करते हुए रामायण की पावन चौपाई के साथ आभार व्यक्त किया ।
डॉ. सबलोक ने इस वंदना के माध्यम से कुलगुरू डॉ. यशवन्त ठाकुर, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, डॉ. कुमकुम गुप्ता, गोकुल सोनी, डॉ. शरद सिंह, डॉ. अनुभूति शर्मा और उपस्थित समस्त विद्वतजन एवं शोधार्थियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। समापन सत्र के मुख्य अतिथि अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे ने कहा कि श्रीराम की मर्यादा व वचनबद्धता एवं भातृप्रेम ने श्रीराम को व्यवहारिक लोक में नर से नारायण बनने का मार्ग दिखाया। सुखदेव वाजपेयी विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग स्वामी विवेकानंद वि.वि. ने कहा कि वाल्मीकी आश्रम एवं मेघदूत में श्रीराम केे चरित्र की विस्तृत व्याख्या की। डॉ. राम कुमार तिवारी ने नवधा भक्ति में श्रीराम की उपस्थिति को बताया। कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा कि श्रीराम साम्यवाद के पहले उदाहरण हैं जब उन्होंने श्रीलंका में विभीषण तथा किष्किन्धा में सुघ्रीव को राजा बनाने के बाद अपना किसी प्रकार का भी अधिकारी नहीं रखा। श्रीराम बुन्देलखण्ड के जड़ एवं चेतना दोनों में समाहित है। डॉ. रामकुमार गोस्वामी ओएसडी ने कहा कि रघुनाथ न तो परीक्षा के विषय है और न परीक्षण, के वह तो केवल आस्था व श्रृद्धा के विषय है। आस्था के साथ श्रीराम को आप जपेगे तो वह आपकेे हृदय में रहेंगे। डॉ. रंजना मिश्रा ने श्रीराम के चरित्र को विश्व में सर्वश्रेष्ठ माना। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने किया तथा आभार डॉ. सरोज गुप्ता प्राचार्य ने माना। कार्यक्रम में डॉ. गोपा जैन, डॉ. विनय शर्मा, डॉ. इमराना सिद्दीकी, डॉ. संगीता मुखर्जी, डॉ. जयकुमार सोनी, डॉ. अमर कुमार जैन, डॉ. राना कंुजर सिंह , श्री सुरेन्द्र यादव डॉ. अभिलाषा जैन डॉ. शुचिता अग्रवाल, श्रीमती रेनू सोेलंकी, डॉ. प्रतिभा जैन, डॉ. संगीता कुॅभारे, डॉ. अनुरोध चड़ार, डॉ. देवेन्द्र सिंह ठाकुर, डॉ. प्रकाश कुशवाहा, डॉ. शैलेन्द्र सिंह राजपूत रहे।
