सागर। पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से भगवान श्रीजी की भव्य विमान यात्रा श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ निकाली गई। विमान यात्रा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीजी के दर्शन कर धर्मलाभ अर्जित किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेश केसरवानी,भाजपा नेता मनोहर साहू,समाजसेवी कपिल मलैया,समाजसेवी वीरेंद्र जैन माल्थोन सहित अन्य लोग विमान यात्रा में सम्मिलित हुए और भगवान श्रीजी की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
शैलेश केसरवानी ने जैन समाज के श्रद्धालुओं को पर्यूषण पर्व के समापन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मशुद्धि, संयम, त्याग, तपस्या और क्षमा का संदेश देने वाला पावन पर्व है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने, गलतियों का आत्मावलोकन करने और सभी के प्रति प्रेम, सद्भाव एवं क्षमा का भाव रखने की प्रेरणा देता है।
वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेश केसरवानी ने कहा कि “जैन धर्म की शिक्षाएं केवल किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और करुणा का जो संदेश दिया, वह आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक है। पर्यूषण पर्व हमें आत्मसंयम के साथ-साथ ‘जियो और जीने दो’ की भावना को अपने जीवन में अपनाने का अवसर देता है।”
उन्होंने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है। पर्यूषण पर्व के समापन पर मन, वचन और कर्म से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बनाए रखने के लिए क्षमा और सहिष्णुता की भावना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सागर की धार्मिक एवं सामाजिक एकता की परंपरा सदैव मजबूत रही है। विभिन्न समाजों और धर्मों के पर्व-त्योहारों में एक-दूसरे की सहभागिता हमारी सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को दर्शाती है। उन्होंने जैन समाज द्वारा धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज की नई पीढ़ी को भी धर्म, संस्कार, सेवा और सदाचार से जोड़ने के प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए।
उन्होंने भगवान श्रीजी से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव की कामना करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व से प्राप्त आत्मसंयम, क्षमा और अहिंसा का संदेश हम सभी अपने जीवन में उतारें और समाज में प्रेम एवं भाईचारे को और मजबूत करें।
30 वर्षों से चली आ रही परंपरा
श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मंगलधाम में पिछले लगभग 30 वर्षों से श्रीजी की विमान यात्रा निकाली जा रही है। इस धार्मिक परंपरा को प्रारंभ करने का श्रेय स्वर्गीय श्री विमल जैन को दिया जाता है। उनके द्वारा समाज के सहयोग से जिनालय का निर्माण कराया गया था। इसके बाद से श्रीजी की विमान यात्रा की यह धार्मिक परंपरा निरंतर चली आ रही है।
विमान यात्रा के दौरान परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान श्रीजी की आरती एवं वंदना की।
इस अवसर पर प्रमोदजी नरेंद्र नायक, सुरेश संगम, दिलीप सिंघई, निर्मल जैन, नितिन जैन, अनुराग शेषई, सुधीर बिल्हरा, विनय पुजारी, नीरज जैन, संजय, अमित जैन, नितेन्द्र शिक्षक, राजेश जैन, मनीष सहारा, रजनी चौधरी, मणी जैन, ऊषा शाह, अनिष शाह, आशीष, अभिनव, सतीष जैन, रंजीत मिलेनियम एवं अभिषेक जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेश केसरवानी,भाजपा नेता मनोहर साहू,समाजसेवी कपिल मलैया,समाजसेवी वीरेंद्र जैन माल्थोन सहित अन्य लोग विमान यात्रा में सम्मिलित हुए और भगवान श्रीजी की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
शैलेश केसरवानी ने जैन समाज के श्रद्धालुओं को पर्यूषण पर्व के समापन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मशुद्धि, संयम, त्याग, तपस्या और क्षमा का संदेश देने वाला पावन पर्व है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने, गलतियों का आत्मावलोकन करने और सभी के प्रति प्रेम, सद्भाव एवं क्षमा का भाव रखने की प्रेरणा देता है।
वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेश केसरवानी ने कहा कि “जैन धर्म की शिक्षाएं केवल किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और करुणा का जो संदेश दिया, वह आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक है। पर्यूषण पर्व हमें आत्मसंयम के साथ-साथ ‘जियो और जीने दो’ की भावना को अपने जीवन में अपनाने का अवसर देता है।”
उन्होंने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है। पर्यूषण पर्व के समापन पर मन, वचन और कर्म से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बनाए रखने के लिए क्षमा और सहिष्णुता की भावना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सागर की धार्मिक एवं सामाजिक एकता की परंपरा सदैव मजबूत रही है। विभिन्न समाजों और धर्मों के पर्व-त्योहारों में एक-दूसरे की सहभागिता हमारी सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को दर्शाती है। उन्होंने जैन समाज द्वारा धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज की नई पीढ़ी को भी धर्म, संस्कार, सेवा और सदाचार से जोड़ने के प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए।
उन्होंने भगवान श्रीजी से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव की कामना करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व से प्राप्त आत्मसंयम, क्षमा और अहिंसा का संदेश हम सभी अपने जीवन में उतारें और समाज में प्रेम एवं भाईचारे को और मजबूत करें।
30 वर्षों से चली आ रही परंपरा
श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मंगलधाम में पिछले लगभग 30 वर्षों से श्रीजी की विमान यात्रा निकाली जा रही है। इस धार्मिक परंपरा को प्रारंभ करने का श्रेय स्वर्गीय श्री विमल जैन को दिया जाता है। उनके द्वारा समाज के सहयोग से जिनालय का निर्माण कराया गया था। इसके बाद से श्रीजी की विमान यात्रा की यह धार्मिक परंपरा निरंतर चली आ रही है।
विमान यात्रा के दौरान परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान श्रीजी की आरती एवं वंदना की।
इस अवसर पर प्रमोदजी नरेंद्र नायक, सुरेश संगम, दिलीप सिंघई, निर्मल जैन, नितिन जैन, अनुराग शेषई, सुधीर बिल्हरा, विनय पुजारी, नीरज जैन, संजय, अमित जैन, नितेन्द्र शिक्षक, राजेश जैन, मनीष सहारा, रजनी चौधरी, मणी जैन, ऊषा शाह, अनिष शाह, आशीष, अभिनव, सतीष जैन, रंजीत मिलेनियम एवं अभिषेक जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे।
