सागर । विश्व कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर एवं स्वास्थ्य विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान में सीएचसी जैसीनगर में एक विशेष मेगा जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि तंबाकू से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और एचपीवी वैक्सीनेशन के माध्यम से लगभग 40 प्रतिशत कैंसर की रोकथाम संभव है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लाखों लोग कैंसर से प्रभावित होते हैं, लेकिन यदि बीमारी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए तो जीवन रक्षा की संभावना अत्यंत बढ़ जाती है।
डॉ. साद ने बताया कि नियमित जांच जैसे मैमोग्राफी और पैप स्मीयर के माध्यम से यदि कैंसर स्टेज-1 में पकड़ में आ जाए तो उपचार की सफलता दर 90 प्रतिशत तक हो सकती है। इस अवसर पर उन्होंने कैंसर के सात प्रमुख चेतावनी संकेत भी बताए, जिनमें असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक न भरने वाले घाव, मल या मूत्र की आदतों में बदलाव, लगातार खांसी या आवाज बैठना, निगलने में कठिनाई, शरीर में गांठ तथा मस्सों में स्पष्ट परिवर्तन शामिल हैं। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के महत्व पर विशेष जोर दिया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस का संदेश — “प्रारंभिक पहचान पर फोकस, रोकथाम, उम्मीद और एकता” — सभी उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना।
इस अवसर पर बीएमओ डॉ. एल. एस. शाक्य, डॉ. प्रभात, डॉ. हरि ओम बंसल सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ, सीएचओ, सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि तंबाकू से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और एचपीवी वैक्सीनेशन के माध्यम से लगभग 40 प्रतिशत कैंसर की रोकथाम संभव है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लाखों लोग कैंसर से प्रभावित होते हैं, लेकिन यदि बीमारी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए तो जीवन रक्षा की संभावना अत्यंत बढ़ जाती है।
डॉ. साद ने बताया कि नियमित जांच जैसे मैमोग्राफी और पैप स्मीयर के माध्यम से यदि कैंसर स्टेज-1 में पकड़ में आ जाए तो उपचार की सफलता दर 90 प्रतिशत तक हो सकती है। इस अवसर पर उन्होंने कैंसर के सात प्रमुख चेतावनी संकेत भी बताए, जिनमें असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक न भरने वाले घाव, मल या मूत्र की आदतों में बदलाव, लगातार खांसी या आवाज बैठना, निगलने में कठिनाई, शरीर में गांठ तथा मस्सों में स्पष्ट परिवर्तन शामिल हैं। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के महत्व पर विशेष जोर दिया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस का संदेश — “प्रारंभिक पहचान पर फोकस, रोकथाम, उम्मीद और एकता” — सभी उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना।
इस अवसर पर बीएमओ डॉ. एल. एस. शाक्य, डॉ. प्रभात, डॉ. हरि ओम बंसल सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ, सीएचओ, सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।
