सागर । हफसिली में स्थित डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल के पशुमेला क्षेत्र में 22 अक्टूबर बुधवार को गोवर्धन अन्नकूट पूजन उत्सव बड़े स्तर पर हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जायेगा, इस आयोजन के लिए समुचित आवश्यक व्यवस्थाएं निगमकर्मी और सागर डेयरी संचालक संघ सयुक्त रूप से सुनिश्चित कर तैयारियां पूर्ण करे ।

उक्त निर्देश निगमायुक्त सह कार्यकारी निदेशक सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड राजकुमार खत्री ने रविवार को डेयरी परियोजना स्थल हफसिली के निरीक्षण के दौरान डेयरी संचालकों से संवाद कर दिये। उन्होंने निरीक्षण के दौरान हफसिली में निर्मित डेयरी शेड्स में बंधे पशुओं को देखा और डेयरी संचालन हेतु यहां उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं पानी की व्यवस्था, बिजली व्यवस्था आदि की जानकारी ली, उन्होंने डेयरी संचालकों की सहूलियत व सहयोग हेतु सभी आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश निगमकार्मियों को देते हुए कहा की शहर से प्रत्येक डेयरी का बाहर होना डेयरी संचालकों, नागरिकों और शहर के हित में है। निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल पर सभी डेयरी संचालकों के साथ मिलकर नवाचार करते हुए गोवर्धन अन्नकूट पूजन का विशेष आयोजन यहां के पशुमेला क्षेत्र में करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा की उत्सव त्यौहार सभी में खुशियों के साथ नव ऊर्जा का संचार करते हैं और यह खास आयोजन यहां के डेयरी संचालकों के साथ ही स्थानीय रहवासियों में हर्षोल्लास के साथ नई उमंग और ऊर्जा का संचार करता है । निगमायुक्त श्री खत्री ने कहा की 22 अक्टूबर बुधवार को दोपहर 12 बजे से डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल हफसिली के पशुमेला क्षेत्र में गोवर्धन अन्नकूट पूजन का भव्य आयोजन किया जायेगा। इस पूजन के लिए कई ट्रॉली गोबर एकत्र कर लगभग 101 फ़ीट लम्बाई और 11 फ़ीट ऊंचाई के गोवर्धन पर्वत का निर्माण किया जा रहा है। अन्नकूट पूजा के लिए बनाया जा रहा यह गोवर्धन पर्वत मध्यप्रदेश में लगभग सबसे बड़ा गोवर्धन पर्वत होगा। इस आयोजन के दौरान स्थानीय लोक नृत्य बधाई और बरेदी की मनमोहक प्रस्तुति के साथ रंग बिरंगी आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र होगी। पूजन में छप्पन भोग लगाकर प्रसादी वितरित की जायेगी। निगमायुक्त ने सभी नागरिकों से इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने की अपील की है।
उन्होंने कहा की कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है। यह दिवाली उत्सव का प्रमुख दिन माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किया था। धार्मिक मान्यता अनुसार गोवर्धन पर्वत के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गायों की भी पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाते समय गोबर का महत्व समझाते हुए बतलाया की यह प्रकृति और जीवन का एक अभिन्न अंग है, गोबर को ‘गो-धन’ का प्रतीक माना जाता है और यह पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी है। गोबर का उपयोग जैविक खाद और अन्य प्राकृतिक उत्पाद बनाने में किया जाता है, जो पर्यावरण को स्वस्थ रखने में मदद करता है । जहाँ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्वर्ग के देवताओं की जगह स्थानीय गौ और गोवर्धन पर्वत की पूजा को महत्त्व दिया गया ।

उक्त निर्देश निगमायुक्त सह कार्यकारी निदेशक सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड राजकुमार खत्री ने रविवार को डेयरी परियोजना स्थल हफसिली के निरीक्षण के दौरान डेयरी संचालकों से संवाद कर दिये। उन्होंने निरीक्षण के दौरान हफसिली में निर्मित डेयरी शेड्स में बंधे पशुओं को देखा और डेयरी संचालन हेतु यहां उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं पानी की व्यवस्था, बिजली व्यवस्था आदि की जानकारी ली, उन्होंने डेयरी संचालकों की सहूलियत व सहयोग हेतु सभी आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश निगमकार्मियों को देते हुए कहा की शहर से प्रत्येक डेयरी का बाहर होना डेयरी संचालकों, नागरिकों और शहर के हित में है। निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल पर सभी डेयरी संचालकों के साथ मिलकर नवाचार करते हुए गोवर्धन अन्नकूट पूजन का विशेष आयोजन यहां के पशुमेला क्षेत्र में करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा की उत्सव त्यौहार सभी में खुशियों के साथ नव ऊर्जा का संचार करते हैं और यह खास आयोजन यहां के डेयरी संचालकों के साथ ही स्थानीय रहवासियों में हर्षोल्लास के साथ नई उमंग और ऊर्जा का संचार करता है । निगमायुक्त श्री खत्री ने कहा की 22 अक्टूबर बुधवार को दोपहर 12 बजे से डेयरी विस्थापन परियोजना स्थल हफसिली के पशुमेला क्षेत्र में गोवर्धन अन्नकूट पूजन का भव्य आयोजन किया जायेगा। इस पूजन के लिए कई ट्रॉली गोबर एकत्र कर लगभग 101 फ़ीट लम्बाई और 11 फ़ीट ऊंचाई के गोवर्धन पर्वत का निर्माण किया जा रहा है। अन्नकूट पूजा के लिए बनाया जा रहा यह गोवर्धन पर्वत मध्यप्रदेश में लगभग सबसे बड़ा गोवर्धन पर्वत होगा। इस आयोजन के दौरान स्थानीय लोक नृत्य बधाई और बरेदी की मनमोहक प्रस्तुति के साथ रंग बिरंगी आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र होगी। पूजन में छप्पन भोग लगाकर प्रसादी वितरित की जायेगी। निगमायुक्त ने सभी नागरिकों से इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने की अपील की है।
उन्होंने कहा की कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है। यह दिवाली उत्सव का प्रमुख दिन माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किया था। धार्मिक मान्यता अनुसार गोवर्धन पर्वत के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गायों की भी पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाते समय गोबर का महत्व समझाते हुए बतलाया की यह प्रकृति और जीवन का एक अभिन्न अंग है, गोबर को ‘गो-धन’ का प्रतीक माना जाता है और यह पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी है। गोबर का उपयोग जैविक खाद और अन्य प्राकृतिक उत्पाद बनाने में किया जाता है, जो पर्यावरण को स्वस्थ रखने में मदद करता है । जहाँ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्वर्ग के देवताओं की जगह स्थानीय गौ और गोवर्धन पर्वत की पूजा को महत्त्व दिया गया ।
